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बेरोजगारों की उम्मीद बना जयपुर का यह 286 साल पुराना शिवालय, सत्ता भी रखती है फासलाधर्म
29 जुल॰ 2026, 1:49 pm (63 दिन पहले)· 0

बेरोजगारों की उम्मीद बना जयपुर का यह 286 साल पुराना शिवालय, सत्ता भी रखती है फासला

जयपुर के चारदीवारी बाजार की छोटी चौपड़ पर बना करीब 286 साल पुराना रोजगारेश्वर महादेव मंदिर बेरोजगारों और व्यापारियों की आस्था का केंद्र है, जहां सावन में जलाभिषेक के लिए भारी भीड़ उमड़ती है.

सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही राजस्थान की राजधानी जयपुर के पुराने शिव मंदिरों में भक्तों की चहल-पहल बढ़ गई है. शहर के चारदीवारी बाजार की छोटी चौपड़ पर बना रोजगारेश्वर महादेव मंदिर इन दिनों खास चर्चा में है, क्योंकि यहां भगवान शिव को सिर्फ आराध्य नहीं बल्कि रोजगार और कारोबार का भागीदार मानकर पूजा जाता है. जयपुर की गलियों में वैसे तो सैकड़ों वर्ष पुराने कई शिवालय बसे हैं, लेकिन इस मंदिर की पहचान इसकी अनोखी मान्यता की वजह से बाकी मंदिरों से अलग है.

नौकरी और कारोबार के लिए यहां लगती है अर्जी

जयपुर के इस मंदिर की खासियत यही है कि यहां बेरोजगार युवा नौकरी पाने की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, तो वहीं शहर के व्यापारी अपने प्रतिष्ठान की तरफ रवाना होने से पहले शिवलिंग पर मत्था टेकना नहीं भूलते. मंदिर के पुजारी और आसपास रहने वाले लोगों के मुताबिक, यह करीब 286 साल पुराना मंदिर जयपुर के राज परिवार ने बनवाया था. कई लोग नया कारोबार या नई नौकरी शुरू करने से ठीक पहले यहां आकर भगवान शिव को अपना सहयोगी मानते हुए पूजा-अर्चना करते हैं, मानो किसी नए उद्यम की शुरुआत से पहले वे अपने भागीदार की रजामंदी ले रहे हों. मंदिर को लेकर लोगों की आस्था इतनी गहरी है कि सत्ताधारी दल भी इससे हमेशा सहमा हुआ रहा है, यही वजह है कि आज तक इस मंदिर को स्थायी रूप से हटाने की कोई कोशिश कामयाब नहीं हो सकी.

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मंदिर हटाने की कोशिशें और मिर्जा इस्माइल का किस्सा

चारदीवारी इलाके की सड़कों के बीचोंबीच बसे कई पुराने मंदिरों को सड़क चौड़ीकरण और अन्य विकास कार्यों के दौरान वहां से हटाने की कोशिशें होती रही हैं, और रोजगारेश्वर महादेव मंदिर भी इससे अछूता नहीं रहा. स्थानीय निवासियों के मुताबिक, राजशाही के दौर में मिर्जा इस्माइल ने भी एक बार इस मंदिर को हटवाने की कोशिश की थी. मान्यता है कि इसके तुरंत बाद उनका बेटा बुरी तरह बीमार पड़ गया. जयपुर के विद्वानों ने तब उन्हें समझाया कि मंदिर को हाथ न लगाएं, क्योंकि यह स्थान लोगों की गहरी आस्था से जुड़ा है. इसके बाद मिर्जा इस्माइल ने न सिर्फ मंदिर हटाने का इरादा छोड़ दिया, बल्कि इसे और भव्य बनवाया और यहां 11 अन्य ज्योतिर्लिंग भी स्थापित करवा दिए, जिससे मंदिर परिसर पहले से कहीं बड़ा और आकर्षक हो गया.

