₹40 से शुरू होती हैं रांची की पूर्णिमा की हैंडमेड राखियां, अपने ब्रांड और सोशल मीडिया से बनाई पहचान — पढ़ें कमाई का पूरा फॉर्मूलासक्सेस स्टोरी
3 घंटे पहले· 2

₹40 से शुरू होती हैं रांची की पूर्णिमा की हैंडमेड राखियां, अपने ब्रांड और सोशल मीडिया से बनाई पहचान — पढ़ें कमाई का पूरा फॉर्मूला

रांची की पूर्णिमा हाथों से अनोखी राखियां बनाकर अपना ब्रांड चलाती हैं और सिर्फ जुलाई-अगस्त के दो महीनों में अच्छी कमाई करती हैं। शिवलिंग से लेकर मांगटीका राखी तक उनका यूनिक कलेक्शन इंस्टाग्राम-फेसबुक के जरिए बेंगलुरु, दिल्ली और कोलकाता तक पहुंचता है।

झारखंड की राजधानी रांची की रहने वाली पूर्णिमा के लिए रक्षाबंधन सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि साल का सबसे बड़ा कारोबारी मौका है। वह बताती हैं कि राखी आने से पूरे दो महीने पहले ही उनकी तैयारी जोर पकड़ लेती है। खास बात यह है कि वह हर राखी अपने हाथों से तैयार करती हैं और कलेक्शन इतना अलग रखती हैं कि वैसा दूसरा टुकड़ा शायद ही कहीं और मिले — और कीमत भी महज ₹40 से शुरू होती है।

उनके पास हर रिश्ते के लिए अलग डिजाइन मौजूद है। भाभी के लिए मांगटीका राखी है तो भाई के लिए शिवलिंग और गणेश की आकृति वाली राखी। यही विविधता उनकी पहचान बन चुकी है।

अपना ब्रांड, अपनी मेहनत

पूर्णिमा ने सिर्फ राखी बनाना ही नहीं सीखा, बल्कि उसे एक ब्रांड की शक्ल भी दी है और इसी नाम के तहत बिक्री करती हैं। नतीजा यह है कि जुलाई और अगस्त के सिर्फ इन्हीं दो महीनों में उन्हें अच्छी-खासी आमदनी हो जाती है। वह मानती हैं कि इस कमाई की सबसे बड़ी शर्त एक ही है — आपके पास ऐसा कलेक्शन हो जो बाकी किसी के पास बिल्कुल न हो।

सबसे जरूरी है — हटकर डिजाइन

पूर्णिमा का कहना है कि राखी खरीदने वाले लोग अक्सर कुछ नया और अनोखा ही तलाशते हैं। उन्हें यूनिक थाली और यूनिक राखी चाहिए होती है, और यही सोचकर उन्होंने शिवलिंग राखी जैसी डिजाइन तैयार की। उनके मुताबिक ऐसा सामान आसानी से कहीं और नहीं मिलता, इसलिए दुकान पर आने वाला ग्राहक एक नजर में पसंद करके उठा लेता है। उनकी सलाह साफ है — अगर इस तरह का कारोबार करना है तो डिजाइन की मौलिकता पर कोई समझौता नहीं चलेगा।

दूसरी बड़ी सहूलियत यह है कि इस काम में बहुत ज्यादा ब्रांडिंग या मार्केटिंग की झंझट नहीं रहती। अगर आपके पास वाकई अनोखा कलेक्शन है तो आप उसे बाजार में भी सप्लाई कर सकते हैं और मॉल में भी, जहां ऐसे यूनिक सामान की अच्छी मांग रहती है। इसके अलावा मेलों में स्टॉल लगाने का रास्ता भी खुला है — ठीक वैसे ही जैसे पूर्णिमा खुद लगाती हैं। वह बताती हैं कि ऐसे मेलों में लोग एक-एक बार में एक से दो हजार रुपये तक की खरीदारी कर जाते हैं।

इंस्टाग्राम और फेसबुक बने सबसे बड़े जरिए

आज के दौर में सोशल मीडिया की ताकत को पूर्णिमा अनदेखा नहीं करतीं। वह सुझाव देती हैं कि इंस्टाग्राम पर अपना पेज बनाकर राखियों के वीडियो डालिए, और यही काम फेसबुक पर भी कीजिए। उनका अनुभव है कि यहीं से सबसे तेज ऑर्डर मिलते हैं। उनके पास खुद बेंगलुरु, दिल्ली और कोलकाता जैसे शहरों से ऑर्डर आते हैं। हालांकि वह एक बात पर खास जोर देती हैं — वीडियो की क्वालिटी शानदार होनी चाहिए। उनकी सलाह है कि वीडियो को अच्छे से एडिट करवाइए, फिर देखिए कैसे ऑर्डर आने का सिलसिला शुरू हो जाता है।

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