राजस्थान के विभिन्न अंचलों में 12 अक्टूबर को मौसम के दो अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। राज्य के उत्तरी और उत्तर-पश्चिमी भूभागों में बादलों की आवाजाही बनी हुई है और छिटपुट बौछारों के आसार नजर आ रहे हैं, जबकि सूबे के अधिकांश मैदानी और पूर्वी हिस्सों में मौसम पूरी तरह शुष्क बना हुआ है। मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के आकलन के अनुसार, बीकानेर संभाग के कुछ इलाकों में वर्षा की गतिविधियां रुक-रुक कर जारी रह सकती हैं। हालांकि, जिला स्तर के पूर्वानुमान में किसी भीषण या व्यापक स्तर की बारिश को लेकर कोई गंभीर चेतावनी जारी नहीं की गई है। बीते चौबीस घंटों के दौरान भी पश्चिमी राजस्थान के कुछ चुनिंदा स्थानों पर हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश दर्ज की गई थी, जबकि पूर्वी संभागों में आसमान साफ और मौसम शुष्क बना रहा। इस मौसमी उठापटक के बीच फलोदी में अधिकतम तापमान 37.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो पूरे राज्य में सबसे अधिक रहा।
मौसम तंत्र की सक्रियता और वायुमंडलीय परिस्थितियां
मौसम विभाग के तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, वर्तमान में पाकिस्तान के मध्यवर्ती हिस्सों के ऊपर वायुमंडल के ऊपरी स्तरों में एक चक्रवाती परिसंचरण तंत्र निरंतर सक्रिय बना हुआ है। इसके समानांतर, उत्तर-पश्चिमी राजस्थान से लेकर उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश तक समुद्र तल से लगभग 0.9 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक ट्रफ रेखा भी गुजर रही है। वहीं अरब सागर से लगातार उठने वाली नम हवाएं इस मौसमी तंत्र को नमी प्रदान कर रही हैं, जिसके चलते राजस्थान के उत्तरी और उत्तर-पश्चिमी अंचलों में घने बादल उमड़ रहे हैं और बारिश की अनुकूल परिस्थितियां निर्मित हो रही हैं। इसके अतिरिक्त हिमाचल प्रदेश के ऊपर समुद्र तल से करीब 3.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक पश्चिमी विक्षोभ भी चक्रवाती परिसंचरण के रूप में बना हुआ है, जिसका आंशिक प्रभाव उत्तरी मैदानी इलाकों के मौसम पर देखा जा रहा है।
बीते चौबीस घंटों का वर्षा रिकॉर्ड और तापमान की स्थिति
पिछले चौबीस घंटों के मौसमी आंकड़ों पर नजर डालें तो बीकानेर संभाग के सीमित क्षेत्रों में हल्की से मध्यम तीव्रता की वर्षा दर्ज की गई है। सर्वाधिक वर्षा श्रीगंगानगर जिले के करणपुर क्षेत्र में रिकॉर्ड की गई, जहां बादलों ने 20 मिलीमीटर पानी बरसाया। इसके विपरीत, पूर्वी राजस्थान के जिलों में धूप खिली रही और मौसम में किसी तरह की बड़ी हलचल दर्ज नहीं की गई। बारिश के इन छिटपुट दौरों के बावजूद राज्य के पश्चिमी रेतीले इलाकों में दिन के समय गर्मी और उमस का असर कायम है। फलोदी में पारा 37.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि बादलों की मौजूदगी के बावजूद दिन के तापमान में उल्लेखनीय गिरावट नहीं आई है।
जयपुर और पूर्वी राजस्थान में मौसम का मिजाज
राजधानी जयपुर समेत पूर्वी राजस्थान के अधिकांश भूभागों में 12 अक्टूबर को मौसम मुख्य रूप से साफ और शुष्क बना रहने का अनुमान है। स्थानीय मौसमी परिस्थितियों के कारण दिन के समय कहीं-कहीं हल्के बादल छा सकते हैं या मौसम में क्षणिक बदलाव आ सकता है, लेकिन किसी भी बड़े क्षेत्र में व्यापक वर्षा के संकेत नहीं हैं। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, अजमेर, भरतपुर, कोटा और उदयपुर संभागों के अधिकांश इलाकों में भी आने वाले दिनों में मौसम पूरी तरह शुष्क और सामान्य बना रहेगा। इसी प्रकार जोधपुर संभाग समेत पश्चिमी राजस्थान के कई अन्य जिलों में भी फिलहाल किसी बड़े मौसमी विक्षोभ या तेज बारिश के आसार नहीं हैं। 15 अक्टूबर को राज्य के दोनों प्रमुख हिस्सों यानी पूर्वी और पश्चिमी क्षेत्रों में मौसम शुष्क रहने का अनुमान है, जबकि 16 अक्टूबर को पश्चिमी राजस्थान के छिटपुट इलाकों में कहीं-कहीं हल्की वर्षा की संभावना फिर बन सकती है।
13 और 14 अक्टूबर को शेखावाटी और बीकानेर में फिर बदलाव की संभावना
मौसम विभाग के अग्रिम पूर्वानुमान के अनुसार, 13 और 14 अक्टूबर को राजस्थान के उत्तरी हिस्सों में मौसमी गतिविधियों में एक बार फिर इजाफा हो सकता है। बीकानेर संभाग के साथ-साथ शेखावाटी अंचल के कई इलाकों में आसमान में घने बादल छाने, मेघगर्जन होने और हल्की बारिश दर्ज किए जाने की संभावना व्यक्त की गई है। विशेष रूप से बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, सीकर और झुंझुनूं जिलों में मौसम में हलचल तेज रह सकती है। इन क्षेत्रों में बादलों की गर्जना के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तेज झोंके वाली हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि बारिश और अंधड़ का यह दौर मुख्य रूप से उत्तरी और उत्तर-पश्चिमी राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों तक ही सीमित रहेगा, जबकि शेष राजस्थान में मौसम शुष्क ही बना रहेगा।
कृषि उपज और कटी फसलों की सुरक्षा को लेकर सलाह
अचानक बदलने वाले मौसम, संभावित बारिश और तेज हवाओं की गति को ध्यान में रखते हुए मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर ने काश्तकारों और व्यापारियों के लिए विशेष सावधानी बरतने का परामर्श जारी किया है। वर्तमान में खरीफ फसलों की कटाई और मंडियों में आवक का दौर चल रहा है। ऐसे में खेतों में काटकर रखी गई फसलों, खलिहानों में पड़े अनाज और कृषि उपज मंडियों में खुले आसमान के नीचे रखे गए जिंसों को तिरपाल या सुरक्षित छतों के नीचे ढककर रखने की सलाह दी गई है, ताकि नमी और पानी से उपज खराब न हो।



















