अंतरंग पलों का समय कितना होना चाहिए, यह पूरी तरह से दोनों पार्टनर्स के मूड, शारीरिक ऊर्जा और आपसी समझ पर निर्भर करता है। कई बार यह सत्र काफी लंबा चलता है तो कभी व्यस्त दिनचर्या के बीच बहुत कम समय में सिमट जाता है। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या समय की लंबाई से ही संतुष्टि तय होती है। हालांकि लंबा समय ही सब कुछ नहीं होता, लेकिन अगर क्लाइमेक्स बहुत जल्दी आ जाए तो निराशा महसूस होना भी स्वाभाविक है। महिला और पुरुष के शारीरिक अनुभवों में भी फर्क देखा गया है। आंकड़ों के अनुसार महिलाएं औसतन 65 प्रतिशत बार ही ऑर्गैज्म तक पहुंच पाती हैं जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा 95 प्रतिशत देखा गया है। इसके बावजूद कई महिलाएं एक ही सत्र में कई बार चरम सुख का अनुभव कर सकती हैं, जबकि पुरुषों के मामले में आमतौर पर एक बार स्खलन के बाद दोबारा तैयार होने के लिए एक अंतराल की आवश्यकता होती है।
किसी भी पुरुष को चरम सुख तक पहुंचने में कितना समय लगेगा, यह कई शारीरिक और मानसिक पहलुओं पर तय होता है। इसमें हाल ही में अल्कोहल का सेवन, पिछली बार बने शारीरिक संबंध का अंतराल और उम्र जैसे प्रमुख कारण शामिल हैं। उम्र बढ़ने के साथ पुरुषों को चरम सीमा तक पहुंचने के लिए लगने वाला समय और उनकी शारीरिक क्षमता धीरे-धीरे बदलने लगती है। 2025 में सामने आए लवहनी के एक अध्ययन ने विभिन्न आयु वर्गों के पुरुषों के औसत समय को सामने रखकर इस अंतर को स्पष्ट किया है। हालांकि यह समझना जरूरी है कि ये आंकड़े केवल औसत रुझान हैं और इसे खुद पर या अपने पार्टनर पर किसी भी तरह का दबाव बनाने का पैमाना नहीं माना जाना चाहिए।
18 से 24 वर्ष: ऊर्जा से भरा दौर और 16.14 मिनट का औसत
अध्ययन के अनुसार 18 से 24 वर्ष के आयु वर्ग में पुरुष औसतन 16.14 मिनट तक टिक पाते हैं। जब इस आयु वर्ग के आंकड़ों का गहराई से विश्लेषण किया जाता है, तो पता चलता है कि लगभग 5 प्रतिशत युवा केवल एक से दो मिनट के भीतर ही स्खलित हो जाते हैं। वहीं 13 प्रतिशत युवाओं का समय तीन से पांच मिनट के बीच रहता है। इसके विपरीत इस वर्ग के लगभग 5 प्रतिशत पुरुष ऐसे भी हैं जो प्रत्येक बार एक घंटे से अधिक समय तक खुद को बनाए रखने में सक्षम होते हैं।
यौन स्वास्थ्य विशेषज्ञ और नर्स सारा मुलिंदवा का कहना है कि किसी भी संबंध की अवधि को लेकर कोई एक तय या सही समय निर्धारित नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार रिसर्च यह दर्शाती है कि शारीरिक संबंध का समय आमतौर पर 20 के दशक के अंतिम वर्षों से लेकर 30 के दशक की शुरुआत में अपने चरम पर होता है और इसके बाद उम्र बढ़ने के साथ धीरे-धीरे कम होता जाता है। 20 की उम्र में उत्साह और नयापन बहुत अधिक होता है, जिसकी वजह से कई बार तेजी से चरम सुख मिल जाता है। अच्छी बात यह है कि इस उम्र में रिकवरी का समय काफी तेज होता है और शारीरिक स्टेमिना भी मजबूत रहता है। सारा मुलिंदवा का सुझाव है कि इस पड़ाव पर पेसिंग यानी गति पर नियंत्रण रखना बेहद अहम है। इसके लिए एजिंग तकनीक, श्वास नियंत्रण और कंडोम का सही इस्तेमाल मददगार साबित हो सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि स्टॉपवॉच पर नजर रखने के बजाय बातचीत, तकनीक और दोनों की खुशी पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
25 से 34 वर्ष: 18.29 मिनट के साथ सबसे बेहतर टाइमिंग
25 से 34 वर्ष की आयु सीमा में पुरुषों का औसत समय बढ़कर 18.29 मिनट तक पहुंच जाता है, जो सभी आयु वर्गों में सबसे अधिक है। आंकड़ों के अनुसार इस समूह के 21 प्रतिशत पुरुष 11 से 15 मिनट तक संबंध बना पाते हैं, जबकि 15 प्रतिशत पुरुषों को चरम सुख तक पहुंचने में 21 से 30 मिनट का समय लगता है।
