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नासिक और त्र्यंबकेश्वर में 31 अक्टूबर को होगा सिंहस्थ महाकुंभ का ध्वजारोहण, इस बार 21 महीने चलेगा धार्मिक समागमधर्म
20 सित॰ 2026, 8:18 am (11 दिन पहले)· 1

नासिक और त्र्यंबकेश्वर में 31 अक्टूबर को होगा सिंहस्थ महाकुंभ का ध्वजारोहण, इस बार 21 महीने चलेगा धार्मिक समागम

नासिक और त्र्यंबकेश्वर में 31 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजकर 2 मिनट पर एक साथ ध्वजारोहण के साथ सिंहस्थ महाकुंभ का औपचारिक आगाज होगा, जो 24 जुलाई 2028 तक चलेगा।

नासिक और त्र्यंबकेश्वर में आयोजित होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ के औपचारिक शुभारंभ को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियाँ तेज हो गई हैं। आगामी 31 अक्टूबर को आयोजित होने वाले ऐतिहासिक ध्वजारोहण कार्यक्रम की रूपरेखा तय करने के उद्देश्य से नासिक में कुंभ मेला प्रशासन और कुंभ मेला प्राधिकरण की एक उच्चस्तरीय बैठक संपन्न हुई। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता जिले के पालकमंत्री एवं कुंभ मेला मंत्री गिरीश महाजन ने की। विचार-विमर्श के दौरान विभिन्न अखाड़ों के प्रतिनिधि, साधु-संत, महंत और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। इस दौरान ध्वजारोहण से जुड़े तमाम आयोजनों को सनातन धर्म की प्राचीन परंपराओं के अनुसार भव्य, दिव्य और पूरी तरह सुव्यवस्थित बनाने पर विस्तृत चर्चा की गई।

सनातन परंपरा में कुंभ मेले को विश्व का सबसे विशाल और पवित्र आध्यात्मिक समागम माना जाता है। ज्योतिषीय गणनाओं और विशेष खगोलीय संयोगों के आधार पर यह महापर्व देश के चार प्रमुख तीर्थ क्षेत्रों प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में चक्रानुक्रम से आयोजित किया जाता है। प्रत्येक स्थान पर होने वाले इस पर्व का अपना अलग धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व जुड़ा हुआ है।

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रामकुंड और कुशावर्त कुंड पर एक साथ होगा ध्वजारोहण

सिंहस्थ महाकुंभ के विधिवत आरंभ के लिए दो प्रमुख आध्यात्मिक स्थलों का चयन किया गया है। पहला ध्वजारोहण नासिक स्थित पवित्र रामकुंड घाट पर संपन्न किया जाएगा, जबकि दूसरा ध्वजारोहण त्र्यंबकेश्वर में कुशावर्त कुंड और त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर परिसर से सटे धार्मिक क्षेत्र में होगा। पालकमंत्री गिरीश महाजन के अनुसार, 31 अक्टूबर को दोपहर ठीक 12 बजकर 2 मिनट पर दोनों स्थानों पर एक ही समय पर ध्वजारोहण किया जाएगा।

प्रशासनिक योजना के अनुसार, दोनों तीर्थ स्थलों पर एक साथ होने वाला यह आयोजन सिंहस्थ महाकुंभ के औपचारिक शुभारंभ का सबसे निर्णायक चरण साबित होगा। योजना के तहत एक प्रमुख स्थल पर देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के करकमलों से ध्वजारोहण संपन्न कराने की तैयारी है। वहीं दूसरे स्थल पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की गरिमामयी उपस्थिति में ध्वजारोहण का विधान पूरा किया जाएगा। इस खास मौके पर केंद्र और राज्य सरकार के कई वरिष्ठ नेता तथा जनप्रतिष्ठाएं भी उपस्थित रहेंगी।

