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श्री कृष्ण की लीला से जुड़ी गोवर्धन पर्वत की 21 किलोमीटर परिक्रमा का पौराणिक महत्व और नियमधर्म
6 अग॰ 2026, 12:32 pm (55 दिन पहले)· 0

श्री कृष्ण की लीला से जुड़ी गोवर्धन पर्वत की 21 किलोमीटर परिक्रमा का पौराणिक महत्व और नियम

मथुरा के ब्रज क्षेत्र में गोवर्धन पर्वत की 21 किलोमीटर की परिक्रमा का विशेष धार्मिक महत्व है, जो भगवान श्री कृष्ण द्वारा इंद्र के अभिमान को शांत करने और ब्रजवासियों को बाढ़ से बचाने की पौराणिक कथा से जुड़ी है।

उत्तर प्रदेश के मथुरा स्थित ब्रज क्षेत्र में भगवान श्री कृष्ण की कई अलौकिक लीलाओं की यादें बसी हुई हैं। इन्हीं लीलाओं में सबसे प्रमुख गोवर्धन पर्वत की पूजा और उसकी परिक्रमा की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गोवर्धन पर्वत की 21 किलोमीटर लंबी परिक्रमा करने से श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। भक्त अपनी श्रद्धा और क्षमता के हिसाब से पैदल, वाहन से या फिर अत्यंत कठिन मानी जाने वाली दंडवत प्रणाम करते हुए यह यात्रा संपन्न करते हैं।

भगवान श्री कृष्ण और गोवर्धन पर्वत की पौराणिक कथा

गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा शुरू होने के पीछे एक बेहद रोचक पौराणिक प्रसंग जुड़ा हुआ है। जब बाल रूप में भगवान श्री कृष्ण गायें चराकर नंदभवन वापस लौटे, तो उन्होंने अपनी माता यशोदा और गांव वालों को देवराज इंद्र की पूजा की भव्य तैयारियां करते देखा। माता यशोदा ने उन्हें समझाया कि इंद्र देव वर्षा कराते हैं, जिससे फसलों की पैदावार होती है और गायों को हरा-भरा चारा प्राप्त होता है। इस पर श्री कृष्ण ने एक नया विचार सामने रखा।

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श्री कृष्ण ने अपनी माता से कहा कि देवराज इंद्र तो कभी प्रत्यक्ष दर्शन नहीं देते, जबकि गोवर्धन पर्वत पर ही हमारी गायें चरती हैं और हमें जीवनदायिनी औषधियां तथा जल संसाधन मिलते हैं। इसलिए हम सभी को इंद्र के बजाय गोवर्धन पर्वत की ही पूजा और अर्चना करनी चाहिए। ब्रजवासियों ने श्री कृष्ण की बात मानकर गोवर्धन पर्वत का पूजन शुरू कर दिया, जिससे देवराज इंद्र अत्यंत क्रोधित हो उठे।

इंद्र का प्रकोप और गोवर्धन पर्वत का उठना

अपनी अवहेलना से नाराज होकर देवराज इंद्र ने ब्रज क्षेत्र में भीषण बारिश और तूफानी वर्षा का आदेश दे दिया। लगातार कई घंटों तक मूसलाधार बारिश होती रही, जिससे पूरे ब्रज में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई और लोगों का जीवन संकट में पड़ गया। ब्रजवासियों को इस भयानक आपदा से बचाने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने अपनी कनिष्ठा उंगली पर विशाल गोवर्धन पर्वत को उठा लिया।

सभी ब्रजवासियों और उनके पशुओं ने गोवर्धन पर्वत की छत्रछाया में शरण ली और सुरक्षित रहे। जब घंटों की निरंतर कोशिशों के बाद भी ब्रज का कोई नुकसान नहीं हुआ, तो देवराज इंद्र को भगवान श्री कृष्ण की दिव्य शक्ति का अहसास हुआ और उनका अहंकार पूरी तरह शांत हो गया। बारिश थमने के बाद श्री कृष्ण ने सभी ब्रजवासियों के साथ मिलकर गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा की, और तभी से इस पवित्र परिक्रमा की परंपरा की शुरुआत हुई।

21 किलोमीटर परिक्रमा के तरीके और लगने वाला समय

गोवर्धन पर्वत की कुल 21 किलोमीटर की परिक्रमा को पूरा करने के लिए श्रद्धालु अलग-अलग माध्यमों का चयन करते हैं। सामान्य रूप से पैदल चलकर इस यात्रा को पूरा करने में लगभग 4 घंटे का समय लगता है। जो श्रद्धालु गाड़ियों या वाहनों के जरिए परिक्रमा करते हैं, वे इसे करीब 1 घंटे में संपन्न कर लेते हैं। हालांकि, श्रद्धालुओं का एक वर्ग ऐसा भी है जो परम भक्ति भाव के साथ दंडवत परिक्रमा करता है।

दंडवत परिक्रमा बेहद कठिन और धैर्य की परीक्षा लेने वाली होती है। इसमें श्रद्धालु जमीन पर लेटकर पूरी लंबाई को नापते हुए आगे बढ़ते हैं। इस कठिन विधि से 21 किलोमीटर की यात्रा पूरी करने में श्रद्धालुओं को करीब 7 दिन का समय लग जाता है। मान्यता है कि जो भक्त सच्चे निष्ठा भाव से दंडवत परिक्रमा पूरी करता है, उसकी हर इच्छा अवश्य पूर्ण होती है।

लक्ष्मी नारायण मंदिर और छोटी परिक्रमा का महत्व

गोवर्धन परिक्रमा के अंतर्गत छोटी परिक्रमा का अपना एक अलग और विशेष स्थान है। यह छोटी परिक्रमा प्रसिद्ध लक्ष्मी नारायण मंदिर से प्रारंभ होती है। इस मंदिर को लेकर श्रद्धालुओं में अगाध आस्था है और इसे स्वयं भगवान श्री कृष्ण का ही एक स्वरूप माना जाता है। जो भी श्रद्धालु इस पवित्र मंदिर से अपनी यात्रा का शुभारंभ करता है, उसकी मनोकामनाएं सिद्ध होती हैं।

सवाल-जवाब

गोवर्धन परिक्रमा की कुल लंबाई कितनी है?
गोवर्धन पर्वत की कुल परिक्रमा 21 किलोमीटर की होती है।
पैदल और दंडवत परिक्रमा करने में कितना समय लगता है?
पैदल परिक्रमा में लगभग 4 घंटे का समय लगता है, जबकि लेटकर दंडवत परिक्रमा पूरी करने में करीब 7 दिन का समय लगता है।
भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत क्यों उठाया था?
देवराज इंद्र के कोप से उत्पन्न मूसलाधार बारिश और बाढ़ से ब्रजवासियों तथा पशुओं की रक्षा करने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को उठाया था।
गोवर्धन की छोटी परिक्रमा कहां से शुरू होती है?
गोवर्धन की छोटी परिक्रमा लक्ष्मी नारायण मंदिर से शुरू होती है, जिसे भगवान श्री कृष्ण का ही अवतार माना जाता है।
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