20 के दशक के मध्य से लेकर 30 की उम्र तक का समय काफी रोमांचक और सक्रिय रहता है। 30 की उम्र में कदम रखने तक शारीरिक समय स्थिर बना रहता है और साथ ही बढ़ता आत्मविश्वास पुरुषों के धैर्य को और मजबूत करता है। विशेषज्ञ सारा मुलिंदवा के मुताबिक अनुभव, सही लय और बेहतर बातचीत से संबंध अधिक सहज और आनंददायक बन जाते हैं। हालांकि कार्यस्थल का तनाव या समय की कमी कभी-कभी कुछ मिनट कम भी कर सकती है। इस उम्र में प्लानिंग बहुत काम आती है। जब शरीर में ऊर्जा का स्तर सबसे अधिक हो, उस समय के अनुसार योजना बनाना और केवल पेनेट्रेशन तक सीमित न रहकर उत्तेजना के अन्य माध्यमों का इस्तेमाल करना दोनों के अनुभव को बेहतर बनाता है।
35 से 44 वर्ष: अनुभव की मजबूती और 17.4 मिनट का समय
35 से 44 वर्ष के पड़ाव पर पुरुषों के स्टेमिना में मामूली कमी दर्ज की जाती है और औसत समय घटकर 17.4 मिनट रह जाता है। यह पिछले दशक की तुलना में लगभग एक मिनट की गिरावट है, जो किसी भी तरह से चिंता का विषय नहीं है।
सारा मुलिंदवा समझाती हैं कि इस उम्र में हार्मोनल बदलाव और इरेक्शन से जुड़ी शुरुआती परेशानियां गति को प्रभावित कर सकती हैं। लेकिन इसके सकारात्मक पहलू के रूप में कई कपल्स फोरप्ले, प्रयोग और भावनात्मक जुड़ाव पर अधिक समय देने लगते हैं। इस उम्र में धीरे-धीरे उत्तेजना बढ़ाने और अपनी पसंद की गति पर खुलकर बात करने से संबंध की गुणवत्ता काफी गहरी हो जाती है, भले ही घड़ी पर समय थोड़ा कम दर्ज हो। यहां सारा जोर समय की लंबाई के बजाय अनुभव की गुणवत्ता पर आ जाता है।
45 से 54 वर्ष: 14.14 मिनट का औसत और शारीरिक बदलाव
45 से 54 वर्ष की उम्र में समय में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलता है, जहां औसत अवधि घटकर 14.14 मिनट के करीब आ जाती है। इस आयु वर्ग में 25 प्रतिशत पुरुष छह से 10 मिनट के भीतर ऑर्गैज्म तक पहुंच जाते हैं, जबकि 18 प्रतिशत का समय 11 से 15 मिनट के बीच दर्ज किया गया है।
विशेषज्ञ के अनुसार 50 के दशक में कदम रखने के साथ ही इरेक्शन पहले की तुलना में कम अनुमानित हो सकता है और क्लाइमेक्स के समय में भी भिन्नता बढ़ने लगती है। इस उम्र में संतुष्टि बनाए रखने के लिए वाइब्रेटर, कम शारीरिक श्रम वाली सेक्सुअल पोजीशन और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय परामर्श की मदद ली जा सकती है। इसके लिए द क्रॉस, द स्टैंडिंग ओवेशन या द लेजी डॉग जैसी पोजीशन को आजमाने की सलाह दी जाती है।
55 से 64 वर्ष: 11.3 मिनट का सफर और समझदारी का लाभ
55 से 64 वर्ष की आयु के पुरुषों में औसत समय घटकर 11.3 मिनट रह जाता है। भले ही चरम तक पहुंचने का सफर पहले से छोटा हो जाता है, लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि संतुष्टि में कोई कमी आती है।
60 की उम्र पार करने के बाद उत्तेजना आने में अधिक समय लगना और एक बार संबंध बनाने के बाद शरीर को रिकवर होने के लिए लंबा ब्रेक लगना पूरी तरह सामान्य माना जाता है। इस उम्र में स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां और दवाइयां भी एक बड़ी भूमिका निभाती हैं। हालांकि इस उम्र का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि पुरुषों के पास अनुभव की कोई कमी नहीं होती। सारा मुलिंदवा बताती हैं कि उम्र के इस दौर में आत्मीयता, तकनीक और आपसी जुड़ाव पहले से कहीं ज्यादा गहरा हो जाता है। वॉर्म-अप के लिए पर्याप्त समय निकालना, सेंसेट फोकस का अभ्यास करना और नए प्रयोगों को शामिल करना इस उम्र में भी अनुभवों को आनंददायक बनाए रखता है।
65 वर्ष से अधिक: 8.15 मिनट का समय और आत्मीयता का महत्व
65 वर्ष और उससे अधिक आयु के पुरुषों में औसत समय 8.15 मिनट पाया गया है। इस समूह में सबसे सामान्य अवधि छह से 10 मिनट के बीच (28 प्रतिशत) देखी गई है। वहीं 26 प्रतिशत पुरुष तीन से पांच मिनट तक टिक पाते हैं, और केवल 1 प्रतिशत पुरुष ही ऐसे हैं जो एक घंटे से अधिक समय तक संबंध जारी रख पाते हैं।
सारा मुलिंदवा याद दिलाती हैं कि आंकड़ों के अनुसार लगभग 10 से 15 मिनट का मध्य स्तर का समय हर उम्र में सबसे आम होता है, जबकि बहुत लंबे सत्र बहुत कम देखे जाते हैं। उनके अनुसार सबसे महत्वपूर्ण कारक मानसिक स्थिति, तकनीक और निरंतर बातचीत है। जो कपल्स भावनात्मक जुड़ाव पर ध्यान केंद्रित करते हैं और खुलकर बातचीत बनाए रखते हैं, वे घड़ी के समय की परवाह किए बिना सबसे अधिक संतुष्टि प्राप्त करते हैं।



















