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पुरी श्री जगन्नाथ मंदिर के पास ₹1912 करोड़ की बैंक जमा राशि, देश भर में 60,821 एकड़ जमीन दर्जधर्म
3 सित॰ 2026, 5:18 pm (27 दिन पहले)· 0

पुरी श्री जगन्नाथ मंदिर के पास ₹1912 करोड़ की बैंक जमा राशि, देश भर में 60,821 एकड़ जमीन दर्ज

श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने संपत्ति का विवरण जारी करते हुए खुलासा किया है कि मंदिर के पास विभिन्न बैंकों में ₹1912 करोड़ जमा हैं और देश के कई राज्यों में 60,821 एकड़ जमीन फैली हुई है।

ओडिशा स्थित प्रसिद्ध पुरी श्री जगन्नाथ मंदिर की कुल वित्तीय संपत्ति और भू-संपदा को लेकर महत्वपूर्ण ब्यौरा सामने आया है। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) द्वारा साझा की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, मंदिर के बैंक खातों में कुल मिलाकर लगभग 1,912 करोड़ रुपये (सटीक आंकड़ा 1,911.80 करोड़ रुपये) जमा हैं। इसके अलावा, मंदिर के नाम पर देश भर में कुल 60,821 एकड़ जमीन पंजीकृत है। इस विशाल जमा राशि और भू-संपत्ति के साथ-साथ मंदिर के ऐतिहासिक 'रत्न भंडार' में सोने तथा हीर-जवाहरात के अमूल्य आभूषण भी कड़ी सुरक्षा के बीच सुरक्षित रखे गए हैं।

बैंक खातों में जमा राशि का विस्तृत विवरण

मंदिर प्रशासन द्वारा जारी वित्तीय आंकड़ों के मुताबिक, 31 अगस्त तक तीन प्रमुख योजनाओं के अंतर्गत फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में 1,811.10 करोड़ रुपये की राशि रखी गई थी। इस सावधि जमा राशि में से 1,311.10 करोड़ रुपये देश के विभिन्न सरकारी बैंकों में जमा कराए गए हैं। इसके अतिरिक्त, शेष 500 करोड़ रुपये की राशि ओडिशा सरकार द्वारा प्रदान की गई एक अक्षय निधि (कॉर्पस फंड) के रूप में उपलब्ध कराई गई है, जिसे मंदिर के लाभ-हानि खाते में व्यवस्थित रूप से रखा गया है।

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केवल फिक्स्ड डिपॉजिट ही नहीं, बल्कि दैनिक लेनदेन और तरलता बनाए रखने के लिए 31 अगस्त तक मंदिर के विभिन्न बचत खातों, चालू खातों और फ्लेक्सी खातों (जो बचत खाते और सावधि जमा का मिला-जुला रूप होते हैं) में 100.71 करोड़ रुपये की तरल राशि उपलब्ध थी। इस तरह फिक्स्ड डिपॉजिट और विभिन्न चालू व बचत खातों की राशि मिलाकर कुल बैंक जमा लगभग 1,911.80 करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है।

कमाई के प्रमुख साधन और वित्तीय प्रबंधन

मंदिर प्रशासन ने अपनी आय के विविध स्रोतों पर प्रकाश डालते हुए बताया है कि मंदिर की कमाई मुख्य रूप से दुनिया भर से आने वाले श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले दान और चढ़ावे से होती है। इसके अलावा, मंदिर के स्वामित्व वाली खदानों से होने वाली आय, बैंक सावधि जमा पर मिलने वाला नियमित ब्याज, जमीन की खरीद-बिक्री से प्राप्त राजस्व और समय-समय पर मिलने वाले सरकारी अनुदान इसकी कुल आय के मुख्य आधार हैं।

श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी ने वित्तीय प्रबंधन की प्रक्रिया स्पष्ट करते हुए कहा कि कुल आय का एक तय हिस्सा अक्षय निधि के रूप में फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश किया जाता है, जबकि दूसरा हिस्सा स्थापना कोष (एस्टैब्लिशमेंट फंड) के रूप में सावधि जमा में रखा जाता है। इन फंडों के अलावा बची हुई शेष आय को सीधे मंदिर के मुख्य कोष में स्थानांतरित कर दिया जाता है। अरविंद पाढ़ी ने जानकारी दी कि मंदिर के दैनिक धार्मिक अनुष्ठानों और प्रशासनिक व्यवस्था के सभी रोजमर्रा के खर्च इसी मंदिर कोष से पूरे किए जाते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता मंदिर की सभी चल और अचल संपत्तियों का पारदर्शी एवं सुरक्षित रखरखाव करना है।

देश भर में फैली भू-संपदा और 48 साल बाद रत्न भंडार का ऑडिट

भू-संपत्ति के मामले में मंदिर की सीमाएं व्यापक हैं। मंदिर के नाम पर देश भर में कुल 60,821 एकड़ जमीन दर्ज है। इस विशाल भू-भाग का सबसे बड़ा हिस्सा यानी 60,426 एकड़ जमीन अकेले ओडिशा के 24 अलग-अलग जिलों में फैली हुई है। इसके अतिरिक्त, 395 एकड़ जमीन पश्चिम बंगाल समेत देश के छह अन्य राज्यों में स्थित है, जिसका प्रबंधन मंदिर प्रशासन द्वारा किया जाता है।

वित्तीय खातों और जमीन के साथ-साथ श्री जगन्नाथ मंदिर का प्रसिद्ध 'रत्न भंडार' भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। अधिकारियों के अनुसार, रत्न भंडार में रखे गए सोने, हीरे और अन्य बहुमूल्य रत्नों की सूची तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। यह सूचीकरण का कार्य पूरे 48 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद अत्यधिक कड़े सुरक्षा घेरे में आयोजित किया जा रहा है, ताकि मंदिर के सभी ऐतिहासिक खजाने का पारदर्शी हिसाब रखा जा सके।

सवाल-जवाब

पुरी जगन्नाथ मंदिर के बैंक खातों में कुल कितनी राशि जमा है?
31 अगस्त तक मंदिर के विभिन्न बैंक खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट में कुल मिलाकर लगभग 1,911.80 करोड़ रुपये जमा हैं।
मंदिर के फिक्स्ड डिपॉजिट में कितनी रकम रखी गई है?
तीन योजनाओं के तहत कुल 1,811.10 करोड़ रुपये फिक्स्ड डिपॉजिट में हैं, जिसमें से 1,311.10 करोड़ रुपये सरकारी बैंकों में और 500 करोड़ रुपये ओडिशा सरकार के कॉर्पस फंड में जमा हैं।
श्री जगन्नाथ मंदिर के नाम देश भर में कितनी जमीन पंजीकृत है?
मंदिर के नाम कुल 60,821 एकड़ जमीन दर्ज है, जिसमें 60,426 एकड़ ओडिशा में और 395 एकड़ पश्चिम बंगाल समेत अन्य 6 राज्यों में स्थित है।
मंदिर की मुख्य कमाई किन स्रोतों से होती है?
मंदिर की आय श्रद्धालुओं के दान, खदानों की नीलामी, फिक्स्ड डिपॉजिट के ब्याज, भूमि सौदों और सरकारी अनुदान से प्राप्त होती है।
रत्न भंडार का इन्वेंट्री कार्य कितने वर्षों बाद किया जा रहा है?
रत्न भंडार में रखे सोने और हीरे-जवाहरात के आभूषणों का इन्वेंट्री और ऑडिट कार्य 48 वर्षों के अंतराल के बाद किया जा रहा है।
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