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वयस्क जीवन में क्यों छूट जाता है सहेलियों का साथ, जानिए सिस्टरहुड में दूरी आने के कारण और रिश्ते को दोबारा जोड़ने के आसान उपायरिश्ते
30 जुल॰ 2026, 12:49 pm (9 घंटे पहले)· 0

वयस्क जीवन में क्यों छूट जाता है सहेलियों का साथ, जानिए सिस्टरहुड में दूरी आने के कारण और रिश्ते को दोबारा जोड़ने के आसान उपाय

उम्र बढ़ने, करियर की भागदौड़ और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण अक्सर पक्की महिला मित्र एक-दूसरे से दूर हो जाती हैं। समाजशास्त्र और मनोवैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर जानिए कैसे 'कैजुअल ड्रिफ्ट' इस रिश्ते को प्रभावित करता है और इसे फिर से कैसे सहेजा जा सकता है।

बचपन और कॉलेज के दिनों में एक ही साइकिल से सफर तय करना, हर छोटी से छोटी बात को घंटों साझा करना और बिना किसी झिझक के एक-दूसरे के सुख-दुख का हिस्सा बनना महिलाओं के जीवन का बेहद खूबसूरत अनुभव होता है। रिया और स्नेहा की कहानी भी कुछ ऐसी ही थी। दोनों बचपन से ही अभिन्न सहेलियां थीं और एक दिन भी बात किए बिना नहीं रह पाती थीं। हालांकि, जैसे ही कॉलेज की पढ़ाई पूरी हुई, रिया का विवाह हो गया और स्नेहा अपने करियर को नई दिशा देने के लिए एक दूसरे शहर में बस गई। शुरुआती दिनों में दोनों के बीच प्रतिदिन होने वाले लंबे फोन कॉल धीरे-धीरे सप्ताह में एक बार होने लगे और फिर सिमटकर केवल जन्मदिन या त्योहारों पर औपचारिक शुभकामनाओं तक सीमित रह गए। आज स्थिति यह है कि दोनों एक-दूसरे की सोशल मीडिया तस्वीरों को देखकर केवल पसंद का बटन दबा देती हैं, लेकिन उनके बीच एक गहरी अनकही खामोशी और दूरी पैदा हो चुकी है। यह कहानी केवल रिया और स्नेहा की नहीं है, बल्कि समाज की अनगिनत महिलाओं की सच्चाई को बयां करती है।

महिला मित्रता में 'सिस्टरहुड' का महत्व और बदलता स्वरूप

समाजशास्त्र के दृष्टिकोण से महिलाओं के बीच बनने वाले इस आत्मीय, गहरे और अटूट रिश्ते को 'सिस्टरहुड' (Sisterhood) के नाम से जाना जाता है। जीवन के शुरुआती दौर में यह रिश्ता भावनात्मक संबल और खुशी का सबसे बड़ा स्रोत होता है। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है और जीवन के नए पड़ाव शुरू होते हैं, व्यस्त दिनचर्या, बदलती प्राथमिकताएं तथा जाने-अनजाने में पनपने वाली गलतफहमियां इस रिश्ते के स्वरूप को पूरी तरह बदल देती हैं। गहरी से गहरी दोस्ती भी समय की मार और दूरी के सामने कमजोर पड़ने लगती है। यही वजह है कि कई बार महिलाएं यह समझ ही नहीं पातीं कि जो सहेली कभी उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा थी, वह अचानक इतनी अजनबी कैसे हो गई।

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मनोवैज्ञानिक और वैज्ञानिक अध्ययनों के चौंकाने वाले निष्कर्ष

सहेलियों के बीच आने वाली इस दूरी को लेकर मनोवैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने कई महत्वपूर्ण अध्ययन किए हैं। मनोवैज्ञानिक और संबंध विशेषज्ञ डॉ. बेकी स्पेलमैन के अनुसार, वयस्क जीवन में दोस्ती का कमजोर होना या टूटना आमतौर पर किसी बड़े विवाद या कड़वाहट की वजह से नहीं होता। इसके विपरीत, यह जीवन की परिस्थितियों और प्राथमिकताओं में धीरे-धीरे आने वाले बदलावों का परिणाम होता है। समाजशास्त्र की भाषा में इस प्रक्रिया को 'कैजुअल ड्रिफ्ट' (Casual Drift) कहा जाता है, जहां दो इंसान बिना किसी झगड़े के केवल समय और हालात की वजह से एक-दूसरे से दूर होते चले जाते हैं।

