वर्ष 2026 में 28 अगस्त के दिन सावन पूर्णिमा का अत्यंत पवित्र पर्व मनाया जाएगा। इसी विशिष्ट तिथि पर साल का अंतिम चंद्रग्रहण भी घटित होने जा रहा है। खगोलीय और धार्मिक दृष्टि से यह घटना विशेष स्थान रखती है। हालांकि यह चंद्रग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, जिस कारण देश में इसका सूतक काल मान्य नहीं माना जाएगा। इसके बावजूद ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहण काल के दौरान बनने वाला चंद्रग्रहण दोष व्यक्ति की कुंडली को प्रभावित कर सकता है। इस दोष के नकारात्मक प्रभावों से मुक्ति पाने तथा कुंडली में चंद्रमा की स्थिति को सशक्त बनाने के लिए सावन पूर्णिमा का दिन दान-पुण्य के कार्यों के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। धर्म शास्त्रों के अनुसार इस दिन पांच विशेष वस्तुओं का दान करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और उन्नति के नए मार्ग प्रशस्त होते हैं।
चंद्रग्रहण का समय और स्नान-दान का नियम
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यद्यपि भारत में चंद्रग्रहण दिखाई न देने के कारण सूतक नियमों का पालन आवश्यक नहीं है, फिर भी ग्रहण के समाप्त होने के पश्चात स्नान और दान करने की परंपरा निभाई जाती है। भारतीय समयानुसार 28 अगस्त को दोपहर 12 बजकर 32 मिनट पर यह चंद्रग्रहण समाप्त हो जाएगा। ग्रहण मोक्ष के तुरंत बाद साधकों को पवित्र जल से स्नान करना चाहिए। स्नान के पश्चात ही दान की जाने वाली सामग्रियों का संकल्प लेकर उन्हें सुपात्र व्यक्तियों अथवा धार्मिक स्थलों पर अर्पित करना चाहिए। ऐसा करने से चंद्रग्रहण दोष के प्रभाव समाप्त होते हैं और घर-परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है।
चंद्रग्रहण दोष निवारण के लिए 5 प्रमुख दान
ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन, जल और सफेद रंग का कारक माना गया है। सावन पूर्णिमा के शुभ अवसर पर निम्नलिखित 5 वस्तुओं का दान करने से चंद्र दोष दूर होता है तथा करियर और स्वास्थ्य में शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं।
- अन्न एवं सफेद खाद्य पदार्थों का दान: चंद्रमा का संबंध धवल यानी सफेद रंग से है। इसलिए सावन पूर्णिमा पर दूध, दही, मावा, चावल और चीनी जैसी सफेद खाद्य सामग्रियों का दान करना अत्यंत फलदायी होता है। इन वस्तुओं के दान से चंद्रदेव की कृपा प्राप्त होती है और कुंडली में मौजूद ग्रहण दोष क्षीण हो जाता है।
- चांदी की धातु का दान: चांदी को चंद्रमा की मुख्य धातु माना जाता है। इस पावन तिथि पर चांदी का दान करने से व्यक्ति के उत्तम स्वास्थ्य के योग बनते हैं। इसके अतिरिक्त व्यावसायिक क्षेत्र में प्रगति मिलती है, आर्थिक तंगी दूर होती है और जीवन में धन-धान्य की निरंतर वृद्धि होती है।
- सफेद वस्त्रों का दान: सावन पूर्णिमा के दिन जरूरतमंदों को सफेद रंग के स्वच्छ कपड़ों का दान करना चाहिए। यदि आप किसी अनाथालय या वृद्ध आश्रम में जाकर बुजुर्गों को सफेद वस्त्र अर्पित करते हैं, तो इससे जीवन में आने वाले कष्ट दूर होते हैं और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
- दिव्य शंख का दान: शंख की उत्पत्ति समुद्र मंथन के दौरान हुई थी और इसका सीधा संबंध जल तत्व तथा चंद्रमा से है। इस दिन किसी पूज्य मंदिर में शंख का दान करने से आर्थिक उन्नति के द्वार खुलते हैं। यह दान व्यक्ति को मानसिक तनाव से राहत दिलाकर सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।
- शीतल जल का दान: जल दान को शास्त्रों में महादान का दर्जा दिया गया है। सावन पूर्णिमा पर प्यासों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था करना या जल का दान करना अत्यंत लाभकारी माना गया है। इससे चंद्रग्रहण दोष शांत होता है और साधक को आत्मिक तथा मानसिक शांति प्राप्त होती है।
कुंडली में चंद्रमा को मजबूत करने का महत्व
वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को व्यक्ति की मानसिक स्थिति, भावनाओं और एकाग्रता का स्वामी माना गया है। जब कुंडली में चंद्रमा पर ग्रहण दोष का प्रभाव पड़ता है, तो व्यक्ति को मानसिक तनाव, अनिद्रा और आर्थिक अस्थिरता का सामना करना पड़ता है। सावन पूर्णिमा के पवित्र दिन भगवान शिव की उपासना के साथ-साथ इन 5 वस्तुओं का दान करने से चंद्रमा के अशुभ प्रभाव समाप्त हो जाते हैं। चंद्रमा के मजबूत होने से व्यक्ति के निर्णय लेने की क्षमता में सुधार आता है तथा कार्यक्षेत्र में सफलता के योग प्रबल होते हैं।



















