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अरबों डॉलर का सौदा तैयार था, फिर भी स्टीव जॉब्स ने एपल की कमान लेने से क्यों किया इनकारसक्सेस स्टोरी
22 जुल॰ 2026, 2:32 am (28 दिन पहले)· 0

अरबों डॉलर का सौदा तैयार था, फिर भी स्टीव जॉब्स ने एपल की कमान लेने से क्यों किया इनकार

एक दौर में एपल दिवालिया होने की कगार पर थी और ओरेकल के फाउंडर लैरी एलिसन उसे खरीदकर स्टीव जॉब्स को बॉस बनाना चाहते थे, लेकिन जॉब्स ने यह मौका ठुकरा दिया। जानिए क्यों और आगे क्या हुआ।

आज जिस एपल की गिनती दुनिया की सबसे कीमती कंपनियों में होती है, कभी उसका अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया था। नब्बे के दशक के बीच वाले साल कंपनी के लिए किसी बुरे सपने जैसे थे। हर तिमाही खाते में घाटा दर्ज हो रहा था, बड़ी संख्या में कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जा रहा था और शेयर बाजार में इसके भाव लगातार लुढ़क रहे थे। हालत यह थी कि कई जानकार मान बैठे थे कि यह कंपनी अब ज्यादा दिन नहीं टिकेगी।

ठीक इसी नाजुक मोड़ पर ओरेकल के फाउंडर लैरी एलिसन ने एक साहसी योजना बुनी। वे चाहते थे कि पूरी एपल को ही खरीद लिया जाए और उसकी बागडोर वापस उनके पुराने और करीबी दोस्त स्टीव जॉब्स के हाथ में सौंप दी जाए। इस मकसद के लिए उन्होंने अरबों डॉलर का इंतजाम करने तक की तैयारी कर ली थी। लेकिन कहानी ने जो रुख लिया, उसकी उम्मीद शायद किसी को नहीं थी। जॉब्स ने यह प्रस्ताव मानने से साफ मना कर दिया।

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एलिसन ने कर ली थी पूरी घेराबंदी

एक कार्यक्रम में बातचीत के दौरान एलिसन ने खुद इस किस्से का जिक्र किया था। उस समय एपल की कुल कीमत लगभग 5 अरब डॉलर आंकी गई थी, जो आज के हिसाब से करीब ₹41,500 करोड़ बैठती है। एलिसन ने इतनी बड़ी रकम जुटाने का पूरा खाका तैयार कर लिया था। उनकी सोच बिल्कुल सीधी थी, पहले कंपनी को खरीदो और उसी दिन जॉब्स को उसका CEO घोषित कर दो। उस दौर में एपल की माली हालत बेहद पतली थी, नुकसान थमने का नाम नहीं ले रहा था और निवेशकों का भरोसा भी दिन ब दिन कमजोर पड़ता जा रहा था। एलिसन को यकीन था कि सिर्फ जॉब्स की वापसी ही इस डूबती नाव को किनारे लगा सकती है। मगर यह पूरी योजना कागजों से आगे नहीं बढ़ पाई, क्योंकि जॉब्स इसके लिए राजी ही नहीं हुए।

इतना बड़ा मौका ठुकराने की वजह

उन दिनों जॉब्स अपनी अलग कंपनी नेक्स्ट को चला रहे थे। उनका तर्क था कि वे महज एक कुर्सी पाने के लिए एपल में लौटना नहीं चाहते। उनकी शर्त कुछ और थी, वे चाहते थे कि एपल खुद आगे बढ़कर उनकी कंपनी नेक्स्ट को खरीदे और अपनी जरूरत के मुताबिक उन्हें वापस बुलाए। जॉब्स ने यह भी दो टूक कहा था कि उनका मकसद पैसा बनाना नहीं है। उन्हें डर था कि किसी खरीद-फरोख्त या टेकओवर के जरिये कुर्सी पर बैठने से कर्मचारियों और पूरी इंडस्ट्री में गलत संदेश जाएगा। उनका पक्का मानना था कि सही और सम्मानजनक रास्ते से लौटने पर ही वे लोगों का दिल जीत पाएंगे और कंपनी को एक नई दिशा दे सकेंगे।

फिर बदल गई तस्वीर

आखिरकार दिसंबर 1996 में एपल ने नेक्स्ट को करीब 429 मिलियन डॉलर में खरीद लिया। इसके साथ ही जॉब्स पहले एक सलाहकार के रूप में कंपनी से जुड़े और साल 1997 में अंतरिम CEO की भूमिका में आ गए। उनकी अगुवाई में एपल ने एक के बाद एक कई बड़े और जोखिम भरे फैसले लिए। इसके बाद जो हुआ, वह इतिहास बन गया। आईमैक, आईपॉड, आईफोन जैसे उत्पादों ने कंपनी की पूरी तस्वीर ही पलट कर रख दी। नतीजा आज सबके सामने है, एपल दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों की कतार में खड़ी है और इसका बाजार मूल्य 3.7 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को भी पार कर चुका है। अगर उस वक्त एलिसन का खरीदने वाला दांव चल जाता, तो मुमकिन है कि एपल की कहानी कुछ और ही होती। पर जॉब्स ने जिस राह को चुना, उसी ने उन्हें दोबारा कंपनी की कमान दिलाई और एपल को कामयाबी की उन ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया, जिन्हें आज बिजनेस जगत की सबसे बड़ी वापसी की मिसालों में गिना जाता है।

सवाल-जवाब

एपल किस दौर में आर्थिक संकट से जूझ रही थी?
नब्बे के दशक के बीच वाले सालों में एपल लगातार घाटे में थी, कर्मचारियों की छंटनी हो रही थी और उसके शेयर के भाव तेजी से गिर रहे थे।
लैरी एलिसन का प्लान क्या था?
ओरेकल के फाउंडर लैरी एलिसन एपल को खरीदकर उसी दिन अपने दोस्त स्टीव जॉब्स को कंपनी का CEO बनाना चाहते थे।
उस समय एपल की कीमत कितनी आंकी गई थी?
उस समय एपल की कुल कीमत करीब 5 अरब डॉलर थी, जो आज के हिसाब से लगभग ₹41,500 करोड़ बैठती है।
स्टीव जॉब्स ने यह प्रस्ताव क्यों ठुकराया?
वे सिर्फ CEO की कुर्सी के लिए लौटना नहीं चाहते थे और उन्हें डर था कि टेकओवर से कर्मचारियों और इंडस्ट्री में गलत संदेश जाएगा।
एपल ने नेक्स्ट को कब और कितने में खरीदा?
दिसंबर 1996 में एपल ने स्टीव जॉब्स की कंपनी नेक्स्ट को करीब 429 मिलियन डॉलर में खरीदा।
स्टीव जॉब्स एपल के CEO कब बने?
वे पहले सलाहकार के तौर पर जुड़े और साल 1997 में कंपनी के अंतरिम CEO बन गए।
आज एपल का बाजार मूल्य कितना है?
आज एपल दुनिया की टॉप कंपनियों में शामिल है और इसका बाजार मूल्य 3.7 ट्रिलियन डॉलर से भी ज्यादा पहुंच चुका है।
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