न्यूजीलैंड दौरे पर देवदत्त पडिक्कल का शानदार शतक, साई सुदर्शन सिर्फ 8 रन से चुकेवेस्टइंडीज के खिलाफ पहले टेस्ट से बाहर रह सकते हैं लिटन दास, चोट के बावजूद चयन को लेकर असमंजससाउथ अभिनेता अर्जुन सरजा के घर गूंजी शहनाइयां, बेटी अंजना अर्जुन ने लॉन्गटाइम पार्टनर इसाई संग रचाई दो अलग रीति-रिवाजों से शादीनेपाल प्रीमियर लीग में पाकिस्तानी क्रिकेटरों की राह में अड़चन, NOC को लेकर खड़ी हुई बड़ी मुश्किलउड़ता तीर बॉक्स ऑफिस कलेक्शन डे 3: आयुष्मान खुराना और सारा अली खान की फिल्म ने पहले वीकेंड पर कमाए इतने करोड़भारत और न्यूजीलैंड के बीच तीसरे टी20 मुकाबले की तारीख, समय और वेन्यू की पूरी जानकारीफिल्मों में आने से पहले ही शक्ति कपूर की तस्वीर पान की दुकान पर लगाता था एक शख्स, भविष्य को लेकर कही थी बड़ी बातशादाब खान के ऐतिहासिक शतक से इंग्लैंड चित, पाकिस्तान ने दर्ज की रोमांचक जीतटाइगर श्रॉफ पर हमले को लेकर वायरल बयानों पर सफाई, प्रवक्ता ने दावों को बताया पूरी तरह फर्जीमुंबई में कृष्णा दास के कीर्तन में भक्तिमय हुए अनुष्का शर्मा और विराट कोहली
सीतामढ़ी के किसान की अनूठी पहल: खेतों में उगा रहे रंगीन बांस, फर्नीचर उद्योग में जगाई नई उम्मीदसक्सेस स्टोरी
8 जुल॰ 2026, 11:36 pm (113 दिन पहले)· 2

सीतामढ़ी के किसान की अनूठी पहल: खेतों में उगा रहे रंगीन बांस, फर्नीचर उद्योग में जगाई नई उम्मीद

सीतामढ़ी के उमेश यादव ने पारंपरिक खेती को छोड़कर पिंक और पीले बांस की खेती शुरू की है। यह अनोखा बांस फर्नीचर निर्माण के लिए बेहद उपयुक्त है और बिना किसी पॉलिश के चमकता है।

सीतामढ़ी जिले के निवासी और प्रगतिशील किसान उमेश यादव ने खेती के पारंपरिक ढर्रे से अलग हटकर एक ऐसी मिसाल पेश की है जो आज के दौर में कृषि विविधीकरण का एक बड़ा उदाहरण बन गई है। उन्होंने अपने खेतों में धान या गेहूं जैसी आम फसलों के बजाय पिंक बांस, पीले बांस और विशेष प्रकार के बेंत वाले बांस की उन्नत प्रजातियों को उगाना शुरू किया है। उनकी यह अनूठी और साहसी शुरुआत न केवल स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है, बल्कि कृषि में आय के नए विकल्प भी तलाश रही है।

बिना पॉलिश के चमकते फर्नीचर का आधार

इन खास प्रजातियों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनका बांस बहुत ही चिकना और गांठ रहित होता है। पारंपरिक बांसों की तुलना में इनमें कांटेदार हिस्से बहुत कम होते हैं, जो इन्हें फर्नीचर बनाने के लिए एक बेहतरीन कच्चा माल बनाते हैं। इनसे तैयार किया गया सोफा, कुर्सी या टेबल इतना आकर्षक होता है कि उसे बाजार में बेचने के लिए किसी भी अतिरिक्त रंग या पॉलिश की जरूरत नहीं पड़ती। यही प्राकृतिक चमक इस फर्नीचर की सबसे बड़ी पहचान बन गई है, जिसके कारण बाजार में इसकी मांग में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है।

ये भी पढ़ें

प्रसंस्करण इकाइयों की कमी से मुनाफे पर असर

हालांकि, उमेश यादव की इस मेहनत को स्थानीय स्तर पर सही बाजार नहीं मिल पा रहा है। इलाके में आधुनिक प्रोसेसिंग प्लांट की भारी कमी है, जिसके कारण उन्हें अपनी बेहतरीन फसल को मजबूरन बाहर की मंडियों में औने-पौने दामों पर बेचना पड़ता है। वर्तमान में यह उन्नत बांस बाजार में 125 से 150 रुपये की मामूली दर पर बिक रहा है। उमेश यादव का मानना है कि यदि प्रशासन स्तर पर उन्हें आधुनिक मशीनें और प्रसंस्करण सुविधाएं मिल जाएं, तो वे यहीं अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता का फर्नीचर तैयार कर सकते हैं। इससे न केवल उनकी कमाई बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

खेती की लागत और भविष्य की संभावनाएं

उमेश यादव स्पष्ट करते हैं कि इस विशेष बांस की खेती में कोई अतिरिक्त खर्च नहीं आता है, इसकी लागत बिल्कुल सामान्य बांस के बराबर ही होती है। इसके अलावा, बेंत वाले बांस की खासियत यह है कि इसे गर्म पानी में डालकर आसानी से मोड़ा जा सकता है, जिससे बेहद घुमावदार और सुंदर डिजाइन तैयार किए जाते हैं। उमेश यादव का यह प्रयास यह साबित करने के लिए पर्याप्त है कि सही सोच, आधुनिक तकनीक का सही चुनाव और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने का संकल्प हो, तो किसानों की आय और जीवन स्तर में एक बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

सवाल-जवाब

उमेश यादव कौन सी प्रजाति के बांस की खेती कर रहे हैं?
उमेश यादव मुख्य रूप से पिंक बांस, पीले बांस और विशेष बेंत वाले बांस की खेती कर रहे हैं।
इस बांस से बने फर्नीचर की क्या खासियत है?
इस बांस में गांठें कम होती हैं और यह प्राकृतिक रूप से इतना चमकदार होता है कि इस पर अलग से पॉलिश या रंग लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
उमेश यादव को बांस की उपज बेचने में क्या समस्या आ रही है?
स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग प्लांट और आधुनिक मशीनों की कमी के कारण उन्हें अपनी उपज को बाहर के बाजारों में कम दामों पर बेचना पड़ रहा है।
इस बांस का वर्तमान बाजार मूल्य क्या है?
वर्तमान में यह उन्नत बांस बाजार में 125 से 150 रुपये की सामान्य कीमत पर बिक रहा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp