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12 अगस्त की अमावस्या पर करें ये विशेष धार्मिक उपाय, पितृ दोष से मुक्ति और मां लक्ष्मी की कृपा पाने का जानें विधानधर्म
10 अग॰ 2026, 5:26 pm (51 दिन पहले)· 1

12 अगस्त की अमावस्या पर करें ये विशेष धार्मिक उपाय, पितृ दोष से मुक्ति और मां लक्ष्मी की कृपा पाने का जानें विधान

12 अगस्त को आने वाली अमावस्या पर स्नान, सूर्य अर्घ्य, पशु सेवा और शाम को मां लक्ष्मी की विशेष पूजा से पितरों की शांति तथा सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।

सनातन धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष आध्यात्मिक महत्व स्वीकार किया गया है। इस बार 12 अगस्त को पड़ने वाली अमावस्या पर पितरों की शांति और सुख समृद्धि के लिए विशेष धार्मिक कार्य किए जाएंगे। अयोध्या के ज्योतिष विद्वान पंडित कल्कि राम के अनुसार, इस दिन स्नान, दान, जप और पशुओं की सेवा करने से पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और घर में खुशहाली आती है।

सूर्यदेव को अर्घ्य और प्रातःकाल के नियम

अमावस्या के दिन सुबह के समय स्नान ध्यान करने की विशेष परंपरा है। यदि संभव हो तो किसी पवित्र नदी या जल स्रोत के पास जाकर स्नान करना चाहिए। इसके पश्चात भगवान सूर्य को जल अर्पित करते हुए गायत्री मंत्र का जाप करना बेहद शुभ माना गया है। यह धार्मिक क्रिया न केवल शारीरिक और मानसिक ऊर्जा प्रदान करती है, बल्कि दिन की शुरुआत को सकारात्मक बनाती है।

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प्रातःकाल के पूजा-विधान के साथ-साथ पशु-पक्षियों के प्रति करुणा प्रकट करना भी अमावस्या का महत्वपूर्ण अंग है। भोजन करने से पहले सबसे पहला निवाला कुत्ते के लिए निकालना चाहिए और उसे रोटी खिलानी चाहिए। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अमावस्या के अवसर पर घर के मुख्य द्वार पर आने वाले कुत्ते, गाय, बछड़े या सांड को कभी दुत्कार कर नहीं भगाना चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि पितर विभिन्न रूपों में धरती पर आकर अपना अंश ग्रहण कर सकते हैं, इसलिए उनके प्रति सम्मान और दया का भाव रखना आवश्यक है।

शाम के समय भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की आराधना

संध्या काल में भगवान श्रीहरि विष्णु और धन की देवी मां लक्ष्मी की उपासना करने का विधान बताया गया है। शाम के समय 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र की एक माला का जाप करते हुए भगवान विष्णु का स्मरण करना चाहिए। इस जाप के उपरांत गाय को श्रद्धापूर्वक रोटी खिलानी चाहिए।

इसके अतिरिक्त, घर में धन-धान्य और सुख-समृद्धि के लिए शाम 7 बजे से पहले मां लक्ष्मी का विशेष पूजन किया जाना चाहिए। इसके लिए कमल के आसन पर विराजमान मां लक्ष्मी का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें और उनके समक्ष शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें। फिर चावल की ढेरी बनाकर उस पर हल्दी की गांठ रखें और मां लक्ष्मी के बीज मंत्रों का श्रद्धा के साथ जाप करें।

पितृ शांति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति

मान्यता है कि हमारे पूर्वजों के त्याग, तपस्या और कठिन परिश्रम के कारण ही हमारा वर्तमान जीवन सुचारू रूप से चलता है। इसलिए अमावस्या पर स्नान, दान, तर्पण और जप के जरिए पितरों को याद करना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य माना गया है। विधि-विधान और पूरी श्रद्धा के साथ इन उपायों को करने से पितृ दोष शांत होते हैं, घर में फैली नकारात्मकता दूर होती है और मां लक्ष्मी की कृपा से जीवन में समृद्धि का वास होता है।

सवाल-जवाब

12 अगस्त को अमावस्या पर सुबह कौन से कार्य करने चाहिए?
सुबह पवित्र नदी या जल स्रोत में स्नान करके सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए और गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए।
अमावस्या पर कुत्तों और गायों को भोजन कराने का क्या धार्मिक महत्व है?
ऐसी मान्यता है कि पितर विभिन्न रूपों में अपना अंश स्वीकार करने आते हैं, इसलिए पहला निवाला कुत्ते को और शाम को गाय को रोटी देना शुभ होता है।
शाम 7 बजे से पहले मां लक्ष्मी की पूजा कैसे करनी चाहिए?
कमल पर बैठी मां लक्ष्मी का चित्र स्थापित कर घी का दीपक जलाएं, फिर चावल की ढेरी पर हल्दी की गांठ रखकर मंत्रों का जाप करें।
अमावस्या के दिन द्वार पर आए पशुओं के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए?
घर के दरवाजे पर आए कुत्ते, गाय, बछड़े या सांड को दुत्कारना नहीं चाहिए बल्कि उनके प्रति करुणा और सम्मान दिखाना चाहिए।
भगवान विष्णु के किस मंत्र का जाप करने की सलाह दी गई है?
शाम के समय भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र की एक माला का जाप करना चाहिए।
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