अयोध्या में राम मंदिर के दान चोरी मामले की गुत्थी अब तक नहीं सुलझी है और अब इस जांच में एक नया मोड़ आ गया है। मंदिर से किसने और कितने रुपये का गबन किया, इसका पूरा हिसाब अभी तक सामने नहीं आया है, और मामले का असली मास्टरमाइंड कौन है यह भी अब तक साफ नहीं है। इसी बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास महाराज ने पहली बार ट्रस्ट से जुड़ा एक चौंकाने वाला बयान दिया है, जिसमें उन्होंने पूरी गड़बड़ी की जिम्मेदारी गोपाल राव पर डाल दी है।
SIT की आठ घंटे की पूछताछ
राम मंदिर के चढ़ावे में हुई कथित हेराफेरी की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम यानी SIT ने अयोध्या में करीब 8 घंटे तक गहन जांच पड़ताल की। इस दौरान ट्रस्ट के तीन बड़े पदाधिकारियों गोपाल राव, चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा से अलग-अलग पूछताछ की गई। मामले में चंपत राय भी शक के दायरे में हैं और SIT उनसे जुड़े हर पहलू को बारीकी से खंगाल रही है। कई चंदा चोरों को पहले ही पकड़ा जा चुका है और उनसे लगातार गहन पूछताछ चल रही है, ताकि गबन के पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
महंत दिनेंद्र दास का दावा, गोपाल राव पर आरोप
एक हिडन कैमरा बातचीत में ट्रस्ट से जुड़े वरिष्ठ पुजारी और ट्रस्ट सदस्य महंत दिनेंद्र दास महाराज ने कहा कि गोपाल राव राम मंदिर की परंपराओं में भरोसा नहीं रखते। उनका कहना है कि इस पूरे विवाद की जड़ में गोपाल राव ही हैं और वही बाकी सभी को गुमराह कर रहे हैं। यह पहला मौका है जब ट्रस्ट के किसी सदस्य ने खुलकर किसी साथी पदाधिकारी पर इतना सीधा आरोप लगाया है।
'चंपत राय में कोई खराबी नहीं', ट्रस्टी का समर्थन
गुरुवार को हुई बातचीत में महंत दिनेंद्र दास महाराज ने चंदे में हुई कथित हेराफेरी के इस विवाद के बीच पूर्व ट्रस्ट महासचिव चंपत राय के समर्थन में खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि चंपत राय ने आज तक किसी के बारे में बुरा नहीं कहा और हमेशा भगवान राम की सेवा में पूरी पारदर्शिता के साथ काम किया है।
उन्होंने कहा, “मैं चंपत राय को 15 साल से ज़्यादा समय से जानता हूं और मैंने कभी भी उनकी तरफ से कोई गलत काम होते नहीं देखा। मैं पिछले 15 सालों से उनके संपर्क में हूं। चंपत राय तन-मन-धन से रामलला की सेवा कर रहे हैं। वे कभी किसी के बारे में बुरा नहीं बोलते। अगर एक रुपया भी आता है, तो वे उसे रामलला को ही सौंप देते हैं। कोई भी बात होने पर वे सबको बताते हैं। वे ट्रस्ट की बैठक में सब कुछ बताते हैं और वहां जो भी फैसला होता है, उसे मानते भी हैं। अगर मुझे कोई कमी दिखती, तो मैं खुद उसे बता देता। मुझे चंपत राय में कोई खराबी नहीं दिखती। अगर कोई गलती दिखती, तो मैं ज़रूर बोलता।”
मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला से मिले अहम सुराग
दिनेंद्र दास महाराज का यह बयान ऐसे समय पर सामने आया है जब राम मंदिर के दान में कथित हेराफेरी के मामले की जांच काफी तेज हो चुकी है। गुरुवार को एक बार फिर SIT की टीम अयोध्या पहुंची। जांच में अब तक के सबसे बड़े खुलासों में से एक मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला की पूछताछ से हुआ है। पूछताछ में सामने आया है कि कथित रैकेट ने चोरी को अंजाम देने से पहले मंदिर के पूरे लेआउट का बारीकी से अध्ययन किया था, जिसमें सीसीटीवी के ब्लाइंड स्पॉट, एंट्री और एग्जिट रूट तक शामिल थे। यानी यह चोरी अचानक नहीं बल्कि पूरी योजना बनाकर अंजाम दी गई थी।
अब गोपाल राव और अनिल मिश्रा से भी होगी पूछताछ
जांच का दायरा अब लगातार बढ़ता जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने के लिए फाइनेंशियल ट्रेल खंगाल रही है कि क्या आठ आरोपियों में से किसी ने कथित तौर पर हेराफेरी किए गए पैसे को अयोध्या के बाहर किसी प्रॉपर्टी में लगाया या फंड को कहीं और भेजा। जांचकर्ता इस मामले में शामिल सभी लोगों के बीच फाइनेंशियल और पर्सनल, दोनों तरह के लिंक तलाशने में जुटे हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक आने वाले दिनों में SIT गोपाल राव और डॉ. अनिल मिश्रा से भी पूछताछ कर सकती है, जिससे मामले में और नए खुलासे होने की उम्मीद है।
फिलहाल राम मंदिर दान चोरी मामले में मास्टरमाइंड कौन है, यह सवाल अब भी अनसुलझा है, लेकिन ट्रस्ट के भीतर से आए इस बयान ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि SIT की आगे की पूछताछ में गोपाल राव और डॉ. अनिल मिश्रा से क्या नई जानकारी सामने आती है।