21 महीने तक चलेगा सिंहस्थ महापर्व, हर्षवर्धन काल से जुड़ी परंपरा

आमतौर पर कुंभ मेलों की अवधि कुछ महीनों की होती है, परंतु इस बार नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेला पूरे 21 महीने तक आयोजित किया जाएगा। इस धार्मिक आयोजन की विधिवत शुरुआत 31 अक्टूबर 2026 को ध्वजारोहण के साथ होगी और इसका औपचारिक समापन 24 जुलाई 2028 को होगा। लगभग दो वर्षों तक चलने वाले इस दीर्घकालिक महापर्व की ऐतिहासिक जड़ें काफी प्राचीन हैं।

इतिहास के अनुसार, यहाँ राजा हर्षवर्धन के शासनकाल से ही इस प्रकार के भव्य सिंहस्थ कुंभ के आयोजन की परंपरा अनवरत चली आ रही है। ज्योतिषीय नियमों के अनुसार, जब देवगुरु बृहस्पति यानी गुरु ग्रह सिंह राशि में गोचर करते हैं, तब इस पावन सिंहस्थ कुंभ का आयोजन होता है। इसी खगोलीय घटना के कारण इसे सिंहस्थ नाम दिया गया है, जबकि अन्य कुंभ स्थलों को सिंहस्थ नहीं कहा जाता है।

सिंहस्थ की पौराणिक कथा और उज्जैन की महत्ता

धार्मिक मान्यताओं में सिंहस्थ कुंभ को हिंदू धर्म के सबसे प्रमुख आध्यात्मिक पर्वों में गिना जाता है। पौराणिक आख्यानों के अनुसार, प्राचीन काल में हुए समुद्र मंथन के दौरान जब अमृत कलश प्रकट हुआ, तो देवताओं और दैत्यों के बीच उसे पाने के लिए भीषण संघर्ष छिड़ गया था। मान्यता है कि उस संघर्ष के दौरान अमृत की पावन बूंदें जिन चुनिंदा स्थानों पर गिरी थीं, उनमें मध्य प्रदेश के उज्जैन की पावन भूमि भी शामिल है। उज्जैन में सिंहस्थ का मुख्य आयोजन पवित्र क्षिप्रा नदी के तट पर होता है, जहां महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की उपस्थिति इस पर्व की महिमा को कई गुना बढ़ा देती है।

नासिक और त्र्यंबकेश्वर में आयोजित होने वाले सिंहस्थ मेले के दौरान भी देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु, विभिन्न अखाड़ों के साधु-संत और महामंडलेश्वर पधारेंगे। मेले की पूरी कालावधि में संत-महात्माओं के प्रवचन, धार्मिक अनुष्ठान, दर्शन और विविध आध्यात्मिक कार्यक्रम निरंतर चलेंगे। इस दौरान नदियों के पवित्र जल में आस्था की डुबकी लगाना और पूजा-अर्चना करना मोक्षदायी माना जाता है।

शाही स्नान और अमृत स्नान की प्रमुख तिथियां

कुंभ मेले के दौरान अखाड़ों के साधु-संतों का पारंपरिक शाही स्नान और श्रद्धालुओं के लिए अमृत स्नान मुख्य आकर्षण का केंद्र होते हैं। सिंहस्थ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन संस्कृति, अखाड़ा परंपरा और विविध आध्यात्मिक धाराओं का एक अनूठा संगम है।

नासिक कुंभ मेला 2027 के लिए घोषित प्रमुख स्नान तिथियां इस प्रकार निर्धारित की गई हैं

  • दूसरा अमृत स्नान: 31 अगस्त 2027 को आयोजित किया जाएगा।
  • तीसरा अमृत स्नान (नासिक): 11 सितंबर 2027 को रामकुंड घाट पर संपन्न होगा।
  • तीसरा अमृत स्नान (त्र्यंबकेश्वर): 12 सितंबर 2027 को कुशावर्त कुंड क्षेत्र में आयोजित किया जाएगा।

इन मुख्य तिथियों पर देश और दुनिया से लाखों श्रद्धालुओं के एकत्र होने की संभावना है, जिसके लिए प्रशासनिक व्यवस्थाओं को अभी से अंतिम रूप दिया जा रहा है।

