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बिना स्क्रीन वाले फिटनेस गैजेट्स का दौर क्यों लौट रहा हैगैजेट्स
30 अग॰ 2026, 4:26 pm (59 दिन पहले)· 3

बिना स्क्रीन वाले फिटनेस गैजेट्स का दौर क्यों लौट रहा है

स्मार्टवॉच और फोन के लगातार नोटिफिकेशन्स से परेशान लोग अब स्क्रीन-फ्री वियरेबल्स की तरफ लौट रहे हैं। गार्मिन, गूगल और हूप जैसे ब्रांड्स इस नई तकनीक के जरिए डिजिटल थकान से राहत दिलाने की कोशिश कर रहे हैं।

आजकल ऐसे फिटनेस गैजेट्स की मांग तेजी से बढ़ रही है जो आपसे कम से कम ध्यान की मांग करते हैं। बाजार में गार्मिन सिरका, गूगल फिटबिट एयर, पोलर लूप, Amazfit Helio स्ट्रैप और हूप सीरीज जैसे विकल्प मौजूद हैं, जो इसी सोच पर काम करते हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, Apple भी इस दिशा में अपने उत्पादों पर विचार कर रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि लोग अब लगातार अटेंशन मांगने वाली तकनीक और सोशल मीडिया से आजिज़ आ चुके हैं और यह समझने लगे हैं कि यह उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है।

शुरुआती दिनों की यादें और फिटनेस ट्रैकर्स का सफर

जब साल 2009 के आसपास फिटनेस ट्रैकर्स मुख्यधारा में आए थे, तब से लेकर अब तक इस सेक्टर में बहुत बदलाव आ चुका है। साल 2011 का फिटबिट अल्ट्रा एक ऐसा ही ट्रैकर था जिसे जींस में क्लिप किया जाता था और लोग उसे आसानी से भूल जाते थे। हालांकि 2012 के फिटबिट जिप में कार्टून फेचेस जरूर आए थे, लेकिन इन्हें भी दिन में बमुश्किल एक या दो बार ही देखना होता था। पिछले कुछ सालों में स्थिति पूरी तरह बदल गई है और लोग दिन में दर्जनों या सैकड़ों बार अपनी स्मार्टवॉच या फिटनेस बैंड की स्क्रीन देखने लगे हैं।

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स्मार्टवॉच के लगातार नोटिफिकेशन्स से बढ़ती थकान

जब कलाई पर बंधी घड़ी पर व्हाट्सएप मैसेज और ईमेल्स के लगातार नोटिफिकेशन्स आते हैं, तो लोग अपनी मर्जी के खिलाफ बार-बार स्क्रीन देखने लगते हैं। गार्मिन जैसी घड़ियों का इस्तेमाल करते हुए सुबह-शाम के रिपोर्ट्स देखने की आदत सी बन जाती है, और सुबह उठते ही स्लीप स्कोर देखना एक आम बात हो गई है। इसके अलावा मूव अलर्ट्स जैसे फीचर्स भी अक्सर खीझ पैदा करते हैं। यही वजह है कि नए दौर के वियरेबल्स इन स्मार्टवॉचेस के बिल्कुल उलट दिशा में काम कर रहे हैं, जहां ओएलईडी स्क्रीन्स और एआई असिस्टेंट्स की भरमार है।

स्मार्टवॉच ने साल 2015 में एप्पल वॉच के आने के बाद से कोई बहुत क्रांतिकारी बदलाव नहीं देखा है, और इसके एप इकोसिस्टम भी धीरे-धीरे सिमट गए हैं। यही कारण है कि स्क्रीन-फ्री वियरेबल्स इस पूरी कैटेगरी को रीसेट करना चाहते हैं।

फिटबिट एयर और डिजाइन में कमी का फॉर्मूला

फिटबिट एयर जैसे बैंड्स के बाजार में आने की सबसे दिलचस्प बात यह है कि ऐसा ठीक साल 2026 में हो रहा है। इन वियरेबल्स में डिजाइन सबट्रैक्शन का फॉर्मूला अपनाया गया है, यानी सामान्य फिटनेस ट्रैकर की तरह इसमें हार्ट रेट सेंसर, बैटरी, एक्सेलेरोमीटर और ब्लूटूथ ट्रांसमीटर तो होते हैं, लेकिन डिस्प्ले को हटा दिया जाता है। हूप ने साल 2015 से ही स्क्रीन-फ्री वियरेबल्स बनाने शुरू कर दिए थे, हालांकि तब और अब के बाजार में काफी अंतर आ चुका है।

शुरुआत में हूप खुद को केवल एथलीटों के लिए एक परफॉरमेंस ऑप्टिमाइज़ेशन सिस्टम बताता था, लेकिन आज यह $199 के वार्षिक सब्सक्रिप्शन के साथ किसी भी आम आदमी के लिए उपलब्ध है। इसका मकसद नींद, ट्रेनिंग और सेहत को बेहतर बनाना है। हालांकि गूगल और अन्य कंपनियां भी इस लो-डिस्ट्रेक्शन कॉन्सेप्ट पर काम कर रही हैं, लेकिन इसके पीछे एआई की बड़ी भूमिका है।

एआई की भूमिका और वियरेबल्स का भविष्य

वियरेबल्स में एआई का इस्तेमाल कंपनियों के लिए कमाई का जरिया भी है और यही वो वजह है जिसकी वजह से लोग आज कम विक्षेप वाली तकनीक की तलाश में हैं। गूगल फिटबिट एयर बिना सब्सक्रिप्शन के काफी साधारण नजर आता है, लेकिन यदि आपको अपने आंकड़ों के विस्तृत विवरण चाहिए तो $10 प्रति माह का गूगल हेल्थ प्रीमियम लेना पड़ता है। नॉटिंघम यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता एलिजाबेथ मार्श के अनुसार, डिजिटल टूल्स लगातार टेक्नोस्ट्रेस, सूचनाओं की अधिकता और काम तथा घर के बीच की सीमाएं धुंधली होने जैसी समस्याओं को जन्म देते हैं।

डिजिटल काम के भारी दबाव के कारण लोग मानसिक रूप से तनाव महसूस करते हैं और कई बार तुरंत जवाब न दे पाने पर अपराधबोध से भर जाते हैं। हालांकि केवल नोटिफिकेशन्स बंद कर देना पूरी तरह से समाधान नहीं है, क्योंकि लोगों को कुछ छूट जाने का डर भी रहता है। स्क्रीन-फ्री वियरेबल्स इस समस्या का एक बेहतर विकल्प बनकर सामने आते हैं।

सवाल-जवाब

स्क्रीन-फ्री वियरेबल्स क्या होते हैं?
यह ऐसे फिटनेस ट्रैकर्स होते हैं जिनमें कोई डिस्प्ले या स्क्रीन नहीं होती है, लेकिन वे दिल की धड़कन और नींद जैसे आंकड़े ट्रैक करते हैं।
फिटबिट एयर किस कंपनी का उत्पाद है?
फिटबिट एयर गूगल का एक वियरेबल उत्पाद है जो स्क्रीन-फ्री श्रेणी के तहत आता है।
हूप बैंड की शुरुआत कब हुई थी?
हूप ने अपना पहला उत्पाद साल 2015 में लॉन्च किया था।
लोग स्क्रीन-फ्री गैजेट्स क्यों पसंद कर रहे हैं?
लोग लगातार नोटिफिकेशन्स और डिजिटल थकान से बचने के लिए इन गैजेट्स को पसंद कर रहे हैं।
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