उज्जैन में होने वाले आगामी सिंहस्थ 2028 की भव्यता और तैयारियों को ध्यान में रखते हुए, खंडवा जिले की प्रसिद्ध और पवित्र नगरी ओंकारेश्वर के कायाकल्प के लिए एक बेहद बड़ी और विस्तृत योजना तैयार की गई है। इस धार्मिक स्थल पर बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, सड़कों की स्थिति सुधारने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा व सुविधा को बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर विकास कार्य शुरू किए जा रहे हैं। इस पूरी परियोजना का मुख्य लक्ष्य आने वाले समय में यहाँ जुटने वाले लाखों श्रद्धालुओं को विश्वस्तरीय सुविधाएं प्रदान करना है, जिससे न केवल तीर्थयात्रियों की यात्रा सुगम होगी बल्कि देश के पर्यटन मानचित्र पर इस धार्मिक क्षेत्र को एक नई पहचान भी मिलेगी।
प्राचीन मंदिरों की भव्यता और ऐतिहासिक विरासत का होगा संरक्षण
इस विकास योजना का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा यहाँ के प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों को संभालना है। इसके तहत प्रसिद्ध ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर सहित आसपास स्थित छह अत्यंत प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिरों का करोड़ों रुपये की लागत से पुनरुद्धार और जीर्णोद्धार किया जाएगा। इन ऐतिहासिक देवस्थानों में जूना अखाड़ा का इंद्रेश्वर मंदिर, विष्णु नारायण मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर, ब्रह्मेश्वर मंदिर और चंद्रमौलिश्वर मंदिर शामिल हैं। इन सभी मंदिरों के जीर्णोद्धार के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा जाएगा कि उनके मूल पारंपरिक स्वरूप और ऐतिहासिक वास्तुकला को कोई नुकसान न पहुँचे। इसके साथ ही, मंदिरों में आधुनिक जन-सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी ताकि श्रद्धालुओं को दर्शन करने में कोई परेशानी न हो।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग परिसर का विकास और सड़क संपर्क में सुधार
मुख्य ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर परिसर के चहुंमुखी विकास और उसके सौंदर्यीकरण के लिए शासन द्वारा लगभग 160 करोड़ रुपये के विकास कार्यों को मंजूरी दी गई है। इस बड़ी राशि की मदद से मंदिर परिसर को अधिक सुव्यवस्थित बनाया जाएगा और भीड़ नियंत्रण के लिए बेहतर मार्ग तैयार किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, नगर परिषद क्षेत्र में सड़कों की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए 12.63 करोड़ रुपये की लागत से मजबूत सीसी रोड का निर्माण किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को धूल-मिट्टी और ऊबड़-खाबड़ रास्तों से पूरी तरह राहत मिल सकेगी। यातायात को सुगम बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए ओंकारेश्वर रोड से सनावद मार्ग पर 9.23 करोड़ रुपये की लागत से रेलवे ओवरब्रिज (ROB) का निर्माण किया जाएगा। इस ओवरब्रिज के बन जाने से यहाँ लगने वाले लंबे ट्रैफिक जाम की समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगी।
मल्टीलेवल पार्किंग, आधुनिक फूड कोर्ट और हेलीपैड का होगा निर्माण
सिंहस्थ के दौरान उमड़ने वाली भारी भीड़ और वाहनों के दबाव को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा और पार्किंग व्यवस्था की योजना बनाई है। इसके तहत 24.99 करोड़ रुपये की लागत से एक बड़ा मल्टीलेवल पार्किंग स्थल, आधुनिक फूड कोर्ट, सार्वजनिक शौचालय और प्रशासनिक भवन का निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही, कुबेर भंडारी क्षेत्र में वाहनों के सुचारू प्रबंधन के लिए एक तीन मंजिला पार्किंग भी विकसित की जाएगी। किसी भी आपातकालीन स्थिति से तुरंत निपटने और आपदा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए ओंकारेश्वर में एक नया हेलीपैड भी बनाया जाएगा, जिससे जरूरत पड़ने पर एयर एम्बुलेंस सेवा का संचालन आसानी से किया जा सकेगा।
स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार और आदिगुरु शंकराचार्य एकात्म धाम का निर्माण
इस पूरी परियोजना में श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा गया है। क्षेत्र के मुख्य अस्पताल भवन का उन्नयन किया जाएगा, और वहाँ स्वास्थ्य कर्मचारियों के रहने के लिए स्टाफ क्वार्टर बनाए जाएंगे। इसके अलावा अस्पताल में अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं भी जुटाई जाएंगी ताकि आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को त्वरित उपचार मिल सके। सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण आदिगुरु शंकराचार्य के ‘एकात्म धाम’ और भव्य म्यूजियम का निर्माण कार्य भी यहाँ बहुत तेजी से किया जा रहा है। शासन ने इस परियोजना को सिंहस्थ से ठीक पहले पूरा करने का कड़ा लक्ष्य रखा है, जिससे यह पूरा क्षेत्र अध्यात्म के साथ-साथ ज्ञान और संस्कृति का भी एक बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा।
समय पर काम पूरा करने का लक्ष्य और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा
इस वृहद विकास योजना को अमलीजामा पहनाकर पूरा करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा पूरी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर ली गई है। आगामी 15 दिनों के भीतर इसके लिए निविदा यानी टेंडर प्रक्रिया भी शुरू कर दी जाएगी। सरकार ने इन सभी निर्माण कार्यों को दिसंबर 2027 तक हर हाल में पूरा करने का समय निर्धारित किया है ताकि सिंहस्थ 2028 में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। इस बुनियादी ढांचे के विकास से जहाँ एक तरफ धार्मिक पर्यटन को बल मिलेगा, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भारी मजबूती मिलेगी।