इसके अलावा, कंसास विश्वविद्यालय (University of Kansas) द्वारा किए गए एक शोध में यह बात सामने आई है कि दो व्यक्तियों के बीच एक गहरी और भरोसेमंद दोस्ती का निर्माण होने के लिए कम से कम 200 घंटों का साझा समय बिताना आवश्यक होता है। जब वयस्क जीवन की व्यस्तताओं और जिम्मेदारियों के चलते महिलाओं को यह समय मिलना बंद हो जाता है, तो स्वाभाविक रूप से उनके बीच का रिश्ता धीरे-धीरे अपनी गर्माहट खोने लगता है।

वही, UCLA के एक अन्य अध्ययन में महिला स्वास्थ्य और दोस्ती के बीच के गहरे जैविक संबंध को उजागर किया गया है। अध्ययन के निष्कर्षों के अनुसार, महिलाओं के लिए सहेलियों का साथ केवल एक भावनात्मक आवश्यकता नहीं है, बल्कि यह उनकी शारीरिक और जैविक जरूरत भी है। जब महिलाएं अपनी करीबी सहेलियों से खुलकर बातचीत करती हैं, तो उनके शरीर में तनाव को कम करने वाला 'ऑक्सीटोसिन' (Oxytocin) नामक हार्मोन उत्सर्जित होता है। हालांकि, जब सहेलियों के बीच दूरियां बढ़ जाती हैं, तो यह कुदरती भावनात्मक और जैविक ढाल कमजोर होने लगती है, जिससे तनाव का स्तर बढ़ने लगता है।

सहेलियों के बीच दूरी आने के प्रमुख कारण

सहेलियों के बीच रिश्ते का मिज़ाज बदलने और दूरियां बढ़ने के पीछे कई व्यावहारिक कारण काम करते हैं, जिन्हें समझना बेहद जरूरी है

  • जिम्मेदारियों का बढ़ता बोझ: उम्र के साथ-साथ जीवन में प्राथमिकताओं का बदलना स्वाभाविक है। करियर बनाने की भागदौड़, विवाह के बाद नए परिवार में ढलने की चुनौतियां, ससुराल की जिम्मेदारियां और बच्चों का पालन-पोषण करना महिलाओं के समय का बड़ा हिस्सा ले लेता है। इस व्यस्तता के कारण महिलाओं के पास स्वयं के लिए भी पर्याप्त समय नहीं बच पाता, जिसके चलते वे चाहकर भी अपनी सहेली को समय देने में असमर्थ हो जाती हैं।
  • जीवनशैली और सोच में बदलाव: कॉलेज के दिनों में जिन दो सहेलियों के विचार, पसंद और जीवनशैली एक जैसी होती है, समय बीतने के साथ उनमें बड़ा अंतर आ सकता है। जब दोनों के जीवन के रास्ते अलग हो जाते हैं, तो उनके बीच बातचीत के लिए साझा विषय समाप्त होने लगते हैं। साझा रुचियां न रहने से संवाद सीमित हो जाता है और धीरे-धीरे बातचीत बंद हो जाती है।
  • मिसकम्युनिकेशन और डिजिटल संवाद की सीमाएं: वर्तमान दौर में आमने-सामने बैठकर बात करने या फोन पर कॉल करने के बजाय लोग टेक्स्ट मैसेज पर निर्भर हो चुके हैं। लिखित संदेशों में अक्सर सही हाव-भाव और टोन का पता नहीं चलता, जिससे बेवजह गलतफहमियां जन्म ले लेती हैं। समय पर मैसेज का जवाब न मिलना या बातचीत को टालना धीरे-धीरे मनमुटाव और खामोशी में बदल जाता है।
  • तुलना और जीवन की असमान गति: जब दो सहेलियों के जीवन की प्रगति में अंतर आने लगता है, जैसे एक सहेली अपने करियर में सफलता के नए आयाम छू रही हो और दूसरी संघर्ष कर रही हो, तो अनजाने में ही तुलनात्मक भावनाएं पैदा हो सकती हैं। यदि इस असहजता पर खुलकर बात न की जाए, तो यह भीतर ही भीतर रिश्ते की नींव को कमजोर कर देती है।

