सस्ते कबाड़ के झांसे में 9 लाख की डकैती, 12 जिलों में 1300 किमी पीछा कर दबोचे गए 7 बदमाशअंडाल में कारोबारी दिलीप तुरी के ठिकाने पर प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी, खनन क्षेत्र में बढ़ी हलचलपितृ पक्ष में लोहे के बर्तनों और दान से क्यों बचना चाहिए, जानिए धार्मिक कारणशारदीय नवरात्र से पूर्व उत्तराभाद्रपद में शनि का प्रवेश, सप्तम भाव के गोचर से साझेदारी और कारोबार पर असरसपोटरा के गज्जूपुरा में राज्य स्तरीय खो-खो टूर्नामेंट का आगाज, 86 टीमों की 1032 छात्राएं दिखाएंगी दमउत्तर भारत से मानसून की विदाई तेज, पूर्वोत्तर और दक्षिण के राज्यों में भारी बारिश का अलर्टनोंगस्टोइन स्टाफ नर्स भर्ती विवाद: वीपीपी ने एमडीसी के हस्तक्षेप को ठहराया सही, निष्पक्ष जांच की उठाई मांगअजमेर में बस चालक से मारपीट पर रोडवेज कर्मियों का फूटा गुस्सा, अंबेडकर सर्किल पर बसें रोक लगाया जामबालाघाट में रहस्यमयी बीमारी के बाद हरकत में प्रशासन, 50 गांवों में 43 हजार से अधिक लोगों का हुआ स्वास्थ्य परीक्षणवृषभ राशिफल 1 अक्टूबर 2026: कामकाज और घर में बनाएं तालमेल, मंगल बढ़ाएगा प्रभाव
वीर फूली व्रत: जालोर में बहनों ने भाई की लंबी उम्र के लिए रखा खास उपवास, जानें क्या है पूरी परंपराधर्म
25 अग॰ 2026, 7:38 pm (36 दिन पहले)· 2

वीर फूली व्रत: जालोर में बहनों ने भाई की लंबी उम्र के लिए रखा खास उपवास, जानें क्या है पूरी परंपरा

जालौर में रक्षाबंधन से ठीक पहले भाई की सलामती और लंबी उम्र के लिए वीर फूली का व्रत रखा जाता है, जिसमें तवे पर गेहूं सेंकने की अनूठी रस्म निभाई जाती है।

भाई और बहन के पवित्र रिश्ते के प्रतीक रक्षाबंधन के पर्व से पहले देश के कई हिस्सों में अनूठी परंपराएं निभाई जाती हैं। राजस्थान के जालोर जिले में इन दिनों एक ऐसी ही लोक परंपरा का विशेष महत्व है, जहां बहनें अपने भाई की अच्छी सेहत, लंबी उम्र और खुशहाली के लिए खास उपवास रखती हैं। इस पारंपरिक अनुष्ठान को वीर फूली का व्रत कहा जाता है। साल में केवल एक बार आने वाला यह व्रत रक्षाबंधन से ठीक पहले पड़ने वाले किसी भी रविवार या मंगलवार को किया जाता है। इस बार रक्षाबंधन से पहले मंगलवार का दिन आने के कारण महिलाओं ने विधि-विधान के साथ इस व्रत को पूरा किया है।

सालों से चली आ रही है अनूठी परंपरा

इस व्रत की गहराई और महत्व का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि महिलाएं इसे पूरी निष्ठा के साथ वर्षों से निभाती आ रही हैं। इस व्रत को पिछले 50 वर्षों से लगातार करती आ रही संतोष देवी ने बताया कि यह उपवास हर साल रक्षाबंधन से पहले रविवार या मंगलवार के दिन रखा जाता है। इस दिन बहनें अपने भाई की रक्षा, उत्तम स्वास्थ्य और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। दिनभर के उपवास के बाद शाम के समय सभी महिलाएं एकत्र होकर व्रत की कथा सुनती हैं। कथा के दौरान गेहूं के दानों की मदद से विभिन्न प्रकार की आकृतियां बनाई जाती हैं। कथा का वाचन समाप्त होने के बाद महिलाएं उस कथा में उपयोग किए गए गेहूं में से थोड़ा-थोड़ा हिस्सा अपने साथ अपने घर लेकर लौटती हैं।

ये भी पढ़ें

तवे पर गेहूं सेंकने की खास रस्म

घर लौटने के बाद इस व्रत की सबसे महत्वपूर्ण और दिलचस्प रस्म शुरू होती है। महिलाएं चूल्हे पर तवा गर्म करती हैं और कथा के दौरान साथ लाई गईं गेहूं की दानों को उस पर सेंकती हैं। इस दौरान एक विशेष पारंपरिक कहावत बोली जाती है, जिसके बोल हैं, फूली सेकूं धाणी सेकूं, मारे विरा री वेरी सेकूं। इस कहावत और प्रक्रिया के पीछे गहरा भाव यह होता है कि भाई के जीवन में आने वाले सभी संकटों और शत्रुओं को इन गेहूं के दानों की तरह ही तवे पर सेंककर नष्ट कर दिया जाए, ताकि उनके भाई को किसी भी प्रकार की हानि न उठानी पड़े।

आधुनिक दौर में भी जीवित है लोक संस्कृति

आज के आधुनिक और बदलते दौर में भले ही त्योहारों को मनाने के तरीके काफी बदल गए हों, लेकिन जालोर की महिलाओं ने अपनी पुरानी सांस्कृतिक जड़ों को आज भी मजबूती से थाम रखा है। वीर फूली व्रत इस बात का प्रमाण है कि लोक परंपराएं किस तरह पीढ़ियों से चली आ रही हैं। रक्षाबंधन से पहले निभाई जाने वाली यह अनूठी रस्म भाई और बहन के रिश्ते में मौजूद अटूट स्नेह, गहरे विश्वास और सुरक्षा के उस भाव को जीवंत करती है, जो हर विपरीत परिस्थिति में भाई की ढाल बनकर खड़ा रहता है।

सवाल-जवाब

वीर फूली का व्रत कब रखा जाता है?
यह व्रत साल में केवल एक बार रक्षाबंधन से ठीक पहले आने वाले रविवार या मंगलवार के दिन रखा जाता है।
वीर फूली व्रत किस लिए किया जाता है?
यह व्रत बहनें अपने भाई की सलामती, लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि के लिए रखती हैं।
इस व्रत में शाम के समय क्या मुख्य रस्म होती है?
शाम को महिलाएं कथा सुनती हैं, गेहूं से आकृतियां बनाती हैं और घर आकर तवे पर उन गेहूं को सेंककर पारंपरिक कहावत बोलती हैं।
वीर फूली व्रत के दौरान कौन सी कहावत बोली जाती है?
गेहूं सेंकते समय महिलाएं 'फूली सेकूं धाणी सेकूं, मारे विरा री वेरी सेकूं' कहावत बोलती हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp