मैथ्स में 51 नंबर से ISRO साइंटिस्ट तक, फिर 9 हजार करोड़ की रॉकेट कंपनी खड़ी करने वाले पवन कुमार चंदाना की कहानीसक्सेस स्टोरी
2 घंटे पहले· 2

मैथ्स में 51 नंबर से ISRO साइंटिस्ट तक, फिर 9 हजार करोड़ की रॉकेट कंपनी खड़ी करने वाले पवन कुमार चंदाना की कहानी

हैदराबाद के पवन कुमार चंदाना स्कूल में गणित में सिर्फ 51 नंबर लाए थे, लेकिन आज वे भारत की सबसे बड़ी निजी रॉकेट कंपनी Skyroot Aerospace के सह-संस्थापक हैं, जिसकी वैल्यू करीब 1.1 अरब डॉलर आंकी जा रही है।

एक छात्र जिसे स्कूल में गणित जैसे विषय में सिर्फ 51 नंबर मिले हों, उसे शायद ही कोई भविष्य का रॉकेट वैज्ञानिक मानता। लेकिन हैदराबाद में जन्मे पवन कुमार चंदाना ने इसी रास्ते को पूरी तरह पलट दिया। आज वे भारत की सबसे बड़ी निजी रॉकेट निर्माण कंपनी Skyroot Aerospace के सह-संस्थापक हैं, वही कंपनी जिसने भारत का पहला निजी तौर पर विकसित रॉकेट अंतरिक्ष तक पहुंचाकर इतिहास रच दिया। कंपनी की मौजूदा वैल्यू करीब 1.1 अरब डॉलर यानी 9 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा आंकी जा रही है।

एक कमजोर छात्र से शुरुआत

पवन कुमार चंदाना का जन्म 1991 में तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। मशीनों और टेक्नोलॉजी के प्रति उनका झुकाव बचपन से ही था, मगर पढ़ाई में उनका प्रदर्शन ऐसा नहीं था जो किसी को प्रभावित करे। स्कूल के दिनों में एक बार गणित में उनके सिर्फ 51 अंक आए। इसके बावजूद उनके पिता ने उम्मीद नहीं छोड़ी और बेटे को IIT-JEE की तैयारी के लिए कोचिंग में दाखिला दिला दिया। यही मोड़ पवन की जिंदगी की दिशा बदलने वाला साबित हुआ। प्रवेश परीक्षा की तैयारी के दौरान न सिर्फ उनकी पढ़ाई पटरी पर आई, बल्कि गणित और विज्ञान उनके पसंदीदा विषय बन गए।

IIT खड़गपुर और रॉकेट का सपना

मेहनत रंग लाई और साल 2007 में उन्होंने पहले ही प्रयास में IIT-JEE पास कर ली। इसके बाद उन्हें देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT खड़गपुर में दाखिला मिला, जहां उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में ड्यूल बीटेक-एमटेक की डिग्री हासिल की। जिस वक्त उनके कई सहपाठी मोटी सैलरी वाली नौकरियों और विदेश में करियर बनाने की योजना बना रहे थे, उस समय पवन का मन रॉकेट और अंतरिक्ष विज्ञान में रमता जा रहा था।

ISRO में वैज्ञानिक के तौर पर सफर

2012 में पढ़ाई पूरी करते ही पवन सीधे कैंपस प्लेसमेंट के जरिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में वैज्ञानिक बन गए। उन्हें केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर में काम करने का मौका मिला। शुरुआत में उनका सपना ISRO से ही रिटायर होने का था और वे अपने काम से बेहद संतुष्ट थे। करीब छह साल तक उन्होंने यहां कई अहम परियोजनाओं पर काम किया और भारत के बड़े अंतरिक्ष कार्यक्रमों में योगदान दिया। उन्होंने भारत के सबसे भारी लॉन्च व्हीकल GSLV Mk-III पर काम किया, GSLV Mk-II के S-200 सॉलिड बूस्टर के विकास में हिस्सा लिया और ISRO के स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SSLV) परियोजना में डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर की जिम्मेदारी निभाई। उनके इनोवेशन और योगदान को देखते हुए साल 2016 में उन्हें ISRO का इंटरनल इनोवेशन प्राइज भी दिया गया।

सुरक्षित नौकरी छोड़ने का बड़ा फैसला

ISRO में काम करते-करते पवन के मन में एक बड़ी सोच ने जन्म लिया। वे भारत में निजी स्पेस टेक्नोलॉजी कंपनी खड़ी करना चाहते थे। दिक्कत यह थी कि उस दौर में निजी कंपनियों को रॉकेट बनाने की इजाजत ही नहीं थी और इस क्षेत्र में निवेश भी लगभग न के बराबर था। फिर भी उन्होंने अपने सपने को टूटने नहीं दिया और साल 2018 में ISRO की सुरक्षित नौकरी छोड़ने का फैसला कर लिया। यह कदम बिल्कुल आसान नहीं था, क्योंकि उनके पास न तो बिजनेस का कोई अनुभव था और न ही निवेशकों का बड़ा नेटवर्क।

