उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले की बेटी प्राची चौधरी ने अपनी कड़ी मेहनत और लगन के दम पर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करने की तैयारी कर ली है। जापान के आईची नागोया शहर में आयोजित होने वाले 20वें एशियन गेम्स के लिए भारतीय एथलेटिक्स महासंघ ने राष्ट्रीय खिलाड़ियों की सूची में उनका चयन किया है। इस प्रतिष्ठित महाकुंभ का आयोजन 19 सितंबर से चार अक्तूबर के बीच किया जाएगा। प्राची चौधरी इससे पहले साल 2023 के एशियाई खेलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम कर चुकी हैं, और इस बार उनके परिवार तथा समर्थकों को उनसे गोल्ड मेडल जीतने की पूरी उम्मीद है। उनका यह सफर किसी प्रेरणा से कम नहीं है क्योंकि उन्होंने अपने शुरुआती दिनों में कच्चे रास्तों पर नंगे पांव अभ्यास किया था और आज वह देश की शीर्ष एथलीटों में शुमार हैं।
दो प्रमुख स्पर्धाओं में लेंगी हिस्सा
जापान में होने जा रहे इन मुकाबलों के दौरान प्राची चौधरी मुख्य रूप से 400 मीटर दौड़ और चार गुणा चार सौ मीटर रिले दौड़ स्पर्धाओं में उतरेंगी। उनके इस महत्वपूर्ण चयन से पूरे खेल जगत और सहारनपुर के खेल प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ गई है। प्राची मूल रूप से सहारनपुर के झबीरण गांव की रहने वाली हैं। उनकी खेल प्रतिभा को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की विशेष खेल प्रोत्साहन नीति के तहत उन्हें जिला युवा कल्याण एवं प्रादेशिक विकास दल विभाग में अधिकारी के पद पर नियुक्त किया गया है। इससे पहले वह 33वें पेरिस ओलंपिक खेलों की चार गुणा चार सौ मीटर रिले टीम का भी हिस्सा रह चुकी हैं, हालांकि उस दौरान तकनीकी कारणों से उन्हें फाइनल मुकाबले में ट्रैक पर उतरने का मौका नहीं मिल पाया था। इसके अलावा उन्होंने देश-विदेश की कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर स्वर्ण पदक जीते हैं। हाल ही में ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित 59वीं राष्ट्रीय सीनियर एथलेटिक्स प्रतियोगिता में उन्होंने उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए 400 मीटर की दूरी महज 53.24 सेकंड में तय कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया था।
कच्ची पगडंडियों से लेकर एशियन गेम्स तक का संघर्ष
प्राची के माता-पिता ने साझा किया कि उनकी बेटी ने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए दिन-रात एक कर दिया है और उसकी सालों की मेहनत अब रंग ला रही है। उन्होंने बताया कि प्राची पिछले 12 सालों से लगातार दौड़ रही है और उसने दसवीं कक्षा में पढ़ाई के दौरान ही रनिंग की शुरुआत कर दी थी। उसके परिवार की आर्थिक स्थिति शुरुआती दिनों में बहुत मजबूत नहीं थी। प्राची के बड़े भाई अंकित चौधरी ने बताया कि जब उनकी बहन ने दौड़ना शुरू किया था, तब उनके पास खेलकूद के जूते खरीदने के लिए भी पर्याप्त संसाधन नहीं थे, जिसके चलते वह गांव की कच्ची सड़कों पर नंगे पांव अभ्यास करती थी। हालांकि उसकी प्रतिभा इतनी शानदार थी कि दसवीं कक्षा से ही उसने प्रतियोगिताओं में मेडल जीतना शुरू कर दिया था और उसके बाद से ऐसा कोई मुकाबला नहीं रहा जहां उसने पदक न जीता हो।
एशियन गेम्स के लिए नाम फाइनल होने की खबर मिलते ही प्राची ने रोते हुए अपने परिजनों को फोन पर इसकी जानकारी दी, जिसके बाद से उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। चीनी में साल 2023 में हुए एशियाई खेलों में सिल्वर मेडल जीतने के बाद, इस बार उनके परिवार और पूरे सहारनपुर जिले को पूरी उम्मीद है कि प्राची इस बार देश के लिए गोल्ड मेडल जीतकर लौटेंगी। उनके चयन की खबर मिलते ही गांव, शहर और रिश्तेदारों के फोन लगातार आ रहे हैं और सभी लोग उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहे हैं।



















