उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां विंध्यवासिनी धाम के पूरे परिसर को आगामी पावन नवरात्रि पर्व से पूर्व एक नए और भव्य स्वरूप में संवारा जा रहा है। विंध्य कॉरिडोर के निर्माण कार्य के पूर्ण होने के उपरांत अब पूरे ढांचे की सुंदरता को निखारने के लिए विशेष मेटैलिक रंगों से रंगाई पुताई का व्यापक कार्य शुरू किया गया है। इन विशिष्ट रंगों के उपयोग से मंदिर प्रांगण का पूरा वातावरण दिव्य और अलौकिक नजर आने लगा है। स्थानीय प्रशासन की प्राथमिकता है कि त्योहार की औपचारिक शुरुआत से पहले ही रंग रोगन का यह चरण पूरा कर लिया जाए, ताकि दूरदराज से आने वाले सभी श्रद्धालुओं को मां के धाम का एक नव्य, भव्य और आध्यात्मिक रूप देखने को मिले। प्रशासन परिसर के समग्र विकास और श्रद्धालुओं की सुविधा को लेकर लगातार योजनाबद्ध प्रयास कर रहा है, जिससे परिसर का आकर्षण देखते ही बनता है।
गुलाबी पत्थरों और नक्काशीदार खंभों को दिया जा रहा आकर्षक रूप
नवरात्रि के व्यापक प्रबंधों के तहत मंदिर कॉरिडोर, समूचे परिसर और उससे सटे आसपास के क्षेत्रों के सुंदरीकरण पर लगभग 50 लाख रुपये की धनराशि व्यय की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत मुख्य धाम के भवनों के साथ साथ परिक्रमा पथ पर निर्मित खंभों को भी विशिष्ट रंगों और शिल्पकला से अलंकृत किया जा रहा है। परिक्रमा पथ के निर्माण के दौरान सभी खंभों को पारंपरिक गुलाबी पत्थरों का उपयोग करके खड़ा किया गया था। अब इन्हीं गुलाबी पत्थरों वाले पिलरों पर की जा रही मेटैलिक पेंटिंग उन्हें एक विशिष्ट आभा प्रदान कर रही है। खंभों और परिक्रमा पथ की यह नई छटा दूर से ही भक्तों का ध्यान खींच रही है और पूरे धाम में कदम रखने वाले दर्शनार्थियों को आध्यात्मिक रूप से मंत्रमुग्ध कर रही है।
दर्शन व्यवस्था में व्यापक सुधार और सुगमता
मां विंध्यवासिनी के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचे श्रद्धालु बबलू वर्मा ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि पहले की तुलना में पूरा धाम पूरी तरह से बदल चुका है। अब परिसर की सुंदरता अत्यधिक बढ़ गई है और दीवारों व खंभों पर की गई पेंटिंग बेहद विशिष्ट दिखती है। पुराने समय में यहां दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं को भारी भीड़ और अव्यवस्था के कारण कई प्रकार की परेशानियों से जूझना पड़ता था। पूजा अर्चना और दर्शन के दौरान काफी बाधाएं आती थीं। कॉरिडोर के अस्तित्व में आने के बाद से दर्शन और पूजन की पूरी प्रक्रिया बेहद सुगम हो गई है। श्रद्धालु अब बहुत कम समय में बिना किसी परेशानी के दर्शन कर पा रहे हैं। इसके अलावा दर्शन के नाम पर किसी को भी कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं चुकाना पड़ता है, जिससे सभी तीर्थयात्री प्रसन्न हैं।
श्रद्धालुओं को सुगम परिक्रमा और पारदर्शी दर्शन का लाभ
धाम में पहुंचे एक अन्य दर्शनार्थी मनीष ने बताया कि वह लगभग एक वर्ष पूर्व भी यहां आए थे, लेकिन उस समय मंदिर परिसर इतना भव्य और व्यवस्थित नहीं दिखता था। वर्तमान समय में मां के धाम की दिव्यता कई गुना बढ़ चुकी है और समूचा क्षेत्र पूरी तरह नए कलेवर में दिखाई दे रहा है। नए कॉरिडोर के निर्माण के बाद से आम लोगों के लिए व्यवस्था काफी आसान और सरल हो चुकी है। अब किसी भी तीर्थयात्री को दर्शन कराने के नाम पर किसी पुरोहित या पंडा को एक भी रुपया देने की जरूरत नहीं पड़ती है। कतारबद्ध और व्यवस्थित तरीके से सभी भक्त शांतिपूर्ण ढंग से पूजा संपन्न कर लेते हैं। विंध्यवासिनी धाम का नवनिर्मित परिक्रमा पथ विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, जहां चलने पर श्रद्धालु पूरी तरह भक्ति भाव में लीन हो जाते हैं।



















