गुवाहाटी में असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान राज्यभर में बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाने का ठोस फैसला किया है। पार्टी का मानना है कि कोयला, पत्थर और बालू के अवैध सिंडिकेट्स ने क्षेत्र में हालिया बाढ़ की तबाही को और अधिक गंभीर बना दिया है।
इस अहम बैठक की अध्यक्षता असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने रविवार को की, जिसका मुख्य उद्देश्य पार्टी की संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा करना था। इस दौरान आगामी लोकसभा उपचुनाव, स्वायत्त परिषद चुनावों और नगर पालिका चुनावों के लिए पार्टी की तैयारियों का भी जायजा लिया गया।
बैठक में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे की गहराई से समीक्षा की गई और इसके साथ ही सोशल मीडिया विभाग की एक अलग बैठक भी आयोजित की गई। शीर्ष नेतृत्व ने ऊपरी असम के बाढ़ प्रभावित जिलों में जिला कांग्रेस समितियों और सेवा दल, महिला कांग्रेस, युवा कांग्रेस तथा एनएसयूआई जैसे सभी अनुषांगिक संगठनों द्वारा चलाए जा रहे राहत एवं पुनर्कार्य कार्यों का पूरा ब्योरा लिया।
कांग्रेस की ओर से जारी बयान के अनुसार, राहत अभियानों के तहत क्षतिग्रस्त मकानों का पुनर्निर्माण किया जा रहा है, सार्वजनिक और धार्मिक संस्थानों की सफाई की जा रही है, तथा स्कूलों में कक्षाएं दोबारा शुरू कराने में मदद के लिए श्रमदान किया जा रहा है। इसके अलावा किसानों को धान के पौधे बांटे जा रहे हैं और धान की रोपाई के लिए सीधी सहायता भी पहुंचाई जा रही है।
पार्टी ने स्पष्ट किया कि उसने ऊपरी असम में हालिया आपदा के मुख्य कारणों के रूप में चिह्नित कोयला, पत्थर और बालू सिंडिकेट के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया है। इसके विरोध में पूरे राज्य में एक बड़ा जन जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
बैठक में इसके अलावा काजीरंगा नेशनल पार्क के चारों ओर पर्यावरण के प्रति संवेदनशील यानी इको-सेंसिटिव जोन के दायरे को 10 किलोमीटर से घटाकर 1 किलोमीटर करने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध करने का भी निर्णय लिया गया। कांग्रेस नेताओं ने एंग्लेंग पाथार में स्थानीय लोगों की जमीन के अधिग्रहण और उसे बड़े कॉरपोरेट घरानों को सौंपे जाने के प्रस्ताव पर भी कड़ी आपत्ति जताई।
पार्टी ने जोर देकर कहा कि वह इन तमाम जनविरोधी नीतियों के खिलाफ जनता की राय एकजुट करने के वास्ते एक बड़े जनआंदोलन का नेतृत्व करेगी। बैठक में इसके अलावा प्रदेश कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए जोनल स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने का प्रस्ताव भी रखा गया।
बैठक में नेताओं ने असम और अन्य विश्वविद्यालयों में कुलपति के पदों पर आरएसएस से जुड़े व्यक्तियों की नियुक्ति तथा कॉलेजों में प्राचार्यों के पदों पर वैचारिक रूप से अनुकूल उम्मीदवारों को तरजीह दिए जाने की खबरों पर गहरी चिंता व्यक्त की।
इसके अलावा नेतृत्व ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर जन-जेड पीढ़ी के बीच बढ़ रही बेचैनी पर भी लंबी चर्चा की। युवाओं से जुड़े तमाम महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाने और उन पर समाधान खोजने के वास्ते पार्टी ने एक राज्य स्तरीय युवा सम्मेलन आयोजित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है।




















