हरिद्वार में 172 साल पुराने ऐतिहासिक ललिता राव पुल पर भारी वाहनों की आवाजाही बंद, उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ने सुरक्षा कारणों से उठाया कदमशाहाबाद में 16 वर्षीय किशोर की इलाज के दौरान मौत, परिजनों ने पुलिसकर्मियों पर लगाया छत से नीचे गिराने का आरोपनारायणगढ़ की गौशाला में लंपी वायरस के मामले मिलने से हड़कंप, पशुपालकों के लिए एडवाइजरी जारीवनडे क्रिकेट में 105 पारियां खेलने के बाद भी कभी डक पर आउट नहीं हुए केपलर वेसेल्स, लिस्ट में भारतीय दिग्गज भी शामिलरक्षाबंधन पर बस्तर की बेलमेटल राखियों की भारी मांग, चीनी विकल्पों को पछाड़ रही हस्तशिल्प कलाडेब्यू में शून्य पर आउट होने के बाद पसिंदु सूरियाबंदारा ने दिखाया दम, भारत के खिलाफ कोलंबो टेस्ट में ढहाया फॉलोऑन का संकटघर पर बनाएं काशी के प्रसिद्ध घाटों जैसी खस्ता बनारसी कचौड़ी और तीखी आलू की सब्जीऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.7200 के स्तर पर केंद्रित, जानिए पाउंड, यूरो, सोना और हाइपरलिक्विड का बाजार हालविदेश यात्रा और सेटलमेंट के संकेत देती हैं हथेली की ये रेखाएं, जानें चंद्र पर्वत का महत्वफ्रांसीसी अदालत का बड़ा फैसला: एयर फ्रांस की केबिन क्रू के ब्रेस्ट कैंसर की वजह कॉस्मिक रेडिएशन मानी गई
तीस की उम्र पार करते ही महिलाओं को क्यों बढ़ानी चाहिए प्रोटीन की मात्रा, फ़िटनेस विशेषज्ञ श्वेतांबरी शेट्टी ने दिए आहार सुझावस्वास्थ्य
26 अग॰ 2026, 3:28 pm (1 घंटे पहले)· 3

तीस की उम्र पार करते ही महिलाओं को क्यों बढ़ानी चाहिए प्रोटीन की मात्रा, फ़िटनेस विशेषज्ञ श्वेतांबरी शेट्टी ने दिए आहार सुझाव

30 वर्ष की आयु के बाद महिलाओं में मांसपेशियों और हड्डियों की कमजोरी का जोखिम बढ़ता है। फ़िटनेस विशेषज्ञ श्वेतांबरी शेट्टी के अनुसार, सही मात्रा में प्रोटीन का सेवन वजन नियंत्रण और हार्मोनल संतुलन बनाए रखने में मददगार है।

महिलाओं के शरीर में 30 वर्ष की उम्र पार करने के पश्चात कई जैविक और शारीरिक परिवर्तन होने शुरू हो जाते हैं। इस महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंचते ही मुख्य रूप से चार बड़ी स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इनमें मांसपेशियों का क्षय होना, हड्डियों के घनत्व में कमी आकर उनका कमजोर होना, शरीर में हार्मोनल असंतुलन पैदा होना और रक्त में शर्करा का स्तर अचानक बढ़ना शामिल है। स्वास्थ्य और फ़िटनेस विशेषज्ञ श्वेतांबरी शेट्टी के अनुसार, इन गंभीर समस्याओं का मूल कारण हमारा दैनिक खानपान है। पारंपरिक भारतीय भोजन की थाली में कार्बोहाइड्रेट्स की अधिकता होती है जबकि प्रोटीन का अनुपात काफी कम रहता है। यही असंतुलन आगे चलकर शरीर को अंदर से कमजोर बनाने लगता है। इन पोषक तत्वों की कमी को दूर करने और शरीर की समग्र फ़िटनेस को बनाए रखने के लिए दैनिक आहार में उच्च प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देना अत्यंत आवश्यक हो जाता है।

मांसपेशियों के क्षय का गणित और मेनोपॉज़ का प्रभाव

शारीरिक परिवर्तनों पर प्रकाश डालते हुए फ़िटनेस विशेषज्ञ श्वेतांबरी शेट्टी बताती हैं कि 30 साल की उम्र के बाद महिलाओं के शरीर में हर दस साल में 3 से 8 प्रतिशत तक मांसपेशियों का नुकसान होने लगता है। उम्र बढ़ने के साथ होने वाला यह क्षय स्वाभाविक है, परंतु मेनोपॉज़ की स्थिति में पहुंचते ही यह प्रक्रिया और भी अधिक तीव्र हो जाती है। इसके पीछे मुख्य वजह एस्ट्रोजन हार्मोन का गिरता स्तर है। एस्ट्रोजन महिला शरीर में मांसपेशियों के उत्तकों को सुरक्षा प्रदान करने का काम करता है। मेनोपॉज़ के दौरान जब एस्ट्रोजन का निर्माण घट जाता है, तब मसल्स लॉस की गति कई गुना बढ़ जाती है। यदि महिलाएं अपनी दैनिक दिनचर्या में उच्च प्रोटीन आहार को शामिल कर लें, तो वे अपनी मांसपेशियों को मजबूत रख सकती हैं, हड्डियों के घनत्व को सुरक्षित रख सकती हैं और अपने मेटाबॉलिज्म के साथ-साथ शरीर के वजन पर भी प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर सकती हैं।

