मेवाड़ की धरती पर बसे चित्तौड़गढ़ जिले के ऐतिहासिक कृष्ण धाम श्री सांवलिया जी ने इस बार फिर साबित कर दिया कि भक्तों की श्रद्धा का कोई हिसाब नहीं होता। इस माह खोले गए मासिक भंडारे की जब गिनती शुरू हुई, तो पहले ही चरण में दानराशि करोड़ों के आंकड़े को छू गई। प्रथम दिन की गणना में ही 17 करोड़ 55 लाख रुपये की भारी-भरकम धनराशि सामने आई, और खास बात यह कि अभी कई चरणों की गिनती और सोने-चांदी के आभूषणों का तौल होना बाकी है। यह आंकड़ा अपने आप में उन लाखों भक्तों के अटूट विश्वास की कहानी कहता है, जो सांवलिया सेठ के दरबार में मत्था टेकने पहुंचते हैं।
श्री सांवलिया सेठ की पहचान उनकी चमत्कारी महिमा से जुड़ी है। यही वजह है कि प्रतिदिन देश के अलग-अलग कोनों से लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए उमड़ते हैं। सबसे अधिक भीड़ राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से आने वाले भक्तों की रहती है। मान्यता है कि इस दरबार में जो भी मुराद मांगी जाए, वह अवश्य पूरी होती है।
गुप्त दान की परंपरा से भरता है खजाना
भक्तों का विश्वास है कि मनोकामना पूरी होने और कारोबार में बरकत मिलने पर सांवलिया सेठ का आशीर्वाद हाथ रहता है। इसी आस्था के चलते लोग अपनी इच्छा और सामर्थ्य के अनुसार भगवान के चरणों में गुप्त रूप से दान अर्पित करते हैं। यही गुप्त दान हर महीने करोड़ों रुपये के रूप में मंदिर के खजाने तक पहुंचता है। मंदिर मंडल एक तय प्रक्रिया के तहत हर माह दानपात्र खोलता है। इस बार यह मासिक भंडारा सोमवती अमावस्या से ठीक एक दिन पहले खोला गया, और पहले ही दिन निकली राशि के नोटों को अलग-अलग छांटकर व्यवस्थित ढंग से जमाने का काम पूरा किया गया।
सोमवती अमावस्या पर रुकी रही गिनती
सोमवार को सोमवती अमावस्या का संयोग होने से मंदिर परिसर में दर्शनार्थियों का सैलाब उमड़ पड़ा। इतनी भारी भीड़ के बीच व्यवस्थाएं सुचारू बनी रहें, इसी को ध्यान में रखते हुए सोमवार के दिन नोटों की गिनती रोक दी गई। मंगलवार सुबह से प्रशासन और मंदिर मंडल के पदाधिकारियों की निगरानी में दानराशि की असली गणना दोबारा शुरू हुई। इसी प्रथम चरण की गिनती में आंकड़ा 17 करोड़ 55 लाख रुपये के रिकॉर्ड स्तर तक जा पहुंचा। मंदिर प्रशासन का कहना है कि यह तो सिर्फ पहले चरण का हिसाब है, भंडारे से निकली बाकी भारी नकदी की गिनती दूसरे और शेष चरणों में की जाएगी।
अभी बाकी है सोने-चांदी का मूल्यांकन
भक्तों द्वारा भगवान को चढ़ाए गए सोने और चांदी के आभूषणों के साथ-साथ अन्य बेशकीमती वस्तुओं का तौल अभी होना है। जैसे-जैसे सभी चरणों की गिनती और आभूषणों का मूल्यांकन पूरा होगा, यह आंकड़ा और ऊंचा जाना तय माना जा रहा है। सांवलिया सेठ का यह खजाना हर महीने भक्तों की आस्था की एक नई इबारत लिखता है। मंदिर मंडल इस बड़ी धनराशि का इस्तेमाल पूरी पारदर्शिता के साथ मंदिर के विकास, सामाजिक कार्यों और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बेहतर बनाने में करता है।