भूमिगत मेट्रो के निर्माण में भी टली टक्कर

साल 2015 में जब जयपुर में भूमिगत मेट्रो का काम चल रहा था, तब निर्माण कार्य के रास्ते में आ रहे इस पुराने मंदिर को हटाने का फैसला एक बार फिर लिया गया. लेकिन इलाके के लोगों ने इसका पुरजोर विरोध किया, जिसके बाद प्रशासन को मंदिर को उसी जगह दोबारा बनवाना पड़ा. इस तरह हर बार मंदिर को हटाने की कोशिश किसी न किसी वजह से बेअसर साबित हुई, और हर पुनर्निर्माण के बाद लोगों की आस्था पहले से ज्यादा मजबूत होकर सामने आई.

सावन में शिवलिंग पर जलाभिषेक करने उमड़ते हैं बेरोजगार युवा

जयपुर के चारदीवारी बाजार में वैसे तो कई प्राचीन शिव मंदिर मौजूद हैं, लेकिन रोजगारेश्वर महादेव मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं की भावना कुछ अलग ही है. सावन के महीने में यहां आने वाले भक्तों की तादाद कई गुना बढ़ जाती है. खासकर वे युवा जो नौकरी की तलाश में हैं, यहां शिवलिंग पर जल चढ़ाकर अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि जब-जब इस मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ, तब-तब भक्तों की आस्था और गहरी होती चली गई. शहर के कई व्यापारी बताते हैं कि उन्होंने इसी मंदिर में पूजा करने के बाद अपना कारोबार शुरू किया था और आज भी वे अपनी कामयाबी का श्रेय इसी शिवालय को देते हैं.

आकार में यह मंदिर बेशक छोटा है और छोटी चौपड़ की मुख्य सड़क के बीचों-बीच स्थित है, लेकिन इसकी वास्तुकला देखने वालों को आकर्षित करती है. यही वजह है कि यहां सिर्फ श्रद्धालु ही नहीं, बल्कि जयपुर घूमने आने वाले पर्यटक भी इस प्राचीन शिवालय को देखने जरूर पहुंचते हैं. सदियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी उतनी ही जीवंत है, जितनी शायद मंदिर के निर्माण के समय रही होगी.

सवाल-जवाब

रोजगारेश्वर महादेव मंदिर कहां स्थित है?
यह मंदिर जयपुर के चारदीवारी बाजार की छोटी चौपड़ पर स्थित है.
मंदिर कितना पुराना है और इसे किसने बनवाया?
यह मंदिर करीब 286 साल पुराना है और इसे जयपुर के राज परिवार ने बनवाया था.
इस मंदिर में भगवान शिव को किस रूप में पूजा जाता है?
यहां भगवान शिव को रोजगार और बिजनेस पार्टनर के रूप में पूजा जाता है.
मिर्जा इस्माइल से जुड़ी क्या मान्यता है?
मान्यता है कि मंदिर हटाने की कोशिश के बाद मिर्जा इस्माइल का बेटा बीमार पड़ गया था, जिसके बाद उन्होंने मंदिर को भव्य बनवाया और 11 अन्य ज्योतिर्लिंग स्थापित करवाए.
साल 2015 में मंदिर के साथ क्या हुआ था?
भूमिगत मेट्रो निर्माण के दौरान मंदिर हटाने का फैसला लिया गया था, लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध के बाद इसे उसी जगह दोबारा बनवाया गया.
सावन में यहां किस तरह के लोग ज्यादा पहुंचते हैं?
खासतौर पर नौकरी की तलाश में रहने वाले युवा और अपने कारोबार के लिए आशीर्वाद लेने आने वाले व्यापारी.
मंदिर का आकार कैसा है?
मंदिर आकार में छोटा है और छोटी चौपड़ की मुख्य सड़क के बीचों-बीच स्थित है, लेकिन इसकी वास्तुकला आकर्षक है.
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