उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के युवा सूरज विश्वकर्मा ने भारतीय रेलवे की लोको पायलट परीक्षा अपने पहले ही प्रयास में पास करके एक बड़ी मिसाल कायम की है। साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले सूरज ने अनुशासित दिनचर्या और दृढ़ संकल्प के बल पर यह उपलब्धि हासिल की है। परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद जब वह अपने घर पहुंचे, तो परिवार और पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई। हालांकि सूरज इस सफलता को अपनी मंजिल नहीं बल्कि पहला पड़ाव मानते हैं, क्योंकि उनका अंतिम सपना उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की पीसीएस परीक्षा पास कर अधिकारी बनने का है।
शुरुआती शिक्षा से लेकर आजमगढ़ पॉलिटेक्निक तक का सफर
सूरज विश्वकर्मा की प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा उनके क्षेत्र के स्थानीय स्कूलों में हुई। इसके बाद उन्होंने मुहम्मदाबाद गोहना स्थित टाउन इंटर कॉलेज से अपनी इंटरमीडिएट परीक्षा उत्तीर्ण की। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कदम बढ़ाते हुए सूरज ने तकनीकी शिक्षा का विकल्प चुना और राजकीय पॉलिटेक्निक, आजमगढ़ में प्रवेश लिया। वहां से अपनी डिप्लोमा की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी। सूरज को बचपन से ही भारतीय रेलवे प्रणाली में विशेष रुचि थी, इसलिए उन्होंने अपने पेशेवर सफर की शुरुआत के लिए सबसे पहले लोको पायलट की परीक्षा को चुना।
8 से 9 महीने की कड़ी मेहनत और एकाग्रता की रणनीति
लोको पायलट की परीक्षा को पहली ही बार में निकालने के लिए सूरज ने लगभग 8 से 9 महीने तक लगातार पढ़ाई की। उनकी रणनीति यह थी कि सालों तक तैयारी में समय बिताने के बजाय एक निश्चित समय सीमा में पूरी ताकत लगा दी जाए। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए उन्होंने अपनी दैनिक जीवनशैली में बदलाव किए। तैयारी के दौरान उन्होंने दोस्तों, रिश्तेदारों और सामाजिक आयोजनों से दूरी बनाए रखी और अपना अधिकांश समय अध्ययन सामग्री के साथ बिताया। हालांकि मन में यह आशंका जरूर रहती थी कि परिणाम क्या होगा, लेकिन अपनी मेहनत पर उन्हें पूरा भरोसा था। उन्होंने बताया कि अध्यापकों के सही मार्गदर्शन के कारण उन्हें किसी भी विषय को समझने में विशेष परेशानी नहीं हुई।
घर लौटने पर हुआ भव्य स्वागत और अपनों का प्रोत्साहन
चयन की सूचना मिलने के बाद जब सूरज अपने घर लौटे, तो उनके परिवार के लिए यह बेहद भावुक और सरप्राइज देने वाला क्षण था। उनकी इस सफलता की खबर फैलते ही बधाई देने वालों का घर पर तांता लग गया। स्थानीय नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि दीपक गुप्ता 'डायमंड' भी सूरज के घर पहुंचे और उन्हें पुष्पगुच्छ तथा कप देकर सम्मानित किया। सूरज ने इस अवसर पर कहा कि जिन लोगों की गोद में खेलकर वह बड़े हुए हैं, उन्हीं के हाथों सम्मान पाना उनके लिए अत्यंत गर्व की बात है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय परिवार के अटूट सहयोग और अपने शिक्षकों के मार्गदर्शन को दिया।
लोको पायलट के बाद अब पीसीएस अधिकारी बनने का लक्ष्य
सूरज के अनुसार लोको पायलट बनना उनके शुरुआती सपनों में से एक था, लेकिन उनका सफर यहीं समाप्त नहीं होता। अब वह राज्य प्रशासनिक सेवाओं की ओर अपना ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। दीपक गुप्ता 'डायमंड' ने इस अवसर पर सूरज की तारीफ करते हुए कहा कि सूरज उनके पड़ोस में ही रहते हैं और बचपन से छोटे भाई की तरह रहे हैं। उनका यह चयन पूरे नगर पंचायत के लिए सम्मान की बात है। उन्होंने यह भी कहा कि सूरज के पीसीएस बनने के सपने को पूरा करने के लिए अगर भविष्य में किसी भी तरह की आर्थिक या अन्य सहायता की आवश्यकता होगी, तो वह हर संभव मदद प्रदान करेंगे।



















