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उज्जैन के महाकाल की सवारी का शाही गजराज श्यामू: 29 साल का यह हाथी रोज उड़ाता है 50 रोटियां और 25 बाल्टी पानी, जानिए इसकी अनोखी दिनचर्याधर्म
13 जून 2026, 2:51 pm (45 दिन पहले)· 0

उज्जैन के महाकाल की सवारी का शाही गजराज श्यामू: 29 साल का यह हाथी रोज उड़ाता है 50 रोटियां और 25 बाल्टी पानी, जानिए इसकी अनोखी दिनचर्या

उज्जैन में बाबा महाकाल की भव्य सवारी में बरसों से शामिल हाथी श्यामू की दिनचर्या और खुराक किसी राजसी मेहमान से कम नहीं — रोजाना 50 मोटी रोटियां, क्विंटलों खाना और 25 बाल्टी पानी।

धार्मिक नगरी उज्जैन में विश्व प्रसिद्ध भगवान महाकाल को राजा के रूप में पूजा जाता है, और उनके दर्शन के लिए रोजाना लाखों भक्त उमड़ते हैं। साल भर में सावन-भादो के अलावा भी कुछ खास मौके ऐसे आते हैं जब अवंतिका के राजा अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए नगर भ्रमण पर निकलते हैं। जिस तरह किसी राजा के स्वागत में नगरवासी पलक-पावड़े बिछा देते हैं, ठीक उसी तरह बाबा की सवारी निकलने पर भक्त आतिशबाजी, रंगोली, फूलों की वर्षा और तरह-तरह की भेंट से उनका भव्य स्वागत करते हैं।

सवारी की शान बनते हैं ये सेवक

बाबा महाकाल की सवारी में भक्तों के साथ-साथ कुछ ऐसे सेवक भी चलते हैं जो अपनी अलग छटा के कारण सबके आकर्षण का केंद्र बन जाते हैं। सजे-धजे सुंदर वस्त्रों में घोड़े, बैल और हाथी मुख्य रूप से लोगों की निगाहें अपनी ओर खींचते हैं। इस बार भी सवारी को भव्य और अद्भुत रूप देने की तैयारी है, और इसी वजह से इन जानवरों की खुराक पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। घोड़े और बैल की डाइट तो आपने अक्सर सुनी-देखी होगी, लेकिन यहां बात उस हाथी की हो रही है जो बरसों से बाबा की सवारी में सेवा देता आ रहा है। इसका नाम है श्यामू।

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छोटी उम्र से ही बाबा की सेवा में

महावत सरमन गिरी बाबा बताते हैं कि वे बचपन से ही बाबा महाकाल की सवारी में सेवा देते आ रहे हैं। सबसे पहले उनके पास रामु नाम का हाथी था, जिसकी उम्र 70 वर्ष थी। रामु ने 1980 से लेकर 2016 तक लगातार बाबा की सेवा की। रामु की मृत्यु के बाद उन्होंने श्यामू को सवारी में शामिल किया। श्यामू हाथी का जन्म 08.11.1997 को आसाम में हुआ था और उसे 10 साल की उम्र में आसाम से यहां लाया गया। फिलहाल श्यामू की उम्र 29 वर्ष है और वह पिछले 9 साल से लगातार बाबा की सवारी में सेवा दे रहा है।

बेटे जैसा है श्यामू

सरमन गिरी बाबा के लिए श्यामू बेटे से कम नहीं है। उनके परिवार के 10 महावत रोजाना उसकी देखभाल में जुटे रहते हैं। श्यामू का दिन सुबह 5 बजे जागने के साथ शुरू होता है। इसके बाद करीब 5.30 बजे से उसे नहलाना शुरू किया जाता है, जो लगभग 7 बजे तक चलता है। नहाने के बाद घर पर ही उसे 1 क्विंटल सब्जियां खिलाई जाती हैं और फिर उसे रवाना किया जाता है।

दिनभर भक्तों के स्नेह का सिलसिला

शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए श्यामू करीब 8 बजे महाकाल पहुंचता है, जहां पहुंचने पर उसे फिर से 1 क्विंटल खाना दिया जाता है। दिनभर भक्त उसे अलग-अलग भोजन, सब्जी और फल खिलाते रहते हैं। शाम करीब 8 बजे वह वापस घर लौटता है।

राजसी रात्रि भोज: 50 रोटियां और 25 बाल्टी पानी

घर लौटने के बाद श्यामू के लिए ताजा 50 मोटी रोटियां तैयार होती हैं, जिनमें 25 किलो आटा लगता है। इसके कुछ देर बाद उसे डेढ़ किलो आटा मिलाकर सानी (सुखला) खिलाई जाती है, फिर 50 किलो गन्ना दिया जाता है। इसके बाद हरा लचका घास उसकी खुराक में शामिल होता है। पानी की बात करें तो श्यामू एक ही बार में 25 बाल्टी पानी पी जाता है। सुबह से शाम तक इस पूरी सेवा में 10 महावत लगे रहते हैं।

बच्चों और भक्तों का चहेता

महावत बताते हैं कि श्यामू ज्यों ही घर से बाहर निकलता है, लोग बड़े उत्साह से उसे दुलारने लगते हैं। कई बच्चे रोजाना उसका इंतजार करते हैं और उसे रोटियां व फल खिलाते हैं। कई लोग बाबा के आशीर्वाद के लिए ठहरे रहते हैं और हाथी को प्रणाम करने के बाद ही उनके दिन की शुरुआत होती है।

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