ये भी पढ़ें

दैनिक आहार में शामिल करने योग्य 5 प्रमुख उच्च प्रोटीन खाद्य पदार्थ

शरीर में प्रोटीन की दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विशेषज्ञ कुछ विशेष सुपरफूड्स को भोजन में शामिल करने की सलाह देते हैं। ये खाद्य पदार्थ शाकाहारी और मांसाहारी दोनों प्रकार के व्यक्तियों के लिए उत्कृष्ट विकल्प हैं

  • पनीर: चाहे आप शाकाहारी आहार का पालन करते हों या मांसाहारी, पनीर को अपनी थाली में अवश्य स्थान दें। यह प्रोटीन और कैल्शियम दोनों का एक बेजोड़ स्रोत है, जो मांसपेशियों और हड्डियों की मजबूती के लिए अति आवश्यक है। 100 ग्राम पनीर के सेवन से शरीर को लगभग 18 ग्राम प्रोटीन आसानी से मिल जाता है। शाकाहारी लोगों के लिए यह दैनिक प्रोटीन की भरपाई करने का सबसे सुलभ माध्यम है।
  • टोफू: जो लोग डेयरी उत्पादों का सेवन करने से बचते हैं, जिन्हें दूध से एलर्जी है या जो वीगन जीवनशैली अपनाते हैं, उनके लिए टोफू एक बेहतरीन विकल्प है। सोयाबीन के दूध से निर्मित यह प्लांट बेस्ड उत्पाद शरीर में पोषक तत्वों की कमी को पूरा करता है।
  • अंडे: अंडे को उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन का सुपरफूड माना जाता है। एक सामान्य अंडे से लगभग 6 ग्राम प्रोटीन प्राप्त होता है। यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन दो अंडों का सेवन करता है, तो उसे 12 ग्राम प्रोटीन मिलता है। इसके अतिरिक्त, अंडे का पीला भाग यानी जर्दी शरीर को आवश्यक विटामिन डी प्रदान करने में भी सहायक है।
  • सोयाबीन: जो महिलाएं अंडे या मांस का सेवन नहीं करती हैं, वे सोयाबीन को अपने भोजन में शामिल कर सकती हैं। शाकाहारी खाद्य पदार्थों की श्रेणी में सोयाबीन में सबसे अधिक प्रोटीन पाया जाता है। प्रतिदिन 30 ग्राम सोयाबीन का सेवन करने से शरीर की दैनिक पोषक जरूरतों को प्रभावी रूप से पूरा किया जा सकता है।
  • दालें और फलियां: अरहर, मूंग, चना, छोले और राजमा जैसी दालों में भरपूर मात्रा में प्राकृतिक प्रोटीन मौजूद होता है। प्रतिदिन एक कटोरी पकी हुई दाल का सेवन करने से शरीर को लगभग 11 से 15 ग्राम तक प्लांट प्रोटीन प्राप्त होता है, जो मांसपेशियों को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

सवाल-जवाब

30 की उम्र के बाद महिलाओं के शरीर में कौन सी मुख्य समस्याएं बढ़ सकती हैं?
30 वर्ष की आयु के बाद मांसपेशियों का कम होना, हड्डियों का कमजोर पड़ना, हार्मोनल असंतुलन और ब्लड शुगर स्तर बढ़ने जैसे जोखिम तेजी से बढ़ते हैं।
हर दशक में महिलाओं में मांसपेशियों का नुकसान किस दर से होता है?
फ़िटनेस विशेषज्ञ श्वेतांबरी शेट्टी के अनुसार, 30 वर्ष की आयु के बाद महिलाओं में प्रति दशक 3 से 8 प्रतिशत तक मांसपेशियों का नुकसान होने लगता है।
मेनोपॉज़ के बाद मांसपेशियों का क्षय क्यों तेजी से होने लगता है?
मेनोपॉज़ के बाद शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर बहुत घट जाता है। चूकि एस्ट्रोजन मांसपेशियों की रक्षा करता है, इसकी कमी से मसल्स लॉस तेज़ हो जाता है।
शाकाहारी महिलाओं के लिए प्रोटीन के सबसे बेहतरीन विकल्प कौन से हैं?
शाकाहारी महिलाओं के लिए पनीर, टोफू, सोयाबीन और विभिन्न प्रकार की दालें प्रोटीन प्राप्त करने के बेहतरीन और सुलभ विकल्प हैं।
एक अंडे से शरीर को कितना प्रोटीन मिलता है?
एक अंडे में लगभग 6 ग्राम प्रोटीन होता है। प्रतिदिन दो अंडे खाने से 12 ग्राम प्रोटीन मिलता है, जबकि अंडे की जर्दी से विटामिन डी भी प्राप्त होता है।
भारतीय भोजन में प्रोटीन की कमी का मुख्य कारण क्या माना गया है?
भारतीय थाली में कार्बोहाइड्रेट्स की मात्रा अधिक और प्रोटीन की मात्रा काफी कम होती है, जिससे शरीर में आवश्यक न्यूट्रिएंट्स की कमी हो जाती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR