साल 2026 के श्रावण और भाद्रपद महीने करीब आते ही उज्जैन प्रशासन ने विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के लिए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। बाबा महाकाल के दरबार में हर साल देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। भगवान शिव के सबसे पवित्र माने जाने वाले इन महीनों में पूरे देश से शिवभक्त यहां पहुंचते हैं, जिससे शहर में उत्सव का माहौल रहता है। इस भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए, दर्शन व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर कई बड़े बदलाव किए गए हैं। प्रशासन का मुख्य लक्ष्य यह है कि भगवान महाकाल की पारंपरिक राजसी सवारियों के दौरान किसी भी भक्त को परेशानी का सामना न करना पड़े और सभी को सुरक्षित तरीके से दर्शन का लाभ मिल सके।
कलेक्टर की अध्यक्षता में बनी खास रणनीति
श्रावण और भादौ मास की व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने के लिए रविवार को श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की एक बेहद अहम बैठक बुलाई गई। इस उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता उज्जैन के कलेक्टर और समिति के अध्यक्ष रोशन कुमार सिंह ने की। बैठक के दौरान प्रशासन और मंदिर समिति के अधिकारियों ने राजसी सवारी के पूरे मार्ग की बारीकी से समीक्षा की। इसके साथ ही श्रद्धालुओं की पुख्ता सुरक्षा, भीड़ को नियंत्रित करने के तरीके, नई दर्शन व्यवस्था और शहर के ट्रैफिक मैनेजमेंट जैसे जरूरी मुद्दों पर लंबी चर्चा हुई। बैठक में यह भी सुनिश्चित किया गया कि स्थानीय निवासियों की दिनचर्या ज्यादा प्रभावित न हो और बाहर से आने वाले लोगों को भी शहर में प्रवेश करते ही सभी जरूरी जानकारियां मिल सकें। सभी विभागों की सहमति के बाद श्रावण और भादौ में निकलने वाली सवारियों को सुचारू और व्यवस्थित ढंग से पूरा कराने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसलों पर अंतिम मुहर लगा दी गई है।
3 अगस्त से शुरू होगा राजसी सवारियों का सिलसिला
बाबा महाकाल की राजसी सवारियों के लिए प्रशासन ने इस बार पहले से कहीं ज्यादा व्यापक तैयारी की है। सवारी मार्ग पर श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए सुरक्षा बलों की तैनाती और अन्य सुविधाओं को और भी ज्यादा मजबूत किया जा रहा है, ताकि भक्त बिना किसी रुकावट के बाबा की एक झलक पा सकें। प्रशासन का कहना है कि इन सवारियों का धार्मिक महत्व बहुत अधिक है, इसलिए साफ-सफाई और मार्गों की मरम्मत पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रशासन द्वारा जारी किए गए आधिकारिक शेड्यूल के मुताबिक, श्रावण मास की पहली राजसी सवारी 3 अगस्त 2026 को निकाली जाएगी। इसके बाद पूरे श्रावण महीने में कुल चार सवारियां निकलेंगी, जबकि भाद्रपद महीने में दो सवारियों का आयोजन किया जाएगा। इस तरह श्रावण-भादौ के इस पूरे क्रम की अंतिम राजसी सवारी 7 सितंबर 2026 को शाही ठाठ-बाट के साथ निकाली जाएगी।
आम श्रद्धालुओं के लिए तय किया गया नया रूट
श्रावण और भादौ के दौरान रोजाना आने वाले हजारों आम श्रद्धालुओं के लिए प्रशासन ने एक विशेष और व्यवस्थित रूट मैप तैयार किया है। सामान्य भक्तों को दर्शन के लिए त्रिवेणी संग्रहालय के पास से प्रवेश दिया जाएगा। यहां से श्रद्धालु सीधे नंदी द्वार होते हुए भव्य महाकाल लोक में प्रवेश करेंगे। इसके बाद कतार मानसरोवर भवन और फेसिलिटी सेंटर-1 से होते हुए टनल मार्ग की तरफ जाएगी। टनल से निकलने के बाद भक्त कार्तिक मंडपम और अंत में गणेश मंडपम होते हुए बाबा महाकाल के दर्शन कर सकेंगे। लंबी कतारों में लगने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जरूरी व्यवस्थाएं इसी रूट पर सुनिश्चित की जा रही हैं। इसके अलावा, जो श्रद्धालु नीलकंठ प्रवेश द्वार की तरफ से आएंगे, उनके लिए प्रशासन ने एक बिल्कुल अलग मार्ग निर्धारित किया है। गर्भगृह के पास भीड़ जमा न हो, इसके लिए भगवान को जल अर्पित करने की व्यवस्था सभामंडप और कार्तिकेय मंडपम में की गई है, जहां विशेष रूप से बड़े जलपात्र रखे गए हैं।
कांवड़ यात्रियों की एंट्री पर लागू हुए कड़े नियम
श्रावण और भादौ में पैदल चलकर पवित्र जल लाने वाले कांवड़ यात्रियों की भारी भीड़ उज्जैन पहुंचती है। इन कांवड़ दलों की सुविधा और मंदिर की दर्शन व्यवस्था को संतुलित रखने के लिए मंदिर प्रशासन ने इस बार एंट्री के नियम बदल दिए हैं। नए निर्देशों के अनुसार, कांवड़ यात्रियों को अब केवल मंगलवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार के दिन ही मंदिर में दर्शन करने की अनुमति दी जाएगी। दूर-दराज से पैदल यात्रा कर उज्जैन पहुंचने वाले इन शिवभक्तों की आस्था का पूरा सम्मान करते हुए प्रशासन ने यह विशेष मार्ग तय किया है। इन कांवड़ियों को प्रवेश द्वार नंबर-1 से अंदर भेजा जाएगा और इनके लिए हरसिद्धि चौराहा से एक विशेष मार्ग तैयार किया गया है। वहीं, वीकेंड यानी शनिवार और रविवार के साथ-साथ सोमवार को आम श्रद्धालुओं की सबसे ज्यादा भीड़ होती है, इसलिए इन तीन दिनों में किसी भी कांवड़ दल को मंदिर में प्रवेश की बिल्कुल भी अनुमति नहीं होगी।
प्रोएक्टिव मॉडल से होगी भीड़ की निगरानी
रविवार को हुई बैठक में भीड़ प्रबंधन प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता रही। कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने उज्जैन आने वाले सभी श्रद्धालुओं से विशेष अपील करते हुए कहा कि प्रशासन ने उनकी सुविधा के लिए ही यह व्यापक तैयारियां की हैं। उन्होंने भक्तों से आग्रह किया कि वे मंदिर प्रशासन द्वारा तय की गई दर्शन व्यवस्था का ही सख्ती से पालन करें, ताकि हर एक भक्त को कम समय में सुरक्षित और सुगम दर्शन हो सकें। इस महाआयोजन को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम और पुलिस सहित सभी संबंधित विभागों को पूरी मुस्तैदी के साथ अपनी ड्यूटी निभाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। सबसे खास बात यह है कि इस बार भीड़ को नियंत्रित करने के लिए एक 'प्रोएक्टिव मॉडल' लागू किया जा रहा है। इस सिस्टम के तहत भीड़ बेकाबू होने से पहले ही सभी जरूरी व्यवस्थाएं सक्रिय कर दी जाएंगी। लगातार मॉनिटरिंग की जाएगी और रियल-टाइम स्थिति के आधार पर दर्शन व्यवस्था में तुरंत आवश्यक बदलाव भी किए जाएंगे।




















