राजस्थान के भरतपुर शहर में प्रत्येक रिहायशी इलाके से नियमित कूड़ा उठाने का तंत्र भारी अव्यवस्था की चपेट में आ गया है। स्थानीय नगर निगम की निगरानी और अनुबंधित फर्म के बुनियादी ढांचे की पोल उस समय खुली, जब वार्ड संख्या 55 के पार्षद तथा शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ. दयाचंद पचौरी ने सुभाष नगर में संचालित वाहनों के वर्कशॉप का औचक मुआयना किया। इस दौरे में जमीनी स्तर पर नगर निगम के सफाई तंत्र का वास्तविक ढांचा पूरी तरह लचर नजर आया।
वार्डों के अनुपात में वाहनों की भारी किल्लत
शहरी क्षेत्र के भीतर कुल 65 वार्ड मौजूद हैं, जहां प्रतिदिन सुबह घर-घर जाकर अपशिष्ट एकत्र करने की जिम्मेदारी इन हल्के कचरा संग्रहण वाहनों पर होती है। वर्कशॉप के यार्ड में पहुंचने पर यह हकीकत सामने आई कि मौके पर उपलब्ध सक्रिय वाहनों की तादाद स्वीकृत वार्डों के मुकाबले 50 फीसदी से भी कम रह गई थी। यार्ड परिसर में अनेक ऑटो टिपर तकनीकी गड़बड़ियों के कारण कबाड़ की तरह अनुपयोगी खड़े दिखाई दिए। जब कचरा उठाने वाली गाड़ियां ही चालू हालत में नहीं होंगी, तो विभिन्न मोहल्लों में कूड़े का अंबार लगना तय है।
चालकों और सहायकों ने साझा किया जमीनी संकट
वार्डों में समय से गाड़ियां न पहुंचने के कारणों की पड़ताल करने पर वहां उपस्थित चालकों और सहायकों ने अपनी रोजमर्रा की दुश्वारियों का ब्योरा दिया। कर्मियों ने बताया कि बेड़े में मौजूद अधिकांश वाहन तकनीकी रूप से जर्जर हो चुके हैं, जबकि चालू दिख रहे वाहनों में भी आए दिन ब्रेकडाउन होता रहता है। पूरे वर्कशॉप की देखभाल और मरम्मत के लिए केवल एक मिस्त्री को तैनात किया गया है। एकल मैकेनिक होने की वजह से बिगड़ी हुई गाड़ियों की सर्विसिंग और समय पर सुधार होना व्यावहारिक रूप से नामुमकिन साबित हो रहा है।
चालकों को प्रातः 6 बजे ही ड्यूटी के लिए वर्कशॉप परिसर में तलब कर लिया जाता है, किंतु वाहनों की अनुपलब्धता के चलते उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ता है। स्थिति इतनी विकट है कि जब कोई चालक दूसरे वार्ड से कूड़ा खाली करके लौटता है, तभी वह वाहन किसी अन्य रूट पर रवाना हो पाता है। इसके अलावा कर्मियों ने वेतन भुगतान में महीनों की देरी और मनमाने ढंग से मेहनताने में कटौती किए जाने की बात भी जनप्रतिनिधि के समक्ष रखी।
सुपरवाइजरों की गैरहाजिरी और जनप्रतिनिधि का कड़ा रुख
निरीक्षण की इस प्रक्रिया के दौरान मॉनिटरिंग के स्तर पर भी गंभीर लापरवाही पाई गई। पूरे नगर क्षेत्र की निगरानी के लिए अधिकृत सुपरवाइजरों में से यार्ड के भीतर केवल एक ही अधिकारी उपस्थित मिला, जबकि बाकी सभी नदारद थे। अचानक हुई इस जांच की खबर मिलते ही संबंधित ठेकेदार फर्म का प्रतिनिधि मौके पर पहुंचा और उसने कंपनी की ओर से अपनी सफाई पेश की।
निरीक्षण के बाद पार्षद डॉ. दयाचंद पचौरी ने स्पष्ट किया कि सामने आई इस अव्यवस्था से नगर निगम आयुक्त और महापौर को आधिकारिक रूप से अवगत कराया जाएगा। उन्होंने रेखांकित किया कि नागरिकों के टैक्स और सार्वजनिक धन से सफाई मद में करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, इसके बावजूद डोर-टू-डोर सेवा का ठप होना कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए सभी पार्षदों, महापौर और आयुक्त को समन्वित प्रयास करने होंगे। इससे पहले भी नगर निगम की पहली साधारण सभा की बैठक में पचौरी ने कर्मियों के बकाया वेतन और वाहनों की भारी कमी का मसला प्रमुखता से उठाया था।


















