कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शनिवार को मैसूर में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान एक खास राजनीतिक शिष्टाचार की मिसाल पेश की। मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने अपना भाषण खुद ही छोटा कर दिया। उन्होंने कहा कि देश के लिए प्रधानमंत्री का संबोधन अधिक मायने रखता है। डीके शिवकुमार ने वहां मौजूद लोगों से अपील की कि वे प्रधानमंत्री मोदी के वक्तव्य को ध्यान से सुनें। इसके साथ ही उन्होंने अपने संक्षिप्त संबोधन का उपयोग केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर तालमेल और विकास के मुद्दों को रेखांकित करने के लिए किया।
विकास और संघवाद पर जोर
यह अवसर मैसूर स्थित रामकृष्ण आश्रम में स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक युवा केंद्र 'विवेक स्मारक' के आधिकारिक उद्घाटन का था। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी के साथ मंच साझा करते हुए मुख्यमंत्री शिवकुमार ने अपने वक्तव्य की शुरुआत कर्नाटक के समग्र विकास और केंद्र सरकार के सहयोग की आवश्यकता से की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश के सभी क्षेत्रों को प्रगति के पथ पर आगे ले जाने के लिए सहकारी संघवाद की भावना को व्यावहारिक रूप से मजबूत करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि कर्नाटक की विकास परियोजनाओं और बुनियादी ढांचे को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार को उदारता दिखानी चाहिए।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि आज पूरी दुनिया भारत की प्रगति और तकनीकी क्षमता को कर्नाटक के नजरिए से देखती है। उन्होंने तर्क दिया कि कर्नाटक को सशक्त बनाने से पूरे देश की वैश्विक साख और मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय निवेशक और विभिन्न देशों के प्रतिनिधि भारत के विकास को बेंगलुरु की सफलताओं से जोड़कर देखते हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से राज्य की प्राथमिकताओं को केंद्र का पूरा समर्थन मिलने की उम्मीद जताई और कहा कि राज्य की उन्नति राष्ट्रीय प्रगति से सीधी जुड़ी हुई है।
वैश्विक मंच पर बेंगलुरु की पहचान
राज्य की राजधानी के रणनीतिक महत्व को विस्तार से समझाते हुए मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा कि बेंगलुरु अब केवल एक क्षेत्रीय शहर नहीं रह गया है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रवेश द्वार और वैश्विक पहचान बन चुका है। अपनी बात को और मजबूती देने के लिए उन्होंने देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के एक ऐतिहासिक कथन का उल्लेख किया। उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी ने एक बार कहा था कि अतीत में भारत आने वाले विदेशी राष्ट्राध्यक्ष केवल दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों का दौरा करते थे, लेकिन आधुनिक दौर में दुनिया के नेता अपने भारतीय दौरे में बेंगलुरु आने को भी विशेष प्राथमिकता देते हैं।
शिवकुमार ने इस उपलब्धि का श्रेय कर्नाटक के नागरिकों की कड़ी मेहनत, नवाचार और उनकी प्रतिभा को दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह के विकास की गति को बनाए रखने के लिए केंद्र और राज्य प्रशासन के बीच आपसी समन्वय बहुत जरूरी है। अपने भाषण के दौरान उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उदाहरण देते हुए कहा कि इंसान को पराजय के दौर में बड़ा दिल रखना चाहिए और सफलता या जीत के समय और अधिक उदारता दिखानी चाहिए। उन्होंने इस विचार को सुशासन और जनसेवा के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा निर्देश बताया।
मैसूर राजघराने और आईआईएससी का ऐतिहासिक योगदान
संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री शिवकुमार ने मैसूर की ऐतिहासिक विरासत और देश के वैज्ञानिक विकास से जुड़े एक महत्वपूर्ण अध्याय का भी स्मरण किया। उन्होंने बेंगलुरु स्थित प्रसिद्ध भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) की स्थापना की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि स्वामी विवेकानंद के विज्ञान और आधुनिक शिक्षा संबंधी विचारों से प्रेरित होकर महान उद्योगपति जमशेदजी टाटा ने देश में एक विश्वस्तरीय अनुसंधान संस्थान बनाने की योजना बनाई थी और इसके लिए मैसूर के तत्कालीन महाराजा से भूमि उपलब्ध कराने का निवेदन किया था।
जमशेदजी टाटा के इस दूरदर्शी प्रस्ताव पर सकारात्मक कदम उठाते हुए मैसूर राजघराने ने बेंगलुरु में 300 एकड़ से अधिक भूमि दान में दी थी। इसी ऐतिहासिक सहयोग की बदौलत भारतीय विज्ञान संस्थान की नींव रखी गई, जो आज देश के सबसे प्रमुख और प्रतिष्ठित वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्रों में गिना जाता है। शिवकुमार ने कहा कि दूरदर्शी नेतृत्व, औद्योगिक सोच और राजघराने के इस ऐतिहासिक योगदान की मिसाल आज भी हमें याद दिलाती है कि मिलकर काम करने से किस तरह स्थायी राष्ट्रीय संपदा का निर्माण किया जा सकता है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा
अपने भाषण के अंतिम हिस्से में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने एक बार फिर दोहराया कि वे मंच पर ज्यादा समय नहीं लेंगे। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री का संदेश देश के लिए कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है।" उन्होंने सभी पक्षों से मिलकर काम करने, कर्नाटक के निर्माण और भारत को एक सशक्त राष्ट्र बनाने का आह्वान किया। मुख्य विपक्षी दल से जुड़े होने के बावजूद मुख्यमंत्री द्वारा प्रधानमंत्री की उपस्थिति में ऐसा शालीन व्यवहार दिखाने और दलगत राजनीति से ऊपर उठकर विकास की बात करने का यह कदम राजनीतिक विश्लेषकों के बीच काफी चर्चा का विषय बना हुआ है।


















