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दुर्गा अष्टमी पर खास तांत्रिक साधना, जानिए चार आदि शक्तिपीठों और 18 महाशक्तिपीठों का महत्वधर्म
18 अक्तू॰ 2026, 2:24 pm (36 मिनट पहले)· 0

दुर्गा अष्टमी पर खास तांत्रिक साधना, जानिए चार आदि शक्तिपीठों और 18 महाशक्तिपीठों का महत्व

शारदीय नवरात्रि के तहत अष्टमी तिथि का आरंभ हो चुका है और इस दौरान देशभर के शक्तिपीठों में भक्तों का तांता लगा हुआ है। इस विशेष दिन पर चार आदि शक्तिपीठों और 18 महाशक्तिपीठों का तांत्रिक साधना में बहुत बड़ा स्थान माना जाता है।

शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व के दौरान देश के कोने-कोने में मां दुर्गा की आराधना पूरी श्रद्धा के साथ की जा रही है। इस क्रम में रविवार सुबह 8 बजकर 27 मिनट से अष्टमी तिथि की शुरुआत हो गई है। नवरात्रि के इस चरण का बहुत अधिक धार्मिक महत्व है क्योंकि इस दिन व्रत रखकर मां के आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा की जाती है। इस तिथि को दुर्गा अष्टमी या महाअष्टमी के रूप में जाना जाता है और इसी रात महानिशा पूजा भी संपन्न होती है। देश भर के विभिन्न शक्तिपीठों और देवी मंदिरों में इस दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय हो जाता है.

देशभर में कुल 51 शक्तिपीठ मौजूद हैं, जिनकी अपनी खास मान्यताएं हैं। इनमें से चार आदि शक्तिपीठ और 18 महाशक्तिपीठों का स्थान सबसे ऊपर माना जाता है। इन सभी पवित्र स्थानों पर पूरे साल भक्तों का आना-जाना लगा रहता है। इन चार आदि शक्तिपीठों को सबसे प्राचीन और मुख्य तीर्थ माना गया है क्योंकि तांत्रिक और पौराणिक ग्रंथों में इन्हें देवी की उपासना के शुरुआती और सबसे महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थान दिया गया है.

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असम के गुवाहाटी में नीलाचल पहाड़ी पर स्थित कामाख्या मंदिर एक प्रमुख आदि शक्तिपीठ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां माता सती का गर्भ भाग गिरा था। इस स्थान को सभी 51 शक्तिपीठों में सबसे अधिक शक्तिशाली और तंत्र साधना का मुख्य केंद्र माना जाता है। देश और विदेश से कई साधक यहां सिद्धि पाने की इच्छा से पहुंचते हैं। इस मंदिर में अष्टमी तिथि का बहुत बड़ा महत्व है, जहां इस दिन विशेष महापूजा, मंत्र जाप और तंत्र साधना की जाती है.

ओडिशा के पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर परिसर के भीतर दक्षिण-पश्चिम कोने में रोहिणी कुंड के पास विमला शक्तिपीठ मौजूद है। इसे भी आदि शक्तिपीठ माना जाता है क्योंकि यहां माता सती के चरण गिरे थे। इस स्थान के भैरव भगवान विष्णु को माना जाता है, जिससे यहां शाक्त और वैष्णव परंपराओं का सुंदर मेल दिखाई देता है। अष्टमी के दिन इस देवी रूप की पूजा करने से भक्तों को विशेष ऊर्जा मिलती है और इस मंदिर की एक खास परंपरा यह है कि भगवान जगन्नाथ को लगने वाला भोग तब तक महाप्रसाद नहीं बनता जब तक उसे पहले मां विमला को अर्पित न किया जाए.

