हिंदू पंचांग के अनुसार 31 अगस्त 2026 का दिन बेहद खास रहने वाला है क्योंकि इस दिन कई महत्वपूर्ण व्रत और तिथियों का संयोग बन रहा है। इस दिन भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि है, जो सुबह के समय समाप्त होकर चतुर्थी में प्रवेश करेगी। इस विशेष अवसर पर श्रद्धालुओं द्वारा कजरी तीज के साथ-साथ संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी का व्रत भी रखा जाएगा। धार्मिक दृष्टि से इस दिन का पंचांग और समय बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है, इसलिए आइए इस दिन के सभी शुभ और अशुभ समयों के बारे में विस्तार से जानते हैं ताकि किसी भी जरूरी काम या पूजा-पाठ में कोई बाधा न आए।
31 अगस्त 2026 का विस्तृत पंचांग
पंचांग की गणना के मुताबिक 31 अगस्त 2026 को भाद्रपद कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि सुबह 8 बजकर 52 मिनट तक प्रभावी रहेगी और उसके तुरंत बाद चतुर्थी तिथि का आरंभ हो जाएगा। इसके अलावा इस दिन नक्षत्रों की स्थिति भी खास है, जहाँ पूर्वा रेवती नक्षत्र 31 अगस्त 2026 को देर रात 3 बजकर 24 मिनट तक रहेगा। इसके साथ ही 29 अगस्त 2026 विशेष के तहत आज पंचक का साया भी है और इसी दिन संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी तथा कजरी तीज का व्रत एक साथ रखा जा रहा है, जो व्रतियों के लिए अत्यधिक पुण्यदायी माना जाता है।
31 अगस्त 2026 के सभी शुभ मुहूर्त
किसी भी मांगलिक कार्य, अनुष्ठान या पूजा की शुरुआत करने के लिए दिनभर में कई शुभ मुहूर्त निर्धारित किए गए हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:51 ए एम से 05:37 ए एम तक रहेगा, जबकि प्रातः सन्ध्या सुबह 05:14 ए एम से 06:23 ए एम के बीच रहेगी। दिन के समय में अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:14 पी एम से 01:04 पी एम तक और विजय मुहूर्त दोपहर 02:44 पी एम से 03:34 पी एम तक रहेगा। इसके अलावा शाम के वक्त गोधूलि मुहूर्त शाम 06:54 पी एम से 07:17 पी एम तक तथा सायाह्न सन्ध्या शाम 06:54 पी एम से 08:03 पी एम तक का समय पूजा-पाठ के लिए अत्यंत अनुकूल रहेगा।
प्रमुख शहरों में राहुकाल का समय
ज्योतिष शास्त्र में राहुकाल को अशुभ माना जाता है और इस दौरान किसी भी नए या शुभ कार्य की शुरुआत करने से बचा जाता है। 31 अगस्त 2026 को देश के अलग-अलग प्रमुख शहरों में राहुकाल का समय अलग-अलग रहेगा। दिल्ली में सुबह 07:34 से सुबह 09:10 तक, मुंबई में सुबह 07:57 से सुबह 09:31 तक और चंडीगढ़ में सुबह 07:35 से सुबह 09:11 तक राहुकाल रहेगा। इसी प्रकार लखनऊ में सुबह 07:21 से सुबह 08:56 तक, भोपाल में सुबह 07:36 से सुबह 09:11 तक, कोलकाता में सुबह 06:53 से सुबह 08:28 तक, अहमदाबाद में सुबह 07:56 से सुबह 09:30 तक और चेन्नई में सुबह 07:31 से सुबह 09:03 तक राहुकाल का समय निर्धारित किया गया है।
संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत की महिमा और नियम
संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी का व्रत प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को विधि-विधान के साथ रखा जाता है। इस बार यह व्रत सोमवार के दिन पड़ रहा है, जिसे लेकर भक्तों में विशेष उत्साह है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत रखकर भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने से जीवन के सभी प्रकार के संकट दूर हो जाते हैं और विघ्नहर्ता सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। यह व्रत सुबह से शुरू होकर शाम को चंद्रमा के दर्शन और उदय होने तक रखा जाता है। चूंकि तृतीया तिथि सोमवार को सुबह 8 बजकर 52 मिनट तक ही है और उसके बाद शुरू होने वाली चतुर्थी तिथि मंगलवार सुबह 7 बजकर 42 मिनट तक रहेगी, इसलिए चतुर्थी तिथि में चंद्रमा का उदय सोमवार को ही होगा। व्रत का पारण चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करने के बाद ही किया जाता है, यही वजह है कि संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी का व्रत सोमवार को ही मान्य होगा और इसी दिन रखा जाएगा। जानकारी के लिए बता दें कि इस दिन चंद्रोदय रात 8 बजकर 25 मिनट पर होगा। जो लोग किसी कारणवश यह व्रत नहीं रख पाते हैं, वे भगवान गणेश के इन 8 मंत्रों का जरूर करें जाप करके भी समान रूप से शुभ फलों की प्राप्ति कर सकते हैं।



















