12 जुलाई 2026, रविवार को उज्जैन के प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में ब्रह्म मुहूर्त के दौरान भस्म आरती का भव्य आयोजन किया गया। मंदिर के पट खुलते ही पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में विराजमान देवताओं की प्रतिमाओं का विधि-विधान से पूजन किया। इस प्रक्रिया में बाबा महाकाल का जलाभिषेक करने के बाद दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से विशेष पूजा की गई। अनुष्ठान की शुरुआत प्रथम घंटाल बजाकर और हरि ओम का जल अर्पित करने के साथ हुई।
बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार और पूजन
भस्म आरती के विशेष अवसर पर श्री महाकालेश्वर को रजत ॐ बिल्वपत्र, मुकुट और रुद्राक्ष की मालाओं से सजाया गया। भगवान के मस्तक पर त्रिपुंड लगाया गया और उन्हें डमरू, त्रिशूल और शेषनाग का रजत मुकुट पहनाकर दिव्य रूप दिया गया। इसके अलावा, सुगंधित फूलों की माला और रजत मुंडमाल भी बाबा को अर्पित की गई। मंदिर के पुजारियों ने भगवान गणेश, कार्तिकेय और माता पार्वती का भी पूजन किया। अंत में, फलों और मिठाइयों का भोग लगाकर कपूर आरती संपन्न की गई, जिसके बाद पवित्र भस्म से महाकाल का अभिषेक किया गया।
निराकार से साकार रूप के दर्शन
भस्म आरती का समय शिव भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इस दौरान निराकार से साकार रूप में महाकाल के दर्शन होते हैं। पूरे मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ और जयकारों की गूंज से भक्तिमय वातावरण बना रहता है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु इस आरती में शामिल होकर अपने परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं।
पंजीकरण नियमों में बदलाव
मंदिर प्रशासन ने पारदर्शिता और श्रद्धालुओं की सुविधा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भस्म आरती के पंजीकरण नियमों में संशोधन किया है। नई व्यवस्था के तहत, अब कोई भी श्रद्धालु अपने एक मोबाइल नंबर का उपयोग करके तीन महीने की अवधि में केवल एक बार ही भस्म आरती के लिए पंजीकरण कर सकेगा। यह कदम भीड़ को नियंत्रित करने और अधिक से अधिक भक्तों को दर्शन का अवसर प्रदान करने के लिए उठाया गया है।











