शुरुआती जीवन और संघर्ष
आंध्र प्रदेश में एक सामान्य परिवार में जन्मे Srikanth Bolla जन्म से ही दृष्टिबाधित थे। समाज ने उन्हें एक बोझ की तरह देखा और उनके परिवार को अक्सर ऐसे ताने सुनने को मिले जो मनोबल गिराने वाले थे। कुछ लोगों ने तो यहां तक कह दिया था कि उन्हें सड़क पर भीख मांगनी चाहिए। हालांकि, उनके माता-पिता ने उनका साथ कभी नहीं छोड़ा। बचपन से ही Srikanth Bolla अपनी पढ़ाई को लेकर बेहद गंभीर थे, लेकिन उनके लिए स्कूल और संस्थान पाना एक बड़ी चुनौती थी क्योंकि वे दृष्टिबाधित छात्रों के लिए तैयार नहीं थे।
शिक्षा का अधिकार और MIT तक का सफर
अपनी कक्षा 10 और 12 की परीक्षाओं में शानदार प्रदर्शन करने के बावजूद, Srikanth Bolla को विज्ञान पढ़ने से मना कर दिया गया। उस समय यह तर्क दिया गया कि एक दृष्टिबाधित छात्र विज्ञान नहीं पढ़ सकता। उन्होंने हार मानने के बजाय कानूनी लड़ाई लड़ी और अपने पसंदीदा विषय को पढ़ने का अधिकार हासिल किया। यही नहीं, उन्होंने हार नहीं मानी और अंततः अमेरिका में स्थित प्रतिष्ठित Massachusetts Institute of Technology (MIT) में प्रवेश पाने वाले पहले अंतरराष्ट्रीय दृष्टिबाधित छात्रों में से एक बने।
Bollant Industries की स्थापना
MIT में अपनी पढ़ाई के दौरान Srikanth Bolla ने महसूस किया कि दिव्यांग लोगों के लिए रोजगार के अवसर बहुत कम हैं। उन्होंने तय किया कि वे केवल अपने लिए नहीं बल्कि उन हजारों लोगों के लिए काम करेंगे जिन्हें समाज नजरअंदाज कर देता है। साल 2012 में उन्होंने Bollant Industries की नींव रखी। शुरुआत में लोगों ने उनका मजाक उड़ाया और सवाल किया कि एक दृष्टिबाधित व्यक्ति कंपनी कैसे चला सकता है, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य को नहीं बदला।
सफलता की कहानी
आज Bollant Industries पर्यावरण के अनुकूल उत्पाद बनाती है, जिसमें कृषि अपशिष्ट और पुनर्नवीनीकरण सामग्री का उपयोग किया जाता है। कंपनी 500 से अधिक लोगों को रोजगार देती है, जिनमें से बड़ी संख्या दिव्यांग और वंचित लोगों की है। आज कंपनी का मूल्यांकन लगभग ₹500 करोड़ है। इसके अलावा, Srikanth Bolla का नाम Forbes 30 Under 30 Asia की सूची में शामिल हो चुका है और वे लोकप्रिय शो Shark Tank India में एक निवेशक के रूप में भी नजर आए हैं।













