प्रदेश के प्रमुख शहरी केंद्रों और सातों संभागों में इन दिनों वायु प्रदूषण का स्तर सामान्य से अधिक चिंताजनक बना हुआ है, जहां ज्यादातर निगरानी केंद्रों पर गुणवत्ता का पैमाना मध्यम दायरे में सिमटा हुआ है। वातावरण में नमी की कमी, लगातार उड़ती धूल और सड़कों पर दौड़ते वाहनों से निकलने वाला उत्सर्जन हवा को लगातार दूषित कर रहा है। पर्यावरण पर नजर रखने वाले जानकारों और मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि वातावरण एकदम शुष्क रहने के कारण प्रदूषक कण वायुमंडल के निचले हिस्से में ही टिके रह जाते हैं, जिसकी वजह से खासकर सुबह की शुरुआत और ढलती शाम के समय लोगों को सांस लेने में भारीपन महसूस होता है। हालांकि, जल्द सक्रिय होने वाले पश्चिमी विक्षोभ से वायुमंडल में हलचल बढ़ने और हवा साफ होने की आस बंधी है।
राजधानी के अलग-अलग इलाकों में दिखा भारी अंतर
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्थानीय केंद्रों के मापन में यह बात सामने आई है कि एक ही शहर के भीतर अलग-अलग क्षेत्रों की स्थिति काफी भिन्न है। राजधानी जयपुर की बात करें तो समूचे शहर का मिलाजुला सूचकांक 124 दर्ज हुआ, किंतु औद्योगिक क्लस्टर और रिहायशी कॉलोनियों के आंकड़ों में जमीन-आसमान का फर्क दिखा। शहर के रीको सीतापुरा स्थित कारखानों वाले क्षेत्र में प्रदूषण का ग्राफ सबसे ऊपर रहा, जहां यह आंकड़ा लगभग 170 तक जा पहुंचा। इसके ठीक उलट, हरियाली और सुनियोजित बसावट वाले आदर्श नगर क्षेत्र में हवा की शुद्धता काफी संतोषजनक रही और वहां का स्तर केवल 76 के आंकड़े पर दर्ज किया गया।
औद्योगिक नगरों और भारी वाहनों का असर
राजधानी के अलावा राज्य के अन्य विनिर्माण केंद्रों और व्यस्त व्यापारिक मार्गों पर भी प्रदूषण का भारी दबाव देखा जा रहा है। भिवाड़ी के कारखानों, सीकर के व्यस्ततम इलाकों और भरतपुर के मुख्य मार्गों पर धुएं और धूल की घनी परत महसूस की जा रही है। इन क्षेत्रों में चौबीसों घंटे चलने वाली विनिर्माण इकाइयों, भारी ट्रकों की आवाजाही और सड़कों से उड़ने वाले गर्द-गुबार ने हवा में पार्टिकुलेट मैटर 10 और 2.5 के महीन कणों की मौजूदगी को काफी बढ़ा दिया है, जिससे संवेदनशील लोगों को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

















