महिलाओं के शरीर में 30 वर्ष की उम्र पार करने के पश्चात कई जैविक और शारीरिक परिवर्तन होने शुरू हो जाते हैं। इस महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंचते ही मुख्य रूप से चार बड़ी स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इनमें मांसपेशियों का क्षय होना, हड्डियों के घनत्व में कमी आकर उनका कमजोर होना, शरीर में हार्मोनल असंतुलन पैदा होना और रक्त में शर्करा का स्तर अचानक बढ़ना शामिल है। स्वास्थ्य और फ़िटनेस विशेषज्ञ श्वेतांबरी शेट्टी के अनुसार, इन गंभीर समस्याओं का मूल कारण हमारा दैनिक खानपान है। पारंपरिक भारतीय भोजन की थाली में कार्बोहाइड्रेट्स की अधिकता होती है जबकि प्रोटीन का अनुपात काफी कम रहता है। यही असंतुलन आगे चलकर शरीर को अंदर से कमजोर बनाने लगता है। इन पोषक तत्वों की कमी को दूर करने और शरीर की समग्र फ़िटनेस को बनाए रखने के लिए दैनिक आहार में उच्च प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देना अत्यंत आवश्यक हो जाता है।
मांसपेशियों के क्षय का गणित और मेनोपॉज़ का प्रभाव
शारीरिक परिवर्तनों पर प्रकाश डालते हुए फ़िटनेस विशेषज्ञ श्वेतांबरी शेट्टी बताती हैं कि 30 साल की उम्र के बाद महिलाओं के शरीर में हर दस साल में 3 से 8 प्रतिशत तक मांसपेशियों का नुकसान होने लगता है। उम्र बढ़ने के साथ होने वाला यह क्षय स्वाभाविक है, परंतु मेनोपॉज़ की स्थिति में पहुंचते ही यह प्रक्रिया और भी अधिक तीव्र हो जाती है। इसके पीछे मुख्य वजह एस्ट्रोजन हार्मोन का गिरता स्तर है। एस्ट्रोजन महिला शरीर में मांसपेशियों के उत्तकों को सुरक्षा प्रदान करने का काम करता है। मेनोपॉज़ के दौरान जब एस्ट्रोजन का निर्माण घट जाता है, तब मसल्स लॉस की गति कई गुना बढ़ जाती है। यदि महिलाएं अपनी दैनिक दिनचर्या में उच्च प्रोटीन आहार को शामिल कर लें, तो वे अपनी मांसपेशियों को मजबूत रख सकती हैं, हड्डियों के घनत्व को सुरक्षित रख सकती हैं और अपने मेटाबॉलिज्म के साथ-साथ शरीर के वजन पर भी प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर सकती हैं।
दैनिक आहार में शामिल करने योग्य 5 प्रमुख उच्च प्रोटीन खाद्य पदार्थ
शरीर में प्रोटीन की दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विशेषज्ञ कुछ विशेष सुपरफूड्स को भोजन में शामिल करने की सलाह देते हैं। ये खाद्य पदार्थ शाकाहारी और मांसाहारी दोनों प्रकार के व्यक्तियों के लिए उत्कृष्ट विकल्प हैं
- पनीर: चाहे आप शाकाहारी आहार का पालन करते हों या मांसाहारी, पनीर को अपनी थाली में अवश्य स्थान दें। यह प्रोटीन और कैल्शियम दोनों का एक बेजोड़ स्रोत है, जो मांसपेशियों और हड्डियों की मजबूती के लिए अति आवश्यक है। 100 ग्राम पनीर के सेवन से शरीर को लगभग 18 ग्राम प्रोटीन आसानी से मिल जाता है। शाकाहारी लोगों के लिए यह दैनिक प्रोटीन की भरपाई करने का सबसे सुलभ माध्यम है।
- टोफू: जो लोग डेयरी उत्पादों का सेवन करने से बचते हैं, जिन्हें दूध से एलर्जी है या जो वीगन जीवनशैली अपनाते हैं, उनके लिए टोफू एक बेहतरीन विकल्प है। सोयाबीन के दूध से निर्मित यह प्लांट बेस्ड उत्पाद शरीर में पोषक तत्वों की कमी को पूरा करता है।
- अंडे: अंडे को उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन का सुपरफूड माना जाता है। एक सामान्य अंडे से लगभग 6 ग्राम प्रोटीन प्राप्त होता है। यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन दो अंडों का सेवन करता है, तो उसे 12 ग्राम प्रोटीन मिलता है। इसके अतिरिक्त, अंडे का पीला भाग यानी जर्दी शरीर को आवश्यक विटामिन डी प्रदान करने में भी सहायक है।
- सोयाबीन: जो महिलाएं अंडे या मांस का सेवन नहीं करती हैं, वे सोयाबीन को अपने भोजन में शामिल कर सकती हैं। शाकाहारी खाद्य पदार्थों की श्रेणी में सोयाबीन में सबसे अधिक प्रोटीन पाया जाता है। प्रतिदिन 30 ग्राम सोयाबीन का सेवन करने से शरीर की दैनिक पोषक जरूरतों को प्रभावी रूप से पूरा किया जा सकता है।
- दालें और फलियां: अरहर, मूंग, चना, छोले और राजमा जैसी दालों में भरपूर मात्रा में प्राकृतिक प्रोटीन मौजूद होता है। प्रतिदिन एक कटोरी पकी हुई दाल का सेवन करने से शरीर को लगभग 11 से 15 ग्राम तक प्लांट प्रोटीन प्राप्त होता है, जो मांसपेशियों को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।



















