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बिहार के 1100 श्रद्धालुओं की सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा पाटलिपुत्र जंक्शन से शुरूधर्म
21 जुल॰ 2026, 1:55 am (72 दिन पहले)· 0

बिहार के 1100 श्रद्धालुओं की सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा पाटलिपुत्र जंक्शन से शुरू

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पाटलिपुत्र जंक्शन से 1100 श्रद्धालुओं से भरी विशेष ट्रेन को गुजरात के सोमनाथ मंदिर के लिए रवाना किया, जिसे 14 करोड़ बिहारियों की आस्था का प्रतीक बताया गया है।

बिहार की राजधानी पटना स्थित पाटलिपुत्र जंक्शन सोमवार को पूरी तरह से भक्ति के रंग में रंगा नजर आया। जय श्रीराम और हर-हर महादेव के गगनभेदी नारों के बीच बिहार सरकार द्वारा आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा का भव्य तरीके से आगाज हुआ। राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खुद स्टेशन पहुंचकर 1100 शिवभक्तों से भरी एक विशेष ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। यह ट्रेन गुजरात में मौजूद देश के पहले ज्योतिर्लिंग भगवान सोमनाथ के दर्शन के लिए रवाना की गई है। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने सभी यात्रियों से एक विशेष अपील करते हुए कहा, "जब भगवान सोमनाथ के दर्शन करें तो सबसे पहले बिहार की समृद्धि और खुशहाली के लिए प्रार्थना जरूर कीजिएगा।" सरकार की तरफ से प्रायोजित इस यात्रा को राज्य के सांस्कृतिक गौरव और सनातन धर्म की गहरी आस्था से जोड़कर देखा जा रहा है।

14 करोड़ बिहारियों की आस्था का प्रतीक

स्टेशन पर मौजूद उत्साही श्रद्धालुओं की भीड़ को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस आयोजन के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रेन में सवार ये 1100 लोग सिर्फ आम यात्री नहीं हैं, बल्कि वे पूरे राज्य की भावनाओं का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, भले ही राज्य के 14 करोड़ नागरिक व्यक्तिगत रूप से गुजरात की यात्रा नहीं कर रहे हैं, लेकिन उनकी आध्यात्मिक भावनाएं इस जत्थे के साथ जुड़ी हुई हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वहां पहुंचने वाले हर एक व्यक्ति का यह कर्तव्य है कि वह भगवान सोमनाथ के चरणों में पूरे बिहार राज्य के सुनहरे भविष्य, तेज गति वाले विकास और हर घर की खुशहाली के लिए विशेष प्रार्थना करे। मुख्यमंत्री की इस बात पर वहां मौजूद सभी लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ अपनी सहमति और खुशी जाहिर की।

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डॉ. राजेंद्र प्रसाद की ऐतिहासिक विरासत का स्मरण

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने इतिहास के पन्नों को पलटते हुए बिहार के महान सपूत और देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के अहम योगदान को भी याद किया। उन्होंने वहां मौजूद लोगों को बताया कि करीब 75 वर्ष पहले जब गुजरात में सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया था, तब उसके भव्य उद्घाटन समारोह में हिस्सा लेने के लिए डॉ. राजेंद्र प्रसाद विशेष रूप से वहां गए थे। वह क्षण पूरे राज्य के लिए अत्यधिक गर्व का विषय था। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पाटलिपुत्र जंक्शन से शुरू हो रही यह यात्रा उसी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपरा की एक मजबूत कड़ी है। इस अभियान के जरिए राज्य सरकार उसी गौरवशाली विरासत को नई पीढ़ी के सामने फिर से जीवंत करने का प्रयास कर रही है।

सांस्कृतिक धरोहरों पर आक्रमण और उनका पुनरुत्थान

अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने प्राचीन काल में भारतीय संस्कृति पर हुए हमलों का भी प्रमुखता से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि विदेशी आक्रांताओं ने भारत की मजबूत सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जड़ों को कमजोर करने के इरादे से सोमनाथ मंदिर जैसी पवित्र जगहों को बुरी तरह लूटा था। इसके साथ ही, उन्होंने बिहार के ऐतिहासिक नालंदा विश्वविद्यालय को भी आग के हवाले कर दिया था, जो कभी ज्ञान और शिक्षा का सबसे बड़ा वैश्विक केंद्र हुआ करता था। लेकिन अब परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। देश तेजी से अपनी पुरानी सांस्कृतिक धरोहरों को उनका खोया हुआ सम्मान वापस दिला रहा है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की लगातार कोशिशों के कारण ही नालंदा विश्वविद्यालय को विश्व पटल पर एक नई और मजबूत पहचान वापस मिल सकी है। इसी तरह, विदेशी हमलों का दंश झेलने वाला सोमनाथ मंदिर भी आज पूरे भारतवर्ष की अटूट आस्था का एक विशाल और प्रमुख केंद्र बनकर मजबूती से खड़ा है।

भक्ति और उल्लास से भरा पाटलिपुत्र स्टेशन का माहौल

सोमवार को पाटलिपुत्र जंक्शन का नजारा आम दिनों से बिल्कुल अलग था। सोमनाथ जाने वाली विशेष ट्रेन को बहुत ही आकर्षक तरीके से फूलों और धार्मिक झंडियों से सजाया गया था। यात्रा पर जाने वाले सभी 1100 श्रद्धालु गले में भगवा गमछा डाले हुए थे और उनके हाथों में विभिन्न धार्मिक प्रतीक नजर आ रहे थे। पूरे स्टेशन परिसर में लगातार जय श्रीराम और हर-हर महादेव के नारे गूंज रहे थे, जिससे वहां एक अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा पैदा हो गई थी। मुख्यमंत्री के प्रेरक भाषण के बाद सभी यात्रियों में एक अलग ही जोश देखने को मिला। ट्रेन में सवार होने से पहले सभी श्रद्धालुओं ने इस खास पहल के लिए राज्य सरकार का खुले दिल से आभार व्यक्त किया।

22 जुलाई को गुजरात पहुंचेगी विशेष ट्रेन

बिहार सरकार के धार्मिक पर्यटन और संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित यह विशेष सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा अपनी लंबी दूरी तय करते हुए 22 जुलाई को गुजरात स्थित भगवान सोमनाथ के पवित्र मंदिर में पहुंचेगी। वहां पहुंचने के बाद सभी यात्री पूरे विधि-विधान के साथ भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना करेंगे और दर्शन का लाभ उठाएंगे। पूजा के दौरान मुख्य रूप से राज्य के विकास और शांति की कामना की जाएगी। राज्य सरकार का स्पष्ट मानना है कि इस तरह के बड़े आयोजनों का मुख्य मकसद केवल धार्मिक पर्यटन को रफ्तार देना ही नहीं है, बल्कि आम जनता को अपने देश की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के साथ गहराई से जोड़ना भी है। यह पूरी यात्रा उसी दिशा में उठाया गया एक बेहद अहम कदम मानी जा रही है।

सवाल-जवाब

सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा कहां से शुरू हुई?
यह यात्रा पटना के पाटलिपुत्र जंक्शन से सोमवार को शुरू हुई।
इस यात्रा में कितने श्रद्धालु शामिल हैं?
बिहार सरकार द्वारा भेजी जा रही इस विशेष ट्रेन में 1100 श्रद्धालु यात्रा कर रहे हैं।
यात्रा का गंतव्य क्या है और यह कब पहुंचेगी?
यह विशेष ट्रेन 22 जुलाई को गुजरात स्थित भगवान सोमनाथ के मंदिर पहुंचेगी।
यात्रा को किसने रवाना किया?
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार के समय कौन वहां गया था?
करीब 75 वर्ष पहले जब मंदिर का पुनरुद्धार हुआ था, तब भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद वहां गए थे।
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