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पत्नी की प्रेरणा से बुरहानपुर के किसान ने छोड़ी केमिकल खेती, 5 एकड़ में प्राकृतिक कृषि से पाई सफलतासक्सेस स्टोरी
18 अग॰ 2026, 1:56 pm (2 घंटे पहले)· 3

पत्नी की प्रेरणा से बुरहानपुर के किसान ने छोड़ी केमिकल खेती, 5 एकड़ में प्राकृतिक कृषि से पाई सफलता

बुरहानपुर के एक झिरा गांव निवासी सुपडू चौहान ने पत्नी की प्रेरणा से रासायनिक खेती छोड़ प्राकृतिक खेती अपनाई, जिससे लागत घटी और 8 से 10 लोगों को रोजगार भी मिला।

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में प्राकृतिक खेती का चलन तेजी से बढ़ रहा है, जिससे किसानों की खेती की लागत घटने के साथ मुनाफा भी बढ़ रहा है। जिले के एक झिरा गांव निवासी किसान सुपडू चौहान ने करीब आठ साल पहले रासायनिक खादों और जहरीले कीटनाशकों का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर दिया था। अपनी पत्नी की सलाह पर प्राकृतिक खेती अपनाने वाले सुपडू आज न केवल बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं, बल्कि अपने गांव में अन्य लोगों को रोजगार भी उपलब्ध करा रहे हैं।

पत्नी की प्रेरणा से रासायनिक खेती का त्याग

कक्षा 12वीं तक शिक्षित सुपडू चौहान पहले अपने खेतों में पारंपरिक तरीके से रासायनिक खाद और महंगे कीटनाशकों का इस्तेमाल किया करते थे। उनकी जिंदगी में मोड़ तब आया जब आठ साल पहले उनकी पत्नी एक स्थानीय स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। इस समूह की बैठकों में उनकी पत्नी को प्राकृतिक खेती तथा जैविक तरीकों के फायदों की जानकारी मिली। जब पत्नी ने घर आकर प्राकृतिक खेती से होने वाले आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी लाभों के बारे में बताया, तो सुपडू ने तुरंत अपनी खेती का तरीका बदलने का फैसला किया और धीरे-धीरे रसायनों से दूरी बना ली।

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खेत में ही खाद निर्माण और फसलों का विविधीकरण

बाजार से महंगी खाद और दवाइयां खरीदने के बजाय सुपडू अपने खेत पर ही केंचुआ खाद और वर्मी कंपोस्ट खुद तैयार करते हैं। इसके साथ ही फसलों को कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए वे पूरी तरह प्राकृतिक नीम अस्त्र का प्रयोग करते हैं। अपनी 5 एकड़ जमीन पर वे मिश्रित खेती की तकनीक अपनाते हैं, जिसमें तुअर, मक्का और विभिन्न प्रकार की हरी सब्जियां उगाई जाती हैं। इस जैविक दृष्टिकोण से उनकी कृषि लागत में भारी कमी आई है और फसलों की गुणवत्ता भी पहले से बेहतर हुई है।

घर बैठे सीधी बिक्री और रोजगार का निर्माण

प्राकृतिक तरीके से उगाई गई फसलों से तैयार दाल और आटा खरीदने के लिए आसपास के लोग सीधे सुपडू के घर और खेत पर पहुंचते हैं। इससे उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए मंडियों या बाजारों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। अपनी आय बढ़ाने के अलावा, सुपडू अपनी 5 एकड़ जमीन पर 8 से 10 स्थानीय लोगों को नियमित रोजगार भी दे रहे हैं। उनका लक्ष्य अपनी खेती का दायरा बढ़ाते हुए आगे और भी अधिक ग्रामीणों को रोजगार के अवसरों से जोड़ना है।

सवाल-जवाब

सुपडू चौहान ने प्राकृतिक खेती शुरू करने की प्रेरणा कहां से प्राप्त की?
सुपडू चौहान को प्राकृतिक खेती करने की प्रेरणा अपनी पत्नी से मिली, जिन्होंने स्वयं सहायता समूह में इसके फायदों के बारे में सीखा था।
सुपडू चौहान कितने वर्षों से और कितने एकड़ में प्राकृतिक खेती कर रहे हैं?
वे पिछले 8 वर्षों से अपनी 5 एकड़ भूमि पर प्राकृतिक और मिश्रित खेती कर रहे हैं।
वे रासायनिक खाद के विकल्प के रूप में खेत में किन चीजों का उपयोग करते हैं?
वे बाजार से रासायनिक खाद खरीदने के बजाय खुद तैयार केंचुआ खाद, वर्मी कंपोस्ट और प्राकृतिक कीटनाशक नीम अस्त्र का उपयोग करते हैं।
सुपडू चौहान के खेत में कौन-कौन सी फसलें उगाई जाती हैं?
उनके 5 एकड़ के खेत में तुअर, मक्का और विभिन्न प्रकार की सब्जियां उगाई जाती हैं।
प्राकृतिक खेती से उनके व्यापार और रोजगार पर क्या प्रभाव पड़ा है?
लोग सीधे उनके घर और खेत से दाल और आटा खरीदते हैं, और वे 8 से 10 स्थानीय लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं।
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