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सीकर के खाटूश्याम मंदिर में उमड़ा जनसैलाब, भक्तों की भारी भीड़ के कारण 24 घंटे खुला रहा गर्भगृह और नहीं बदला गया बाबा का श्रृंगारधर्म
26 जुल॰ 2026, 12:56 pm (66 दिन पहले)· 0

सीकर के खाटूश्याम मंदिर में उमड़ा जनसैलाब, भक्तों की भारी भीड़ के कारण 24 घंटे खुला रहा गर्भगृह और नहीं बदला गया बाबा का श्रृंगार

देवशयनी एकादशी मेले पर खाटूधाम में उमड़े श्रद्धालुओं के कारण मंदिर प्रशासन ने कपाट बंद नहीं किए और दर्शन सुचारू रखने के लिए बाबा का पुराना श्रृंगार ही जारी रखा।

सीकर में आषाढ़ शुक्ल देवशयनी एकादशी के पावन अवसर पर आयोजित बाबा श्याम के दो दिवसीय मेले के अंतिम दिन खाटूधाम में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा है। बीते 24 घंटों से भक्तों का मंदिर में आना लगातार जारी है, जिसके कारण बाबा श्याम के दरबार के कपाट रात में भी बंद नहीं किए गए। देश के अलग-अलग राज्यों से आए लाखों श्रद्धालु कतारों में लगकर अपने आराध्य की एक झलक पाने का इंतजार कर रहे हैं। सुबह से ही खाटूधाम की गलियां, मुख्य मंदिर परिसर और दर्शन मार्ग भक्तों से पटे पड़े हैं और पूरा क्षेत्र 'बाबा श्याम' के जयकारों से गुंजायमान हो रहा है।

क्यों 24 घंटे से नहीं बदला गया बाबा का श्रृंगार?

सामान्य तौर पर मंदिर में सुबह की श्रृंगार आरती और शाम की संध्या आरती के समय बाबा श्याम का विशेष श्रृंगार किया जाता है। इस पारंपरिक प्रक्रिया को पूरा करने के लिए कुछ समय के लिए मंदिर के कपाट बंद रखे जाते हैं। लेकिन इस बार देवशयनी एकादशी मेले के साथ वीकेंड होने के कारण श्रद्धालुओं की संख्या अप्रत्याशित रूप से बढ़ गई। मंदिर परिसर में बनाई गईं सभी 14 लेन पूरी तरह से भक्तों से भरी हुई थीं। ऐसे में यदि कपाट बंद किए जाते, तो कतारों में खड़े श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता। भक्तों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मंदिर कमेटी ने एक बड़ा निर्णय लिया और बाबा श्याम के श्रृंगार में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया। यही वजह है कि पिछले 24 घंटों से बाबा श्याम एक ही श्रृंगार स्वरूप में अपने भक्तों को निरंतर दर्शन दे रहे हैं ताकि दर्शन की व्यवस्था में कोई रुकावट न आए।

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रींगस से पैदल यात्रा और मंदिर की भव्य सजावट

इस मेले के दौरान रींगस से खाटूधाम तक की पैदल निशान यात्रा का दृश्य अत्यंत मनमोहक रहा। तपती धूप और थकान की परवाह किए बिना श्रद्धालु हाथों में बाबा श्याम का पवित्र निशान लेकर जयकारों के साथ खाटूधाम की ओर बढ़ते नजर आए। श्रद्धालुओं के इस उत्साह ने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया है। इसके अलावा, इस बार मेले के लिए मंदिर को एक विशेष थीम पर सजाया गया है। मुख्य मंदिर और उसके आसपास के रास्तों को सजाने के लिए असली और कृत्रिम फूलों तथा पत्तियों का खूबसूरती से उपयोग किया गया है। इस बार की सजावट में सबसे बड़ा आकर्षण मंदिर के मुख्य गर्भगृह के ठीक ऊपर स्थापित भगवान श्रीहरि विष्णु की दिव्य प्रतिमा है। इस झांकी में भगवान विष्णु शेषनाग की शैया पर योगनिद्रा की मुद्रा में विराजमान हैं और माता लक्ष्मी उनके चरणों की सेवा कर रही हैं, जिसे देख श्रद्धालु भावविभोर हो रहे हैं।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और लखदातार मैदान का उपयोग

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को नियंत्रित करने और दर्शन व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए प्रशासन और श्रीश्याम मंदिर कमेटी पूरी तरह से मुस्तैद हैं। मंदिर परिसर, दर्शन मार्गों, प्रमुख चौराहों और अत्यधिक भीड़ वाले संवेदनशील स्थानों पर पुलिस बल के साथ-साथ मंदिर कमेटी के सुरक्षा गार्ड तैनात किए गए हैं। बाबा श्याम के दर्शन के लिए श्रद्धालु 14 कतारों में अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं और बाबा के समक्ष सिर झुकाकर अपने परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना कर रहे हैं। मेले के पहले दिन जब भीड़ अनियंत्रित होने लगी, तो पुलिस प्रशासन ने तुरंत स्थिति को संभालते हुए लखदातार मैदान को खोल दिया, जिससे दर्शन की व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रही। प्रशासन का अनुमान है कि दोपहर तक भारी भीड़ रहने के बाद शाम ढलने के साथ खाटूश्याम जी मंदिर में श्रद्धालुओं की आमद में कुछ कमी आ सकती है।

सवाल-जवाब

मंदिर प्रशासन ने कपाटों को 24 घंटे खुला क्यों रखा?
देवशयनी एकादशी मेले और वीकेंड के कारण खाटूधाम में भारी भीड़ उमड़ी थी। श्रद्धालुओं को बिना किसी परेशानी के दर्शन मिल सकें, इसलिए कपाट रात में भी बंद नहीं किए गए।
मेले के दूसरे दिन बाबा श्याम का श्रृंगार क्यों नहीं बदला गया?
आमतौर पर श्रृंगार के समय मंदिर के कपाट बंद करने पड़ते हैं। श्रद्धालुओं की लंबी कतारों को देखते हुए मंदिर कमेटी ने कपाट बंद न करने और श्रृंगार न बदलने का फैसला किया।
इस मेले में पैदल निशान यात्रा कहां से कहां तक आयोजित की गई?
श्रद्धालु रींगस से खाटूधाम तक पैदल निशान यात्रा कर रहे हैं, जहां वे अपने हाथों में पवित्र निशान (ध्वज) लेकर आगे बढ़ रहे हैं।
मंदिर के मुख्य गर्भगृह के ऊपर कौन सी विशेष झांकी सजाई गई है?
गर्भगृह के ऊपर भगवान श्रीहरि विष्णु की शेषनाग शैया पर योगनिद्रा मुद्रा की दिव्य प्रतिमा सजाई गई है, जिसमें माता लक्ष्मी उनके चरणों की सेवा कर रही हैं।
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