भाद्रपद मास के समापन के साथ ही 26 सितंबर से पितृ पक्ष का आरंभ हो रहा है, जो 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के दिन संपन्न होगा। पूरे 16 दिनों तक चलने वाले इस विशेष कालखंड में लोग अपने दिवंगत पूर्वजों की आत्मा की तृप्ति के लिए श्राद्ध और तर्पण कर्म करते हैं। सनातन परंपरा में यह मान्यता गहराई से रची-बसी है कि इस अवधि के दौरान पूर्वज सूक्ष्म रूप में अपने परिजनों से मिलने धरती पर आते हैं। यही कारण है कि इस पखवाड़े में किया गया दान, जल अर्पण और पिंडदान अत्यंत फलदायी माना गया है। कई बार इस कालखंड में लोगों को सोते समय अपने मृत परिजनों के अजीबोगरीब अथवा बेचैन करने वाले स्वप्न दिखाई देते हैं, जिनका संबंध सीधे तौर पर पितरों की स्थिति और उनकी अपेक्षाओं से जोड़ा जाता है।
भूखे, प्यासे या वस्त्रहीन पितरों का स्वप्न और पितृ दोष के लक्षण
धार्मिक मान्यताओं और स्वप्न शास्त्र के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अपने मृत परिजनों को सपने में अत्यंत भूखा, प्यासा, वस्त्रहीन, अस्वस्थ अथवा गहरी पीड़ा में रोते हुए देखता है, तो इसे शुभ संकेत नहीं माना जाता। ऐसी अवस्था इस बात की ओर इशारा करती है कि दिवंगत आत्माएं अपने वंशजों के किसी आचरण या उपेक्षा से असंतुष्ट हैं। यदि ऐसे दृश्य बार-बार नींद में उभरते हैं, तो यह गंभीर पितृ दोष के सक्रिय होने का भी स्पष्ट लक्षण समझा जाता है। लोक मान्यताओं के मुताबिक, जब तक पितर तृप्त और प्रसन्न नहीं होते, तब तक परिवार के सदस्यों को जीवन में निरंतर आर्थिक तंगी, मानसिक अशांति, स्वास्थ्य संबंधी बाधाओं और पारिवारिक कलह का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए ऐसे सपनों को नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत धार्मिक समाधान अपनाना आवश्यक माना जाता है।
पितरों की तृप्ति और शांति के लिए तुरंत करें ये जरूरी कर्म
यदि रात में ऐसा कोई स्वप्न दिखाई दे जिसमें पूर्वज असहाय लग रहे हों अथवा कुछ मांगते प्रतीत हों, तो अगली ही सुबह शुद्ध होकर विशेष तर्पण क्रिया करनी चाहिए।
- सुबह नित्यकर्म और स्नान से निवृत्त होकर तांबे के किसी पात्र में स्वच्छ जल भरें। इस जल में थोड़ी मात्रा में पवित्र गंगाजल, काले तिल और कुशा घास मिलाएं। इसके बाद दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके खड़े हों और जल को अपने हाथ के अंगूठे और तर्जनी उंगली के मध्य भाग से धीरे-धीरे अर्पित करें। मान्यता है कि इस विधि से अर्पित किया गया जल सीधे पूर्वजों को शांति और शीतलता प्रदान करता है।
- दिवंगत परिजनों की स्मृति में किसी निर्धन या जरूरतमंद व्यक्ति को आदरपूर्वक भोजन कराएं। प्रयास करें कि भोजन में वही व्यंजन शामिल हों, जो आपके पूर्वजों को जीवनकाल में विशेष रूप से प्रिय थे। इसके साथ ही यथाशक्ति वस्त्र अथवा अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करें।
- यदि स्वप्न में पितर अत्यधिक क्रोधित अथवा रुष्ट नजर आए हों, तो तर्पण के समय मन ही मन उनसे अपनी ज्ञात अथवा अज्ञात भूलों के लिए सच्चे हृदय से क्षमा मांगें।
- सोलह दिनों के इस काल में श्राद्ध तिथि पर विधिवत कर्मकांड करें और इसके उपरांत भी प्रत्येक माह पड़ने वाली अमावस्या के दिन पितरों के नाम पर अन्न तथा जल का दान निरंतर जारी रखें।
सिर पर हाथ फेरना और आशीर्वाद देना लाता है शुभ फल
स्वप्न में हर दृश्य अशुभ ही नहीं होता, बल्कि कुछ स्थितियां अत्यंत मंगलकारी मानी जाती हैं। यदि सपने में कोई पूर्वज प्रसन्न मुद्रा में दिखाई दें, आपके सिर पर स्नेहपूर्वक हाथ फेर रहे हों या आशीर्वाद की मुद्रा में हों, तो यह अत्यंत सकारात्मक संकेत है। शास्त्रों के अनुसार ऐसा सपना दर्शाता है कि पूर्वज आपके सेवा भाव और तर्पण से संतुष्ट हैं। इस प्रकार का आशीर्वाद जीवन में चल रहे किसी पुराने संकट, रोग या लंबे समय से अटके कार्यों के समाप्त होने तथा सुखद समय के आरंभ की सूचना देता है।



















