जापान के नागोया में जारी एशियाई खेल 2026 में भारतीय लड़ाकू खेलों के लिए ऐतिहासिक पल सामने आया है। अनुभवी एथलीट सुचिका तारियाल ने पारंपरिक मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स के 60 किलोग्राम भार वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए सेमीफाइनल में प्रवेश हासिल कर लिया है। इस जीत के साथ ही उन्होंने इस स्पर्धा में भारत के लिए कम से कम कांस्य पदक पक्का कर दिया है, क्योंकि प्रतियोगिता के नियमों के अनुसार अंतिम चार में पहुंचने वाले दोनों पराजित खिलाड़ियों को भी कांस्य पदक प्रदान किया जाता है।
मंगोलियाई प्रतिद्वंद्वी पर इकतरफा जीत
सुचिका ने अपने क्वार्टर फाइनल बाउट में मंगोलिया की अल्तांचिमेग बैगलमा के खिलाफ पूरी तरह से दबदबा बनाए रखा। यूरेशिया क्षेत्र में 92वें स्थान पर काबिज बैगलमा को भारतीय खिलाड़ी ने संभलने का कोई मौका नहीं दिया और मुकाबला 2-0 के अंतर से अपने नाम कर लिया। पूरे मैच के दौरान सुचिका की तकनीक और मैट नियंत्रण साफ नजर आया, जिससे विपक्षी खिलाड़ी कोई प्रभावी दांव नहीं लगा सकीं।
चोट से उबरने के बाद नई विधा में परचम
36 साल की सुचिका का यह मुकाम कई मायनों में असाधारण है। घुटने की गंभीर चोट और कुछ अन्य व्यक्तिगत व खेल संबंधी कारणों से उन्हें एक समय मैदान से दूर रहना पड़ा था। इस लंबे अंतराल के बाद उन्होंने अपना ध्यान एमएमए की तरफ केंद्रित किया और यहां अपनी तकनीकी महारत साबित की। एशियाई खेलों के इतिहास में एमएमए को पहली बार शामिल किया गया है, और पदार्पण संस्करण में ही उन्होंने देश के लिए पदक सूची में नाम दर्ज करा लिया है।
कई मार्शल आर्ट्स में देश का मान बढ़ा चुकी हैं सुचिका
सुचिका तारियाल भारतीय खेल जगत की बहुमुखी प्रतिभा वाली एथलीट रही हैं। इससे पहले वह साल 2022 के राष्ट्रमंडल खेलों में जूडो स्पर्धा के भीतर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। इसके बाद वर्ष 2023 के एशियाई खेलों में उन्होंने कुराश में भारतीय दल की नुमाइंदगी की थी। उनकी उपलब्धियों में 2024 का वह स्वर्णिम पल भी शामिल है जब उन्होंने जिउ-जित्सु में विश्व चैंपियन का खिताब अपने नाम किया था। अब सोमवार को वह फाइनल में जगह बनाने के इरादे से सेमीफाइनल मुकाबले में उतरेंगी।



