खोई हुई दोस्ती को दोबारा जीवित करने के असरदार उपाय

यदि आपकी भी कोई बचपन की या पुरानी पक्की सहेली समय के साथ दूर हो गई है, तो इस रिश्ते में फिर से पुरानी मिठास घोलने के लिए कुछ सरल और व्यावहारिक कदम उठाए जा सकते हैं

  • झिझक मिटाकर पहला कदम उठाएं: किसी भी तरह के अहंकार या ईगो को किनारे रखकर खुद संपर्क स्थापित करें। एक साधारण सा संदेश भेजना जैसे, "आज तुम्हारी बहुत याद आ रही थी, तुम कैसी हो?" वर्षों पुरानी खामोशी को चुटकी में मिटा सकता है।
  • ईमानदारी और स्पष्टता से बात करें: अगर आप अपनी व्यस्तताओं के कारण लंबे समय तक संपर्क में नहीं रह सकीं, तो बहाने बनाने के बजाय अपनी वास्तविक स्थिति को साझा करें। दिल से माफी मांगना और अपनी मजबूरी को स्पष्ट करना रिश्ते में विश्वास को पुनः स्थापित करता है।
  • उनकी नई परिस्थितियों का सम्मान करें: यह स्वीकार करना आवश्यक है कि समय के साथ आपकी सहेली और उसकी प्राथमिकताएं बदल चुकी हैं। पुरानी उम्मीदें रखने के बजाय उसकी वर्तमान जीवनशैली और प्राथमिकताओं को अपनाएं।
  • पुरानी यादों का सहारा लें: स्कूल या कॉलेज की पुरानी तस्वीरें साझा करना या साथ बिताए खुशनुमा पलों को याद करना किसी भी कमजोर पड़ते रिश्ते में नई ऊर्जा और गर्माहट भर देता है।

सच्ची सहेली का मिलना जीवन का एक बहुत बड़ा वरदान होता है। समय के साथ दूरियों का आना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन यदि रिश्ते को बचाए रखने का इरादा पक्का हो, तो सिस्टरहुड का यह अटूट बंधन कभी खत्म नहीं हो सकता।

सवाल-जवाब

वयस्क जीवन में पक्की सहेलियों के बीच दूरी आने का मुख्य कारण क्या है?
व्यस्त दिनचर्या, शादी, करियर, परिवार की जिम्मेदारियां और प्राथमिकताओं में बदलाव के कारण सहेलियों के बीच दूरी आने लगती है, जिसे समाजशास्त्र में कैजुअल ड्रिफ्ट कहा जाता है।
कंसास विश्वविद्यालय के शोध के अनुसार गहरी दोस्ती बनने में कितना समय लगता है?
कंसास विश्वविद्यालय के शोध के अनुसार दो लोगों के बीच गहरी और पक्की दोस्ती बनने में कम से कम 200 घंटों का साझा समय लगता है।
UCLA के अध्ययन के अनुसार सहेलियों से बात करने पर शरीर में कौन सा हार्मोन बनता है?
UCLA के अध्ययन के अनुसार सहेलियों से बात करने पर शरीर में तनाव कम करने वाला ऑक्सीटोसिन हार्मोन बनता है।
पुरानी सहेली से दोबारा जुड़ने के लिए पहला कदम क्या उठाना चाहिए?
ईगो को किनारे रखकर एक साधारण सा मैसेज भेजकर हाल-चाल पूछना और पुरानी यादों को साझा करना दोस्ती को फिर से जोड़ने का सबसे प्रभावी तरीका है।
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