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कौशिकी अमावस्या 2026: जानिए सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा का समय और तारापीठ के विशेष धार्मिक अनुष्ठानधर्म
10 सित॰ 2026, 10:29 am (20 दिन पहले)· 4

कौशिकी अमावस्या 2026: जानिए सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा का समय और तारापीठ के विशेष धार्मिक अनुष्ठान

साल 2026 में भाद्रपद महीने की कौशिकी अमावस्या 10 सितंबर को मनाई जाएगी। इस खास अवसर पर मां तारा और मां काली की पूजा के साथ तारापीठ में विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं।

सनातन परंपरा में भाद्रपद महीने के दौरान आने वाली अमावस्या तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। इस पवित्र अवसर को कौशिकी अमावस्या के नाम से जाना जाता है, जो मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल और देश के अन्य हिस्सों में पूरी आस्था के साथ मनाई जाती है। साल 2026 में यह पावन पर्व 10 सितंबर, गुरुवार को मनाया जाएगा। इस दिन देशभर के विभिन्न मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर विशेष पूजा-अर्चना की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं, जिसमें बंगाल का तारापीठ क्षेत्र विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है।

कौशिकी अमावस्या 2026 की मुख्य तिथियां और समय

पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास की अमावस्या तिथि 10 सितंबर 2026 को सुबह 10 बजकर 11 मिनट पर शुरू होगी। यह तिथि अगले दिन यानी 11 सितंबर 2026 को सुबह 8 बजकर 50 मिनट तक प्रभावी रहेगी। चूंकि अमावस्या का अधिकांश भाग 10 सितंबर को विद्यमान रहेगा, इसलिए इसी दिन को मुख्य पूजा और व्रत के लिए निर्धारित किया गया है। श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे अपने स्थानीय पंचांग और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार ही सभी धार्मिक अनुष्ठानों को पूरा करें।

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तारापीठ में अनुष्ठान और तारा रात्रि का महत्व

पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में स्थित तारापीठ इस पर्व का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। यहां मां तारा और मां काली की आराधना के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं। इस रात को कई साधक और भक्त तारा रात्रि के रूप में भी जानते हैं। मंदिर परिसर में विशेष पूजा, भव्य आरती, मां के दर्शन और रातभर चलने वाले तांत्रिक व आध्यात्मिक साधना सत्र आयोजित किए जाते हैं। मान्यता है कि इस रात्रि में की गई साधना साधकों को विशेष मानसिक शक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करती है.

धार्मिक महत्व और दान-पुण्य की परंपरा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कौशिकी अमावस्या के दिन मां तारा से आंतरिक शक्ति, साहस और बुरी ताकतों से सुरक्षा का आशीर्वाद मांगा जाता है। भक्त इस दिन को अपने जीवन के भय, मानसिक संताप और तमाम परेशानियों से मुक्ति पाने का माध्यम मानते हैं। पूजा-पाठ के अलावा इस दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व होता है। जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या अन्य आवश्यक वस्तुएं दान करना इस पर्व की परंपरा का एक अहम हिस्सा माना गया है। इसके अलावा, कई लोग अपने दिवंगत पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण और पिंडदान जैसे अनुष्ठान भी करते हैं.

कौशिकी अमावस्या की पौराणिक कथा

इस पर्व के पीछे की पौराणिक कथा देवी कौशिकी और शक्तिशाली असुरों शुंभ-निशुंभ के बीच हुए भीषण युद्ध से जुड़ी हुई है। हिंदू ग्रंथों के अनुसार, उन असुरों को ऐसा वरदान मिला था कि उन्हें पराजित करना बेहद कठिन हो गया था। तब देवी ने अपने शरीर के आवरण यानी कोष से एक अत्यंत ओजस्वी रूप में प्रकट होकर अवतार लिया, जिन्हें कौशिकी नाम दिया गया। इसी दिव्य स्वरूप ने शुंभ और निशुंभ का वध कर ब्रह्मांड में संतुलन बहाल किया और धार्मिक व्यवस्था की रक्षा की।

जीवन में पर्व का संदेश

पौराणिक कथाओं का यह प्रसंग केवल एक पुरानी गाथा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर इंसान के जीवन के लिए प्रेरणा का स्रोत है। कौशिकी अमावस्या का पर्व हमें यह सिखाता है कि नियमित साधना, अनुशासन और अटूट भक्ति के बल पर जीवन के सभी आंतरिक विकारों, नकारात्मक विचारों और डर पर विजय प्राप्त की जा सकती है। बंगाल की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत में इस दिन का विशेष स्थान है, जो हर साल लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है.

सवाल-जवाब

वर्ष 2026 में कौशिकी अमावस्या कब है?
साल 2026 में कौशिकी अमावस्या 10 सितंबर, गुरुवार को मनाई जाएगी।
अमावस्या तिथि की शुरुआत और समाप्ति का समय क्या है?
अमावस्या तिथि 10 सितंबर 2026 को सुबह 10:11 बजे शुरू होगी और 11 सितंबर 2026 को सुबह 8:50 बजे समाप्त होगी।
कौशिकी अमावस्या का मुख्य केंद्र कौन सा स्थान है?
पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में स्थित तारापीठ इस पर्व का मुख्य और सबसे प्रसिद्ध केंद्र है।
इस दिन मुख्य रूप से किसकी पूजा की जाती है?
इस अवसर पर मुख्य रूप से मां तारा और मां काली की आराधना की जाती है।
कौशिकी अमावस्या किस पौराणिक प्रसंग से जुड़ी है?
यह पर्व देवी कौशिकी द्वारा शक्तिशाली असुरों शुंभ और निशुंभ के वध की कथा से जुड़ा हुआ है।
इस दिन भक्त कौन से प्रमुख कार्य करते हैं?
भक्त इस दिन विशेष पूजा, रात्रि साधना, दान-पुण्य और पूर्वजों के लिए तर्पण करते हैं।
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