अरावली पर्वतमाला की सुरम्य वादियों में स्थित राजस्थान के प्रसिद्ध हिल स्टेशन माउंट आबू में प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक नया कदम उठाया गया है। इलाके की समृद्ध जैव विविधता को मंच देने के लिए यहाँ पहली बार एक बड़े पक्षी उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। हरे-भरे जंगलों, ऊँची चोटियों और प्राकृतिक जलस्रोतों से समृद्ध यह पूरा इलाका सैकड़ों किस्म के परिंदों का बसेरा है। इस विशेष आयोजन का मुख्य मकसद आम नागरिकों, पर्यटकों और नई पीढ़ी को पक्षियों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास की महत्ता से रूबरू कराना है, जिससे क्षेत्र में पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन को नई गति मिल सके।
माउंट आबू वाइल्डलाइफ सेंचुरी में दुर्लभ परिंदों का बसेरा
माउंट आबू वाइल्डलाइफ सेंचुरी पक्षियों की 250 से अधिक दुर्लभ और मनमोहक प्रजातियों का प्राकृतिक घर मानी जाती है। घने जंगलों और स्वच्छ जल स्रोतों के बीच यह क्षेत्र पक्षी विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं के लिए हमेशा से अध्ययन का एक बड़ा केंद्र रहा है। वन्यजीव प्रेमी चिंटू यादव के अनुसार, इस पूरे अभयारण्य में पक्षियों की विविधता देखते ही बनती है और यहाँ आने वाले लोगों को कई अनोखे पक्षी खुले प्राकृतिक परिवेश में देखने को मिलते हैं।
यहाँ पाई जाने वाली मुख्य प्रजातियों में दूधराज (एशियन पैराडाइज फ्लाईकैचर), ग्रे जंगल फाउल, शाहीन फाल्कन, व्हाइट-कैप्ड बंटिंग, क्रेस्टेड बंटिंग और शिकारी पक्षी शिकारा शामिल हैं। इसके अलावा, अत्यंत दुर्लभ मानी जाने वाली ग्रीन मुनिया इस इलाके की सबसे खास पहचान है, जो यहाँ काफी संख्या में पाई जाती है। अभयारण्य में कई ऐसे चुनिंदा व्यू पॉइंट्स बनाए गए हैं, जहाँ से सैलानी इन खूबसूरत पक्षियों की चहचहाहट और गतिविधियों को बेहद करीब से निहार सकते हैं।
400 विद्यार्थियों की भागीदारी और बर्ड वॉक का अनुभव
इस महोत्सव का एक प्रमुख आकर्षण नई पीढ़ी को प्रकृति के करीब लाना है। इसी उद्देश्य के तहत राजस्थान के विभिन्न हिस्सों से लगभग 400 स्कूली छात्र-छात्राएं इस कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे हैं। इन विद्यार्थियों के लिए विशेष तौर पर बर्ड वॉक का आयोजन किया गया है, जिसके माध्यम से वे खुले जंगलों में घूमकर पक्षियों की पहचान करना और उनके व्यवहार को समझना सीख रहे हैं।
छात्रों और पर्यटकों के मार्गदर्शन के लिए देश और प्रदेश के कई जाने-माने पक्षी विज्ञानी और वन्यजीव विशेषज्ञ भी इस मंच पर मौजूद हैं। ये विशेषज्ञ कार्यशालाओं और जमीनी दौरों के जरिए पक्षियों के जीवन चक्र, उनके घोंसले बनाने के तौर-तरीकों और पर्यावरण संतुलन में उनकी भूमिका पर विस्तार से जानकारी साझा कर रहे हैं। स्कूली बच्चों के लिए यह किताबी ज्ञान से परे जाकर सीधे जंगल की प्रयोगशाला में सीखने का एक दुर्लभ अवसर साबित हो रहा है।
दिवंगत पक्षी विशेषज्ञ अनिल माथुर को समर्पित आयोजन
माउंट आबू में आयोजित हो रहा यह पहला पक्षी महोत्सव क्षेत्र के दिवंगत पक्षी विशेषज्ञ अनिल माथुर की स्मृति को समर्पित किया गया है। उन्होंने माउंट आबू और आसपास के क्षेत्रों में पक्षियों के दस्तावेजीकरण और उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा के लिए जीवनभर सराहनीय कार्य किया था। उनके इसी समर्पण और विरासत को सम्मान देने के लिए इस पूरे समारोह को उनके नाम से जोड़ा गया है।
उत्सव के समापन समारोह के दौरान वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों को अनिल माथुर संरक्षण पुरस्कार से नवाजा जाएगा। आयोजकों का मानना है कि यह सम्मान भविष्य में पर्यावरण और पक्षी संरक्षण के क्षेत्र में शोध करने वाले युवा वैज्ञानिकों और स्थानीय संरक्षकों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बनेगा, जिससे अरावली की इस अनमोल जैव विविधता को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सके।

















