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भाद्रपद मास में खान-पान से जुड़े जरूरी नियम, जानिए क्या खाएं और किन चीजों से बनाएं दूरीधर्म
1 सित॰ 2026, 4:07 pm (29 दिन पहले)· 2

भाद्रपद मास में खान-पान से जुड़े जरूरी नियम, जानिए क्या खाएं और किन चीजों से बनाएं दूरी

सनातन परंपरा में भाद्रपद मास का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। इस दौरान चातुर्मास के नियमों के तहत सेहत और शास्त्रों को ध्यान में रखते हुए खान-पान में कुछ खास चीजों को खाने और कुछ से परहेज करने की सलाह दी जाती है।

सनातन धर्म में भाद्रपद मास को पूजा-पाठ, उपवास और साधना के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। सावन महीने के तुरंत बाद शुरू होने वाले इस कालखंड में जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी, हरतालिका तीज और ऋषि पंचमी जैसे कई बड़े पर्व मनाए जाते हैं। इस वर्ष भाद्रपद मास 29 अगस्त से 26 सितंबर 2026 तक रहेगा। चातुर्मास के अंतर्गत आने वाले इस महीने में ईश्वर की आराधना के साथ-साथ खान-पान के विशेष नियमों का पालन करने का विधान बताया गया है।

भाद्रपद मास का धार्मिक और पौराणिक महत्व

हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद वर्ष का छठा महीना होता है, जिसे आम बोलचाल में भादों भी कहा जाता है। इस पूरे महीने में भगवान विष्णु के हृषिकेश स्वरूप की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। चूंकि यह महीना चातुर्मास के चार पवित्र महीनों का हिस्सा है, इसलिए इस दौरान जीवन में संयम, अनुशासन और पूरी तरह सात्विकता बनाए रखने पर खास जोर दिया जाता है।

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क्या खाना रहता है सेहत और परंपरा के लिहाज से बेहतर

भाद्रपद के दौरान मौसम में लगातार बदलाव होता रहता है और बारिश की वजह से पाचन तंत्र से जुड़ी कई प्रकार की परेशानियां उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे हालातों से बचने के लिए हमेशा ताजा और हल्का भोजन करना सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है। अपने दैनिक आहार में घर का बना सादा भोजन, मूंग और अरहर की दाल, पौष्टिक सूप, अदरक और भरपूर मात्रा में पानी को जरूर शामिल करना चाहिए। जो लोग इस दौरान व्रत या उपवास रखते हैं, वे लोग अपनी पारिवारिक परंपराओं के अनुसार फल, दूध, दही, मखाना, साबूदाना, कुट्टू और सिंघाड़े के आटे से तैयार व्यंजनों का सेवन कर सकते हैं। इसके अलावा सेहत के लिए गुणकारी सेब, केला, अनार और नाशपाती जैसे ताजे फल भी खाए जा सकते हैं।

किन चीजों से पूरी तरह बना लेनी चाहिए दूरी

धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं में भाद्रपद मास के दौरान पूरी तरह सात्विक आहार अपनाने पर बल दिया जाता है। देश के तमाम परिवारों में इस दौरान मांसाहार, मदिरा और किसी भी तरह के तामसिक भोजन का सेवन वर्जित माना जाता है। इसके अलावा बासी भोजन, जरूरत से ज्यादा तला-भुना और अत्यधिक मसालेदार खाना खाने से भी बचने की सख्त सलाह दी जाती है। प्राचीन शास्त्रों के अनुसार इस पूरे महीने में मांस, शहद, गुड़, मूली, बैंगन, चकुंदर, खीरा, ककड़ी और तरबूज का सेवन करने से मना किया गया है। साथ ही हरी पत्तेदार सब्जियों, मसूर की दाल और चना दाल को लेकर भी परहेज रखने का नियम बताया गया है।

क्षेत्र और परिवारों के अनुसार बदल सकती हैं परंपराएं

भाद्रपद महीने के दौरान खान-पान से जुड़े ये नियम देश के अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों की अपनी विशिष्ट परंपराओं के आधार पर भिन्न हो सकते हैं। यही वजह है कि किसी भी विशेष व्रत या धार्मिक नियम का पालन करते समय अपनी पारिवारिक परंपराओं और स्थानीय मान्यताओं को ही प्राथमिकता देना सबसे उचित और सही माना जाता है।

सवाल-जवाब

भाद्रपद मास 2026 में कब से कब तक रहेगा?
इस साल भाद्रपद मास 29 अगस्त से 26 सितंबर 2026 तक रहेगा।
भाद्रपद मास में किस देवता की पूजा की जाती है?
इस महीने में भगवान विष्णु के हृषिकेश स्वरूप की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
भाद्रपद के दौरान किस तरह का भोजन बेहतर माना जाता है?
इस दौरान ताजा, हल्का भोजन, घर का बना खाना, मूंग और अरहर की दाल, सूप तथा फल खाना बेहतर माना जाता है।
भाद्रपद मास में किन चीजों का सेवन करने से मना किया गया है?
शास्त्रों के अनुसार इस महीने में मांस, शहद, गुड़, मूली, बैंगन, चकुंदर, खीरा, ककड़ी और तरबूज से परहेज करने के लिए कहा गया है।
क्या व्रत रखने वाले लोग कुट्टू और सिंघाड़े का आटा खा सकते हैं?
हाँ, व्रत रखने वाले लोग अपनी परंपरा के अनुसार फल, दूध, दही, मखाना, साबूदाना, कुट्टू और सिंघाड़े के आटे से बने व्यंजन ले सकते हैं।
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