शादी के पहले कुछ महीने किसी रोमांटिक फिल्म जैसे लगते हैं, पर वक्त के साथ जिम्मेदारियों का बोझ बढ़ता है और धीरे-धीरे घर में वही चीज़ दस्तक देने लगती है जिससे लगभग हर दूसरा जोड़ा जूझ रहा है, यानी रोज़मर्रा की तकरार। आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में ईगो का टकराव, बात का सही ढंग से न पहुंचना और मानसिक तनाव बेहद सामान्य हो चुके हैं। ऐसे में अक्सर एक डराने वाला सवाल मन में उठता है कि कहीं रिश्ता टूट तो नहीं रहा। सच यह है कि रिश्ता खत्म नहीं हो रहा होता, उसे बस थोड़ी देखभाल और मरम्मत की ज़रूरत होती है। नीचे दिए गए चार आसान तरीके अपनाकर आप घर के रोज़ के क्लेश को हमेशा के लिए विदा कर सकते हैं।
1. गुस्से में तुरंत जवाब नहीं, 20 मिनट का ब्रेक लें
जब बहस गरमाने लगे या पत्नी किसी बात पर नाराज़ हों, तो पलटकर फौरन जवाब देने के बजाय सिर्फ 20 मिनट का एक छोटा सा ठहराव लें। मनोविज्ञान बताता है कि जब हम गुस्से में होते हैं तो दिमाग का तार्किक हिस्सा काम करना बंद कर देता है और हम सिर्फ अपनी भड़ास निकालने लगते हैं। बीच बहस में इतना कह दें कि अभी दोनों गुस्से में हैं, इस पर 20 मिनट बाद आराम से बात करते हैं। इस दौरान थोड़ा पानी पी लें या कुछ देर के लिए कमरे से बाहर निकल जाएं। जब मन शांत होगा तो छोटी सी बात का बतंगड़ नहीं बनेगा।
2. आरोप छोड़िए, अपनी भावना 'मैं' से कहिए
झगड़े तब और भड़कते हैं जब बात सीधे आरोप में बदल जाती है, जैसे तुम हमेशा ऐसा ही करती हो या तुम्हारी वजह से यह हुआ। इसके बजाय अपनी बात रखने के लिए 'मैं' से शुरू होने वाले वाक्य चुनें। मसलन तुम कभी मेरी बात नहीं सुनतीं कहने की जगह कहिए कि जब मुझे अपनी बात रखने का मौका नहीं मिलता तो मुझे बुरा लगता है। जैसे ही आप दोष देना बंद करते हैं, सामने वाला रक्षात्मक होने के बजाय आपकी भावना को समझने की कोशिश करने लगता है।
3. एक्टिव लिसनिंग यानी जवाब देने नहीं, समझने के लिए सुनें
अक्सर पति-पत्नी की बातचीत एक-दूसरे को समझने के लिए नहीं, बल्कि यह साबित करने के लिए होती है कि मैं सही हूं और तुम गलत। जब पत्नी अपनी कोई शिकायत रख रही हों, तो उनकी बात बीच में काटे बिना पूरी सुनें और उन्हें यह महसूस होने दें कि आप सचमुच ध्यान दे रहे हैं। कई बार पत्नी बस इतना चाहती है कि उसका पति उसकी बात और भावनाओं की कद्र करे, न कि हर बात पर तुरंत कोई समाधान थमाने लगे।
4. छोटे-छोटे पल, जो रिश्ते को ताज़ा रखते हैं
ज़रा याद कीजिए, आखिरी बार आप दोनों बिना फोन छुए और बिना बच्चों या घर खर्च की बात किए कब साथ बैठे थे। शायद याद भी न आए। रोज़ के क्लेश की एक बड़ी वजह यही है कि रिश्ते से वह पुरानी नज़दीकी और चिंगारी गायब हो जाती है। हफ्ते में कम से कम एक बार बिना किसी मकसद के साथ टहलने जाएं, कोई फिल्म देखें या पुरानी यादें ताज़ा करें। सुबह ऑफिस निकलते वक्त एक छोटी सी झप्पी या दिन में एक प्यारा सा मैसेज, ये नन्हे कदम रिश्ते में कड़वाहट को घुसने ही नहीं देते।
आखिर में याद रखने वाली बात
यह समझ लीजिए कि कोई भी शादी एकदम परफेक्ट नहीं होती। दो अलग-अलग माहौल में पले-बढ़े लोगों के विचार अलग होना पूरी तरह स्वाभाविक है। असली समस्या झगड़ा होना नहीं, बल्कि उसे सुलझाने का तरीका है। एक समझदार साथी की तरह ईगो को किनारे रखकर इन उपायों को आज ही आज़माना शुरू कीजिए। पहल आपको करनी होगी, क्योंकि यह घर भी आपका है और यह खूबसूरत रिश्ता भी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पति-पत्नी के बीच रोज़ झगड़े क्यों होते हैं? सबसे बड़ी वजह गलतफहमी और एक-दूसरे को ध्यान से न सुनना है। इसके अलावा आज की भागदौड़ में ऑफिस का तनाव, ईगो का टकराव और एक-दूसरे को क्वालिटी टाइम न दे पाना भी आपसी कड़वाहट बढ़ाते हैं।
पत्नी बहुत गुस्से में हो तो उस वक्त क्या करें? उस समय बहस जीतने की कोशिश बिल्कुल न करें। मनोविज्ञान के मुताबिक सबसे अच्छा तरीका है रिएक्ट न करना और शांत बने रहना। उनकी पूरी बात बिना टोके सुनें और गुस्सा शांत होने पर अपनी बात प्यार और शालीनता से रखें।
क्या शादीशुदा ज़िंदगी में झगड़े होना नॉर्मल है? हां, अलग-अलग सोच और माहौल में पले लोगों के बीच मतभेद होना बिल्कुल सामान्य है। दिक्कत झगड़ा होना नहीं, बल्कि उसे खींचना और पुरानी बातें बीच में लाना है। बातचीत से तुरंत सुलझा लें तो रिश्ता और मज़बूत होता है।
साथी अपनी गलती मानने को तैयार न हो तो क्या करें? ऐसे में सीधे आरोप लगाने से बचें और तुमने ऐसा किया कहने के बजाय 'मैं' वाले वाक्य अपनाएं, जैसे मुझे इस बात से दुख हुआ। रिश्ते की शांति के लिए कई बार यह मायने नहीं रखता कि कौन सही है, इसलिए ईगो को किनारे रख बात वहीं खत्म कर देना ही समझदारी है।
रिश्ते में पुराना प्यार और तालमेल कैसे लौटाएं? रोज़मर्रा में छोटे बदलाव कीजिए। हफ्ते में कम से कम एक बार बिना फोन और घरेलू चिंताओं के क्वालिटी टाइम बिताएं, जैसे साथ वॉक या डिनर। एक-दूसरे की छोटी-छोटी तारीफ करें और दिन की शुरुआत या ऑफिस से लौटने पर एक मुस्कान और जादू की झप्पी से करें।













