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जमशेदपुर की वारखा ने कैसे कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ बनाई हर्बल ब्यूटी ब्रांड की पहचानसक्सेस स्टोरी
13 जुल॰ 2026, 10:50 am (45 दिन पहले)· 4

जमशेदपुर की वारखा ने कैसे कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ बनाई हर्बल ब्यूटी ब्रांड की पहचान

जमशेदपुर की रहने वाली वारखा ने एक अच्छी कॉर्पोरेट सैलरी वाली नौकरी को अलविदा कहकर अपना खुद का नेचुरल ब्यूटी स्टार्टअप शुरू किया है। आज उनके हर्बल उत्पाद भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी काफी पसंद किए जा रहे हैं।

आज के समय में जब युवा अक्सर बड़े पैकेज और नामी कंपनियों की नौकरियों के पीछे भागते हैं, जमशेदपुर की वारखा ने एक अलग और साहसी रास्ता अपनाया है। वारखा पहले हैदराबाद की एक बड़ी कॉर्पोरेट फर्म में अच्छी तनख्वाह वाली भूमिका में काम कर रही थीं, लेकिन उन्हें वहां मानसिक शांति और संतोष की कमी महसूस हो रही थी। उन्होंने गौर किया कि आजकल लोगों में स्किन की समस्याएं बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं और बाजार में मौजूद ज्यादातर ब्यूटी प्रोडक्ट्स में हानिकारक केमिकल्स भरे हुए हैं। यहीं से उनके मन में एक स्वस्थ और सुरक्षित विकल्प देने का विचार आया।

सपनों के लिए छोड़ी नौकरी

वारखा ने एक बड़ा जोखिम उठाते हुए अपनी स्थिर नौकरी से इस्तीफा दे दिया और अपनी मां के साथ मिलकर 'डिवाइन क्राफ्ट बाय वारखा' नामक अपना खुद का स्टार्टअप खड़ा करने की शुरुआत की। शुरुआत में उनके पास संसाधनों की काफी कमी थी और बाजार में अपनी पहचान बनाना उनके लिए एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन उन्होंने अपने इरादों में कोई कमी नहीं आने दी। उन्होंने अपना पूरा ध्यान पूरी तरह से हर्बल और प्राकृतिक चीजों से तैयार उत्पादों पर लगाया।

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प्राकृतिक सामग्री का जादू

उनके स्टार्टअप द्वारा बनाए गए उत्पादों में मसूर दाल फेस स्क्रब, चावल के साबुन, हर्बल फेस पैक, कुमकुमादी सीरम, प्राकृतिक क्रीम और लिप ग्लॉस जैसे कई बेहतरीन विकल्प शामिल हैं। ये उत्पाद बनाने में गुलाब, लैवेंडर और कई प्रकार की जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया जाता है। वारखा का मानना है कि प्रकृति में हर परेशानी का समाधान है और वे इसे सही तरीके से आम ग्राहकों तक पहुंचाना चाहती हैं।

गुणवत्ता और विश्वास का सफर

शुरुआत के दिनों में वारखा को ग्राहकों का भरोसा जीतने और बाजार में जगह बनाने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ा। लेकिन समय के साथ उनके प्रोडक्ट्स की गुणवत्ता ने ही उनकी सबसे बड़ी ताकत का काम किया। आज स्थिति यह है कि उनके ग्राहक सिर्फ भारत के विभिन्न हिस्सों में ही नहीं हैं, बल्कि विदेशों में भी उनके उत्पादों की भारी मांग है। वारखा बताती हैं कि उनकी सफलता का पैमाना यह है कि एक बार जो ग्राहक उनके हर्बल उत्पाद इस्तेमाल करता है, वह बार-बार ऑर्डर देता है। इससे साफ पता चलता है कि लोग अब केमिकल युक्त उत्पादों से किनारा कर प्राकृतिक स्किनकेयर को प्राथमिकता दे रहे हैं।

युवाओं के लिए मिसाल

आज वारखा न केवल आत्मनिर्भर बनकर अपनी पहचान बना रही हैं, बल्कि अन्य युवाओं और युवतियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा भी बन गई हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि कामयाबी केवल तयशुदा नौकरी की राह पर चलकर ही नहीं, बल्कि अपने जुनून को पहचानकर उसे बिजनेस में बदलकर भी हासिल की जा सकती है। जमशेदपुर की इस उद्यमी ने अपनी कड़ी मेहनत और नई सोच के जरिए साबित किया है कि अगर सपने देखने का हौसला हो, तो उन्हें हकीकत में बदला जा सकता है।

सवाल-जवाब

वारखा ने अपनी कंपनी का क्या नाम रखा है?
वारखा ने अपनी कंपनी का नाम 'डिवाइन क्राफ्ट बाय वारखा' रखा है।
वारखा के उत्पादों में मुख्य रूप से क्या इस्तेमाल होता है?
उनके उत्पादों में चावल, मसूर दाल, गुलाब, लैवेंडर और विभिन्न प्रकार की प्राकृतिक जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया जाता है।
क्या वारखा के उत्पाद सिर्फ भारत में मिलते हैं?
नहीं, उनके उत्पाद भारत के अलावा विदेशों में भी बेचे जाते हैं।
वारखा ने नौकरी क्यों छोड़ी?
उन्हें अपनी कॉर्पोरेट नौकरी में संतोष नहीं मिल रहा था और वे लोगों को केमिकल-मुक्त स्किनकेयर विकल्प देना चाहती थीं।
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