राजस्थान और उत्तर प्रदेश से वन्यजीवों के हमले की दो अलग-अलग दुखद घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें बाघ के हमले में दो लोगों की जान चली गई। जयपुर के प्रसिद्ध नाहरगढ़ जैविक उद्यान में बाड़े की सफाई कर रही एक महिला कर्मचारी को बाघ ने मौत के घाट उतार दिया। वहीं उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में खेत की रखवाली करने गए एक बुजुर्ग किसान पर बाघ ने हमला कर दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इन दोनों घटनाओं ने वन्यजीव अभयारण्यों और रिहाइशी इलाकों से सटे क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जयपुर के नाहरगढ़ जैविक उद्यान में सुरक्षा चूक से हादसा
राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित नाहरगढ़ जैविक उद्यान में बुधवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया जब बाड़े में सफाई के दौरान एक महिला सफाईकर्मी पर बाघ ने जानलेवा हमला कर दिया। मृतका की पहचान नागल सुसवातान निवासी सुगना देवी के रूप में हुई है, जो उद्यान में सफाई और रखरखाव कार्य से जुड़ी हुई थीं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुगना देवी उद्यान के बाड़ा संख्या 16 के भीतर सफाई कार्य में व्यस्त थीं। इसी दौरान बाड़े में मौजूद 'शिवाजी' नामक बाघ ने अचानक उन पर हमला कर दिया। चीख-पुकार सुनकर आसपास मौजूद अन्य कर्मचारी जब तक मौके पर पहुंचे, तब तक महिला की मौत हो चुकी थी।
घटना की सूचना मिलते ही आमेर थाना पुलिस और वन विभाग के उच्च अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे। आमेर के थानाधिकारी राजेंद्र गोदारा ने बताया कि पुलिस मामले की गहनता से पड़ताल कर रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि महिला सफाईकर्मी बाघ के बाड़े के अंदर किन परिस्थितियों में पहुंची और क्या वहां सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा था। प्रारंभिक जांच में बाड़े का दरवाजा खुला रहने और सुरक्षा प्रोटोकॉल के पालन में लापरवाही की आशंका जताई गई है। आमतौर पर किसी भी बाड़े में सफाई या मरम्मत का काम शुरू करने से पहले हिंसक जानवरों को एक सुरक्षित स्थान पर बंद किया जाता है। हादसे के तुरंत बाद पूरे बाड़े वाले इलाके को खाली कराकर सुरक्षा घेरा सख्त कर दिया गया है।
पीलीभीत में केले के बाग की रखवाली कर रहे किसान को बाघ ने बनाया शिकार
दूसरी तरफ, उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में बाघ का आतंक देखने को मिला है। पीलीभीत के शांतिनगर गांव निवासी 60 वर्षीय किसान मुंशी प्रसाद शुक्रवार की रात करीब आठ बजे अपने केले के बाग की रखवाली करने खेत पर गए थे। इसी दौरान खेत में पहले से घात लगाए बैठे बाघ ने मुंशी प्रसाद पर अचानक हमला कर दिया। बाघ के इस जानलेवा हमले में किसान गंभीर रूप से जख्मी हो गए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। जब मुंशी प्रसाद देर रात तक अपने घर वापस नहीं लौटे, तो चिंतित परिजनों ने ग्रामीणों के साथ मिलकर खेत में उनकी तलाश शुरू की। काफी मशक्कत के बाद खेत में उनका खून से लथपथ शव बरामद हुआ।
आक्रोशित ग्रामीणों का रामनगर तिराहे पर चक्काजाम और प्रदर्शन
किसान का शव मिलने की खबर फैलते ही ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश फैल गया। घटना से नाराज ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मुंशी प्रसाद के शव को रामनगर तिराहे पर रख दिया और मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शनकारी ग्रामीणों की मांग थी कि पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए और क्षेत्र में जंगली जानवरों से इंसानों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि गांव और आसपास के इलाकों में आए दिन बाघ और तेंदुए घूमते नजर आते हैं। इस संबंध में वन विभाग को कई बार शिकायतें दी गईं, लेकिन विभाग ने निगरानी और गश्त बढ़ाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। ग्रामीणों के अनुसार वन विभाग की इसी अनदेखी के कारण किसान को अपनी जान गवानी पड़ी।




