ओडिशा के गंजम जिले में तारा-तारिणी शक्तिपीठ स्थित है जिसे भी आदि शक्तिपीठ का दर्जा प्राप्त है। यहां माता सती का वक्ष स्थल गिरा था, इसी वजह से इसे स्तनपीठ भी कहा जाता है। नवरात्रि की अष्टमी के दिन यहां मां तारा और मां तारिणी की विशेष पूजा होती है जिससे भक्तों को दैवीय आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह स्थान तंत्र साधना के लिए काफी प्रसिद्ध माना गया है जहां अष्टमी तिथि पर होम और विशेष अनुष्ठान कराए जाते हैं.

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में स्थित कालिका देवी शक्तिपीठ को भी आदि शक्तिपीठों में गिना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार यहां माता सती के दाहिने पैर की उंगलियां गिरी थीं। महाअष्टमी के दिन यहां मां काली के उग्र और दयालु दोनों स्वरूपों की पूजा होती है। इस दिन और इसकी रात में साधना करने से जीवन की अनगिनत बाधाएं, नकारात्मक ऊर्जा और मानसिक डर दूर होते हैं.

देश भर में कुल 18 महाशक्तिपीठ भी बताए गए हैं जिनका जिक्र आदि शंकराचार्य के स्तोत्र के अलावा स्कंद पुराण और देवी भागवत जैसे ग्रंथों में मिलता है। इन अष्टादश महाशक्तिपीठों को ऊर्जा और दिव्यता का बहुत बड़ा केंद्र माना गया है जहां तांत्रिक साधना के जरिए असीम सिद्धि प्राप्त की जा सकती है.

इन महाशक्तिपीठों में तमिलनाडु के कांचीपुरम में स्थित श्रीकांची कामाक्षी अम्मन मंदिर शामिल है, जहां माता सती की नाभि गिरी थी। यहां देवी कामाक्षी को परब्रह्म स्वरूप माना जाता है और अष्टमी के दिन इनकी उपासना करने से साधक को मानसिक स्पष्टता और आंतरिक बल मिलता है.

पश्चिम बंगाल के पांडुआ में स्थित श्रींखला शक्तिपीठ भी इन्हीं 18 महाशक्तिपीठों में से एक है। शंकराचार्य के स्तोत्र में वर्णित इस स्थान पर माता सती का उदर यानी पेट गिरा था। महाष्टमी के दिन यहां पूजा करने से सांसारिक मोह-माया और तांत्रिक बाधाओं से मुक्ति मिलती है.

कर्नाटक के मैसूर शहर में स्थित चामुंडेश्वरी देवी का मंदिर भी एक महत्वपूर्ण महाशक्तिपीठ है। मां चामुंडा को मां दुर्गा का एक प्रचंड रूप माना जाता है जिन्होंने चंड और मुंड नामक असुरों का वध किया था। अष्टमी के दिन इनकी पूजा करने से अहंकार और क्रोध जैसे दुर्गुणों का नाश होता है तथा शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है.

सवाल-जवाब

दुर्गा अष्टमी की तिथि कब शुरू हुई?
दुर्गा अष्टमी की तिथि रविवार सुबह 8 बजकर 27 मिनट से शुरू हुई।
चार आदि शक्तिपीठों में कौन सा मंदिर असम में स्थित है?
असम के गुवाहाटी में नीलाचल पहाड़ी पर स्थित कामाख्या मंदिर प्रमुख आदि शक्तिपीठ है।
विमला शक्तिपीठ कहाँ स्थित है?
विमला शक्तिपीठ ओडिशा के पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर परिसर के भीतर रोहिणी कुंड के पास स्थित है।
देश में कुल कितने महाशक्तिपीठ माने गए हैं?
देशभर में कुल 18 महाशक्तिपीठों का वर्णन पुराणों और आदि शंकराचार्य के स्तोत्र में मिलता है।
तारा-तारिणी शक्तिपीठ में माता सती का कौन सा अंग गिरा था?
तारा-तारिणी शक्तिपीठ में माता सती का वक्ष यानी स्तन गिरा था।
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