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रक्षाबंधन 2026 पर रहेगा अग्नि पंचक का साया, जानिए राखी बांधने के नियम और वर्जित कार्यधर्म
25 अग॰ 2026, 4:20 pm (36 दिन पहले)· 1

रक्षाबंधन 2026 पर रहेगा अग्नि पंचक का साया, जानिए राखी बांधने के नियम और वर्जित कार्य

इस साल रक्षाबंधन के पावन पर्व पर अग्नि पंचक का साया रहेगा। आइए जानते हैं कि इस दौरान राखी बांधना कितना उचित है और किन कार्यों को करने से परहेज करना चाहिए।

रक्षाबंधन का यह पावन त्योहार भाई और बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और एक-दूसरे की रक्षा के संकल्प का प्रतीक है। इस साल जब 28 अगस्त को बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधने की तैयारी कर रही होंगी, ठीक उसी समय ज्योतिषीय गणना के अनुसार पंचक का साया भी चल रहा होगा। सनातन धर्म और ज्योतिषीय मान्यताओं में पंचक के दौरान कुछ विशेष कार्यों को करने की मनाही होती है। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या पंचक काल में राखी बांधी जा सकती है और इस दौरान कौन-कौन से ऐसे काम हैं जिनसे बचना बेहद जरूरी है।

कब से शुरू होगा पंचक?

पंचांग के मुताबिक, पंचक की शुरुआत 27 अगस्त 2026, गुरुवार को दोपहर 1 बजकर 35 मिनट पर होगी। इसका समापन 1 सितंबर 2026, मंगलवार को सुबह 3 बजकर 23 मिनट पर होगा। इस तरह रक्षाबंधन का मुख्य पर्व यानी 28 अगस्त का पूरा दिन पंचक की अवधि के भीतर ही आएगा, जिसके चलते भाई की कलाई पर सजने वाली राखी इस बार पंचक के प्रभाव के साये में बांधी जाएगी।

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अग्नि पंचक क्या है?

धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों के खास संयोग को पंचक कहा जाता है। इन पांच दिनों के दौरान चंद्रमा का गोचर कुंभ और मीन राशि में रहता है। ज्योतिष शास्त्र के जानकारों के अनुसार, पंचक काल में किए गए कुछ खास कार्यों का अशुभ फल मिल सकता है, इसलिए इन दिनों लोगों को बहुत अधिक सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

खासतौर पर जब पंचक की शुरुआत मंगलवार या गुरुवार के दिन होती है, तो इसे अग्नि पंचक के नाम से जाना जाता है। इस विशेष अवधि के दौरान नया निर्माण कार्य शुरू करने, नई मशीनरी खरीदने और लोहे या औजारों से जुड़े किसी भी प्रकार के काम को टाल देने का विधान है। हालांकि, इसका यह बिल्कुल भी मतलब नहीं है कि इन पांच दिनों में संसार के सभी कार्य पूरी तरह से थम जाते हैं। अदालती मामलों से जुड़े फैसले, आपसी विवाद या मुकदमेबाजी को सुलझाने के लिए इस समय का उपयोग किया जा सकता है।

क्या राखी बांध सकते हैं?

रक्षाबंधन का पर्व पूरी तरह से भाई-बहन के पवित्र प्रेम और रक्षा के संकल्प पर आधारित एक मांगलिक उत्सव है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार पंचक के दौरान हर कार्य पर रोक नहीं होती है। यही वजह है कि रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने की प्राचीन परंपरा को पंचक काल के सामान्य निषेधों और वर्जनाओं से बिल्कुल अलग और स्वतंत्र माना गया है। इसलिए बहनों को बिना किसी संकोच या भय के भाई की कलाई पर राखी बांधनी चाहिए।

पंचक में किन कामों से बचें?

ज्योतिषीय नियमों के अनुसार पंचक काल में दक्षिण दिशा की तरफ यात्रा करने से विशेष रूप से बचने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा धनिष्ठा नक्षत्र के प्रभाव वाले दिनों में लकड़ी, घास या किसी भी प्रकार की ज्वलनशील वस्तुओं को घर में इकट्ठा करने से भी परहेज करना चाहिए। इस पूरी अवधि के दौरान नया पलंग या चारपाई बनवाने, मकान की छत डलवाने या लेंटर रखवाने जैसे महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों को भी पूरी तरह से वर्जित माना गया है.

खरीदारी में बरतनी होगी सावधानी

पंचक के इन पांच दिनों के भीतर लकड़ी, लोहा, नई चारपाई और नए वस्त्रों की खरीदारी करना भी अशुभ माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इस विशेष कालखंड में यदि इस तरह की वस्तुएं खरीदी जाएं, तो भविष्य में आर्थिक नुकसान या अन्य प्रकार के अशुभ परिणाम झेलने पड़ सकते हैं। इसलिए खरीदारी के मामले में भी लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता होती है।

ये काम भी रहते हैं वर्जित

पंचक के दौरान विवाह संस्कार, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे बड़े और मांगलिक आयोजनों को भी आगे बढ़ाने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा किसी की मृत्यु होने पर शव के अंतिम संस्कार को संपन्न करने को लेकर भी पंचक काल में विशेष शांति कर्म और विधान बताए गए हैं, जिनका पूरी विधि-विधान से पालन किया जाना आवश्यक माना जाता है।

सवाल-जवाब

रक्षाबंधन 2026 किस तारीख को मनाया जाएगा?
इस साल रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा।
वर्ष 2026 में पंचक की अवधि कब से कब तक रहेगी?
पंचक 27 अगस्त 2026 को दोपहर 1 बजकर 35 मिनट से शुरू होकर 1 सितंबर 2026 को सुबह 3 बजकर 23 मिनट तक रहेगा।
क्या पंचक के साये में भाई को राखी बांधी जा सकती है?
हाँ, रक्षाबंधन पर राखी बांधने की परंपरा को पंचक के सामान्य निषेधों से अलग माना गया है, इसलिए बहनें बिना किसी संकोच के राखी बांध सकती हैं।
अग्नि पंचक किसे कहा जाता है?
जब पंचक की शुरुआत मंगलवार या गुरुवार के दिन होती है, तो उसे अग्नि पंचक कहा जाता है।
पंचक के दौरान किन मुख्य कार्यों से बचना चाहिए?
पंचक के दौरान दक्षिण दिशा की यात्रा, नया निर्माण, लकड़ी या लोहे की खरीदारी और छत डलवाने जैसे कार्य वर्जित माने जाते हैं।
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