LinkedIn के एक मैसेज से मिला पहला निवेशक

अपनी कंपनी के लिए पूंजी जुटाने की तलाश में पवन ने एक दिलचस्प रास्ता अपनाया। उन्होंने LinkedIn पर Myntra, CureFit और NURX के संस्थापक Mukesh Bansal को सीधे संदेश भेज दिया। संयोग से Mukesh Bansal भी IIT खड़गपुर के पूर्व छात्र रह चुके थे। उन्हें पवन के विजन पर भरोसा हुआ और उन्होंने कंपनी में 15 लाख डॉलर का शुरुआती निवेश कर दिया। यही पहली पूंजी आगे चलकर भारत के सबसे बड़े स्पेस स्टार्टअप्स में से एक की बुनियाद बनी।

Skyroot Aerospace की स्थापना

जून 2018 में पवन कुमार चंदाना ने अपने साथी और पूर्व ISRO इंजीनियर नागा भरत डाका के साथ मिलकर हैदराबाद में Skyroot Aerospace की नींव रखी। नागा भरत डाका IIT बॉम्बे के पूर्व छात्र हैं और वे भी ISRO में काम कर चुके थे। कंपनी की शुरुआत के कुछ ही समय बाद कोरोना महामारी आ गई, जिसने निवेश जुटाना और मुश्किल कर दिया। ऐसे कठिन दौर में Greenko के संस्थापकों ने कंपनी को वित्तीय मदद दी और Skyroot का सफर थमने के बजाय आगे बढ़ता रहा।

रॉकेट इंजन टेस्ट करने वाली पहली निजी कंपनी

जुलाई 2020 में Skyroot Aerospace ने एक और मुकाम हासिल किया। यह भारत की पहली निजी कंपनी बनी जिसने सफलतापूर्वक रॉकेट इंजन का परीक्षण किया। इस क्रायोजेनिक इंजन को नाम दिया गया रमन-1, जो नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक सी.वी. रमन के सम्मान में रखा गया था।

सरकार ने खोले स्पेस सेक्टर के दरवाजे

साल 2021 भारतीय स्पेस उद्योग के लिए ऐतिहासिक बदलाव लेकर आया। केंद्र सरकार ने पहली बार निजी कंपनियों के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र खोल दिया और इसका सबसे बड़ा लाभ Skyroot Aerospace को मिला। कंपनी ISRO के साथ समझौता (MoU) करने वाली पहली निजी भारतीय स्पेस कंपनी बन गई। इसके बाद उसने 5.1 करोड़ डॉलर का निवेश हासिल किया, जो उस समय भारत के डीप-टेक सेक्टर के सबसे बड़े निवेशों में गिना गया।

अंतरिक्ष में भारत का पहला निजी रॉकेट

18 नवंबर 2022 का दिन भारतीय अंतरिक्ष इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गया। इसी दिन Skyroot Aerospace ने विक्रम-S लॉन्च किया, जो भारत का पहला निजी तौर पर विकसित सब-ऑर्बिटल रॉकेट था। श्रीहरिकोटा स्थित ISRO के लॉन्च सेंटर से उड़ान भरकर यह रॉकेट करीब 90 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंचा। इस मिशन को नाम दिया गया था मिशन प्रारंभ, जिसका अर्थ है शुरुआत।

पीएम मोदी ने किया नई फैक्ट्री का उद्घाटन

विक्रम-S की कामयाबी के बाद Skyroot Aerospace ने तेज रफ्तार से तरक्की की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कंपनी की नई अत्याधुनिक सुविधा का उद्घाटन किया। इसी दौर में कंपनी का विस्तार हुआ और कर्मचारियों की संख्या बढ़कर करीब 1,000 तक पहुंच गई। आज Skyroot के पास भारत की सबसे बड़ी निजी रॉकेट निर्माण इकाई है। 7 मई 2026 को कंपनी ने एक और बड़ी छलांग लगाई और नई फंडिंग के जरिए 6 करोड़ डॉलर जुटाए।

सवाल-जवाब

Skyroot Aerospace के सह-संस्थापक कौन हैं?
हैदराबाद में जन्मे पवन कुमार चंदाना, जिन्होंने जून 2018 में पूर्व ISRO इंजीनियर नागा भरत डाका के साथ मिलकर कंपनी की स्थापना की।
विक्रम-S रॉकेट कब और कहां से लॉन्च हुआ?
18 नवंबर 2022 को श्रीहरिकोटा स्थित ISRO के लॉन्च सेंटर से, और यह करीब 90 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंचा। यह भारत का पहला निजी तौर पर विकसित सब-ऑर्बिटल रॉकेट था।
पवन कुमार चंदाना को पहला निवेश किससे मिला?
Myntra, CureFit और NURX के संस्थापक Mukesh Bansal से, जिन्हें उन्होंने LinkedIn पर सीधा मैसेज भेजा था और जिन्होंने 15 लाख डॉलर का शुरुआती निवेश किया।
Skyroot Aerospace की मौजूदा वैल्यू कितनी है?
कंपनी की वैल्यू करीब 1.1 अरब डॉलर यानी 9 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा आंकी जा रही है।
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