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हल छठ व्रत की सही तारीख 2026, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त और इसका धार्मिक महत्वधर्म
31 अग॰ 2026, 10:43 am (30 दिन पहले)· 5

हल छठ व्रत की सही तारीख 2026, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त और इसका धार्मिक महत्व

साल 2026 में हल षष्ठी का पावन व्रत 2 सितंबर को रखा जाएगा। इस दिन माताएं अपनी संतानों की लंबी उम्र और बेहतर स्वास्थ्य के लिए विशेष रूप से पूजा-अर्चना करती हैं।

सनातन परंपरा में हल छठ का व्रत पुत्रों की दीर्घायु और उनके मंगलमय भविष्य की कामना के लिए रखा जाता है। यह पावन पर्व भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव यानी कृष्ण जन्माष्टमी से ठीक दो दिन पूर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी पावन तिथि पर बलराम जी का प्राकट्य हुआ था, इसलिए इसे बलराम जयंती के रूप में भी बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। देश के विभिन्न अंचलों और समाजों में इस व्रत को ललही छठ, चन्दन छठ, कमर छठ, खमर छठ, ऊब छठ, चन्द्र छठ, तिनछठी, तिन्नी छठ, चानन छठ और चना छठ जैसे तमाम नामों से पुकारा जाता है। हल षष्ठी या हरछठ के इस विशेष अवसर पर माताएं कठिन व्रत का पालन करती हैं और अपनी संतान के सुखी जीवन का आशीर्वाद मांगती हैं। ऐसी गहरी लोक मान्यता भी जुड़ी हुई है कि इस अनुष्ठान को पूरे विधि-विधान से संपन्न करने पर निस्संतान दंपतियों को भी संतान सुख की प्राप्ति होती है।

हल षष्ठी की सही तिथि 2026

पंचांग के अनुसार इस वर्ष हल षष्ठी का यह महत्वपूर्ण पर्व 2 सितंबर 2026, बुधवार के दिन मनाया जाएगा। षष्ठी तिथि का आरंभ 2 सितंबर को सुबह 06:12 बजे से होगा और इसका समापन अगले दिन यानी 3 सितंबर की सुबह 04:25 बजे हो जाएगा। सनातन परंपरा में उदया तिथि का विशेष महत्व माना जाता है, इसलिए हरछठ या हल षष्ठी का यह व्रत 2 सितंबर को ही रखा जाएगा।

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हल षष्ठी 2026 के शुभ मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04:29 AM से 05:14 AM
  • प्रातः सन्ध्या - सुबह 04:52 AM से 05:59 AM
  • विजय मुहूर्त - दोपहर 02:28 PM से 03:18 PM
  • गोधूलि मुहूर्त - शाम 06:42 PM से 07:04 PM
  • सायाह्न सन्ध्या - शाम 06:42 PM से 07:50 PM
  • अमृत काल - रात 09:06 PM से 10:38 PM
  • सुबह का समय - 06:12 AM (तिथि आरंभ)
  • भोर का समय - 04:25 AM (तिथि समाप्ति)

हल षष्ठी व्रत के नियम और परंपराएं

हल षष्ठी का यह व्रत मुख्य रूप से भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम को समर्पित होता है, जिन्हें हलधर भी कहा जाता है क्योंकि उनका प्रमुख शस्त्र हल है। इस व्रत की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें किसी भी ऐसे अनाज या फल का सेवन वर्जित माना जाता है जो जमीन जोतकर यानी हल चलाकर उगाया गया हो। इस दिन तालाब, कुंड या अन्य प्राकृतिक जलस्रोतों में खुद-ब-खुद उगने वाली तिन्नी की चावल जैसी चीजों का प्रसाद ग्रहण किया जाता है। इसके अलावा इस व्रत में गाय के दूध और उससे बनी दही या अन्य सामग्री का भी इस्तेमाल नहीं किया जाता है। कई इलाकों में महिलाएं इस दिन महुआ के दातून का उपयोग करने के साथ-साथ महुआ का सेवन भी करती हैं। इस अनुष्ठान के पीछे जुड़ी आस्था यही है कि संतान को आरोग्य, दीर्घायु और बलवान जीवन प्राप्त हो।

सवाल-जवाब

हल षष्ठी 2026 में किस दिन मनाई जाएगी?
हल षष्ठी का पावन पर्व 2 सितंबर 2026, बुधवार को मनाया जाएगा।
हल षष्ठी की तिथि कब से कब तक रहेगी?
यह तिथि 2 सितंबर की सुबह 06:12 बजे से शुरू होकर 3 सितंबर की सुबह 04:25 बजे तक रहेगी।
हल षष्ठी का व्रत मुख्य रूप से किसे समर्पित है?
यह व्रत भगवान कृष्ण के बड़े भाई भगवान बलराम को समर्पित होता है।
हल षष्ठी के दिन किस प्रकार के अनाज का सेवन नहीं किया जाता है?
इस दिन हल द्वारा जोती गई फसल से प्राप्त अनाजों का सेवन नहीं किया जाता है।
हल षष्ठी के अन्य कौन-कौन से नाम हैं?
इसे ललही छठ, चन्दन छठ, कमर छठ, ऊब छठ और तिनछठी जैसे नामों से भी जाना जाता है।
हल षष्ठी का व्रत कौन रखता है?
इस दिन महिलाएं अपनी संतान की लंबी आयु और सुखी जीवन की कामना से व्रत रखती हैं।
इस व्रत में किस दूध का सेवन वर्जित होता है?
इस व्रत में गाय के दूध और दही से बनी चीजों का सेवन नहीं किया जाता है।
हल षष्ठी का पर्व किस त्योहार से कितने दिन पहले आता है?
यह पर्व कृष्ण जन्माष्टमी से दो दिन पहले मनाया जाता है।
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