श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती: बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन और नई पंजीकरण व्यवस्थाधर्म
3 घंटे पहले· 2

श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती: बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन और नई पंजीकरण व्यवस्था

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में ब्रह्म मुहूर्त में भस्म आरती का आयोजन हुआ, जिसमें बाबा का भव्य श्रृंगार किया गया। साथ ही, मंदिर प्रशासन ने भस्म आरती में शामिल होने के लिए पंजीकरण नियमों में बड़ा बदलाव किया है।

12 जुलाई 2026, रविवार को उज्जैन के प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में ब्रह्म मुहूर्त के दौरान भस्म आरती का भव्य आयोजन किया गया। मंदिर के पट खुलते ही पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में विराजमान देवताओं की प्रतिमाओं का विधि-विधान से पूजन किया। इस प्रक्रिया में बाबा महाकाल का जलाभिषेक करने के बाद दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से विशेष पूजा की गई। अनुष्ठान की शुरुआत प्रथम घंटाल बजाकर और हरि ओम का जल अर्पित करने के साथ हुई।

बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार और पूजन

भस्म आरती के विशेष अवसर पर श्री महाकालेश्वर को रजत ॐ बिल्वपत्र, मुकुट और रुद्राक्ष की मालाओं से सजाया गया। भगवान के मस्तक पर त्रिपुंड लगाया गया और उन्हें डमरू, त्रिशूल और शेषनाग का रजत मुकुट पहनाकर दिव्य रूप दिया गया। इसके अलावा, सुगंधित फूलों की माला और रजत मुंडमाल भी बाबा को अर्पित की गई। मंदिर के पुजारियों ने भगवान गणेश, कार्तिकेय और माता पार्वती का भी पूजन किया। अंत में, फलों और मिठाइयों का भोग लगाकर कपूर आरती संपन्न की गई, जिसके बाद पवित्र भस्म से महाकाल का अभिषेक किया गया।

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निराकार से साकार रूप के दर्शन

भस्म आरती का समय शिव भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इस दौरान निराकार से साकार रूप में महाकाल के दर्शन होते हैं। पूरे मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ और जयकारों की गूंज से भक्तिमय वातावरण बना रहता है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु इस आरती में शामिल होकर अपने परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं।

पंजीकरण नियमों में बदलाव

मंदिर प्रशासन ने पारदर्शिता और श्रद्धालुओं की सुविधा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भस्म आरती के पंजीकरण नियमों में संशोधन किया है। नई व्यवस्था के तहत, अब कोई भी श्रद्धालु अपने एक मोबाइल नंबर का उपयोग करके तीन महीने की अवधि में केवल एक बार ही भस्म आरती के लिए पंजीकरण कर सकेगा। यह कदम भीड़ को नियंत्रित करने और अधिक से अधिक भक्तों को दर्शन का अवसर प्रदान करने के लिए उठाया गया है।

सवाल-जवाब

भस्म आरती कब आयोजित की गई?
भस्म आरती 12 जुलाई 2026, दिन रविवार को ब्रह्म मुहूर्त में आयोजित की गई।
भस्म आरती में कौन-कौन से पूजन अनुष्ठान किए गए?
इसमें बाबा महाकाल का जलाभिषेक, पंचामृत स्नान, श्रृंगार, कपूर आरती और अंत में पवित्र भस्म अर्पण शामिल था।
पंजीकरण के नियमों में क्या बदलाव आया है?
अब कोई भी श्रद्धालु अपने एक मोबाइल नंबर से तीन महीने में केवल एक ही बार भस्म आरती के लिए पंजीकरण कर पाएगा।
मंदिर प्रशासन ने यह बदलाव क्यों किया है?
यह बदलाव श्रद्धालुओं की सुविधा और पंजीकरण प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता लाने के लिए किया गया है।

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