ग्लास्गो में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का सफर खत्म होते ही एक बड़ी सुरक्षा और प्रशासनिक चिंता सामने आ गई है। बहुखेल प्रतियोगिता के समापन के बाद विभिन्न देशों के कई एथलीट अपनी राष्ट्रीय टीमों के साथ स्वदेश लौटने में नाकाम रहे और अचानक गायब हो गए हैं। स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने पुष्टि की है कि उन्हें कई एथलीटों के लापता होने की आधिकारिक सूचना प्राप्त हुई है। इस घटनाक्रम के सामने आने के तुरंत बाद स्थानीय जांच एजेंसियों ने ब्रिटेन के गृह मंत्रालय यानी यूके होम ऑफिस के साथ मिलकर छानबीन शुरू कर दी है।
युगांडा और पाकिस्तान के मुक्केबाज टीम से अलग होकर हुए लापता
लापता होने वाले एथलीटों में मुक्केबाजी दल से जुड़े खिलाड़ी प्रमुख रूप से शामिल हैं। युगांडा के मुक्केबाजी दल के 4 सदस्य 4 अगस्त को उस समय गायब पाए गए जब पूरी टीम वापस अपने देश लौटने की तैयारी कर रही थी। उड़ान से ठीक पहले इन चारों खिलाड़ियों की अनुपस्थिति ने अधिकारियों को हैरान कर दिया। इसके साथ ही पाकिस्तान के मुक्केबाजी दल से भी एक गंभीर मामला सामने आया है। पाकिस्तानी मुक्केबाज कुदरतुल्लाह अपनी बाउट पूरी करने के बाद अचानक टीम होटल से गायब हो गए। सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि खिलाड़ी का पासपोर्ट टीम मैनेजर की सुरक्षित कस्टडी में जमा था, लेकिन इसके बावजूद वह दल को चकमा देकर निकलने में कामयाब रहा।
पाकिस्तानी मुक्केबाजी संघ का पुराना रिकॉर्ड और पिछले विवाद
पाकिस्तानी एथलीटों का अंतरराष्ट्रीय दौरों के दौरान टीम छोड़ कर गायब हो जाना कोई नई परिघटना नहीं है। इससे पहले साल 2022 में ब्रिटेन के बर्मिंघम शहर में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान भी पाकिस्तान के दो मुक्केबाज सुलेमान बलोच और नजीरुल्लाह खान गायब हो गए थे। उस समय भी दोनों मुक्केबाजों के पासपोर्ट दल के वरिष्ठ अधिकारियों के पास जमा रखे गए थे। इसके अलावा साल 2024 में आयोजित वर्ल्ड ओलंपिक क्वालीफायर के दौरान एशियन गोल्ड मेडलिस्ट मुक्केबाज जोहेब रशीद पर भी गंभीर आरोप लगे थे। जोहेब रशीद अपने रूममेट की विदेशी मुद्रा और अन्य कीमती सामान चुराकर अचानक फरार हो गए थे। बार-बार दोहराई जाने वाली इन घटनाओं ने संबंधित खेल संघों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आयोजन समिति और सुरक्षा एजेंसियों का संयुक्त बयान
इस बड़े पैमाने की प्रतियोगिता में दुनिया भर से आए हजारों खिलाड़ियों ने भाग लिया था। कॉमनवेल्थ गेम्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO फिल बैटी के अनुसार, इस बार प्रतियोगिता में 74 देशों के लगभग 3000 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोजन समिति ने सभी एथलीटों के सुरक्षित आगमन और प्रस्थान को सुनिश्चित करने के लिए पुलिस स्कॉटलैंड, बॉर्डर फोर्स और यूके वीजा एवं इमिग्रेशन विभाग के साथ मिलकर बहुत व्यापक प्रबंध किए थे। इसके बावजूद एथलीटों के गायब होने की रिपोर्ट दर्ज होना चिंता का विषय बन गया है। स्कॉटलैंड पुलिस के आधिकारिक प्रवक्ता ने बताया कि विभिन्न टीमों से लापता हुए खिलाड़ियों के मामलों की गहन जांच की जा रही है और हर एक मामले की परिस्थितियों को समझने के लिए होम ऑफिस के साथ शुरुआती दौर का समन्वय स्थापित किया गया है।
कॉमनवेल्थ गेम्स में एथलीटों के गायब होने का पुराना इतिहास
अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं के समापन पर खिलाड़ियों के दल छोड़कर गायब होने या राजनीतिक शरण मांगने का इतिहास काफी पुराना रहा है। इससे पहले साल 2014 में जब ग्लास्गो में ही कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन हुआ था, तब भी कई देशों के खिलाड़ियों ने अपनी टीमों को छोड़कर स्थानीय स्तर पर शरण लेने के प्रयास किए थे। इसके बाद साल 2018 में ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट शहर में संपन्न हुए खेलों के दौरान भी अफ्रीकी और एशियाई महाद्वीपों के कई खिलाड़ियों ने वापस लौटने के बजाय अपनी टीमों से अलग होने का रास्ता चुना था। खेल विश्लेषकों का मानना है कि आर्थिक तंगी, करियर की अनिश्चितता और बेहतर जीवन की तलाश अक्सर खिलाड़ियों को इस तरह के कानूनी जोखिम उठाने पर मजबूर करती है। फिलहाल स्कॉटलैंड पुलिस और यूके की इमिग्रेशन एजेंसियां लापता खिलाड़ियों की तलाश के लिए विभिन्न ठिकानों पर सुराग जुटा रही हैं।



