सवाल-जवाब

नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ महाकुंभ का ध्वजारोहण कब और किस समय होगा?
सिंहस्थ महाकुंभ का ध्वजारोहण 31 अक्टूबर 2026 को दोपहर ठीक 12 बजकर 2 मिनट पर नासिक और त्र्यंबकेश्वर में एक साथ किया जाएगा।
ध्वजारोहण के लिए किन दो प्रमुख स्थानों को चुना गया है?
नासिक में रामकुंड घाट और त्र्यंबकेश्वर में कुशावर्त कुंड स्थित त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर परिसर में ध्वजारोहण संपन्न होगा।
इस बार सिंहस्थ कुंभ मेला कितने समय तक चलेगा?
यह महाकुंभ 31 अक्टूबर 2026 से शुरू होकर 24 जुलाई 2028 तक चलेगा, जिसकी कुल अवधि 21 महीने की होगी।
इस मेले को सिंहस्थ क्यों कहा जाता है?
जब देवगुरु बृहस्पति सिंह राशि में प्रवेश करते हैं, तब इस मेले का आयोजन होता है, इसी ज्योतिषीय संयोग के कारण इसे सिंहस्थ कहा जाता है।
ध्वजारोहण कार्यक्रम में कौन-से प्रमुख अतिथि शामिल होंगे?
एक स्थान पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के करकमलों से और दूसरे स्थान पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति में ध्वजारोहण की योजना है।
नासिक कुंभ मेला 2027 में अमृत स्नान की प्रमुख तिथियां कौन-सी हैं?
दूसरा अमृत स्नान 31 अगस्त 2027 को, तीसरा अमृत स्नान नासिक में 11 सितंबर 2027 को और त्र्यंबकेश्वर में 12 सितंबर 2027 को होगा।
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टिप्पणियाँ 4

Kavya Nair@kavya-nair·10 दिन पहले

यह 21 महीने लंबा आयोजन सांस्कृतिक पर्यटन और वैश्विक लाइफस्टाइल ट्रैवल के लिहाज से एक अभूतपूर्व अवसर है। राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री की उपस्थिति यह संकेत देती है कि इस बार स्थानीय आतिथ्य, होटल उद्योग और वैश्विक यात्रियों के लिए अधोसंरचना को नए स्तर पर विकसित करना होगा, जिससे क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन का एक स्थायी और सुव्यवस्थित वैश्विक मॉडल तैयार हो सके।

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·10 दिन पहले

इतने लंबे समय तक चलने वाले इस महाआयोजन से न केवल आतिथ्य और स्थानीय व्यापार को गति मिलेगी, बल्कि राज्य और केंद्र स्तर पर सुरक्षा प्रंबधों और प्रशासनिक समन्वय की भी कड़ी परीक्षा होगी। राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री की भागीदारी यह सुनिश्चित करती है कि इस वृहद धार्मिक समागम में सुचारू भीड़ नियंत्रण, परिवहन प्रबंधन और अत्याधुनिक बुनियादी ढाँचे का निर्माण शीर्ष प्राथमिकता पर रहेगा।

Divya Reddy@divya-reddy·10 दिन पहले

यह आयोजन न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है, बल्कि इतने लंबे यानी इक्कीस महीने तक चलने वाले इस महासमागम से नासिक और त्र्यंबकेश्वर के क्षेत्रीय बुनियादी ढाँचे, आतिथ्य सत्कार उद्योग और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर अभूतपूर्व सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री की उपस्थिति यह दर्शाती है कि प्रशासनिक और सुरक्षा प्रबंधन कितना व्यापक होगा, जिसके तहत छात्रों और युवाओं के लिए भी प्रबंधन व पर्यटन के क्षेत्र में व्यावहारिक सीखने के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

Tanvi Desai@tanvi-desai·10 दिन पहले

इक्कीस महीने तक चलने वाले इस वृहद आध्यात्मिक आयोजन से नासिक और त्र्यंबकेश्वर में धार्मिक पर्यटन को अभूतपूर्व वैश्विक पहचान मिलेगी। मनोरंजन, मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के इस दौर में, ऐसे विशाल सांस्कृतिक आयोजनों की लाइव स्ट्रीमिंग और डॉक्यूमेंट्री कवरेज के लिए मीडिया और प्रोडक्शन इंडस्ट्री में रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।

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