भारतीय क्रिकेट टीम इन दिनों लगातार खिलाड़ियों की फिटनेस समस्याओं और चोटों के दौर से गुजर रही है, जिससे मैनेजमेंट की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। हर आगामी सीरीज से पहले किसी न किसी मुख्य खिलाड़ी के चोटिल होने की खबर सामने आ जाती है, जिसके कारण वनडे और टेस्ट कप्तान शुभमन गिल ने भी सार्वजनिक रूप से अपनी गहरी निराशा व्यक्त की है। ऐसी स्थिति को देखते हुए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई अगले सप्ताह इस पूरे मामले पर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक करने की योजना बना रहा है, जिसमें टीम के सपोर्ट स्टाफ और विशेष रूप से फिजियोथेरेपिस्ट पर कड़ी कार्रवाई होने की पूरी संभावना जताई जा रही है।
कमलेश जैन के कामकाज पर उठे गंभीर सवाल
मीडिया में आई ताजा जानकारियों के अनुसार, टीम का प्रबंधन हेड फिजियोथेरेपिस्ट कमलेश जैन के काम और उनके प्रदर्शन को लेकर बोर्ड को अपना विस्तृत फीडबैक सौंपने वाला है। कमलेश जैन को साल 2022 में नितिन पटेल की जगह पर इस अहम पद की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अचानक से उनके भविष्य पर मंडराते संकट का मुख्य कारण यही माना जा रहा है कि भारतीय खिलाड़ी पिछले कुछ समय से लगातार अनफिट हो रहे हैं और चोट के कारण मैदान से बाहर बैठ रहे हैं। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर के युवा तेज गेंदबाज आकिब नबी को भी हाल ही में टीम में शामिल किया गया है, जिन्हें जसप्रीत बुमराह के रिप्लेसमेंट के रूप में देखा जा रहा है।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और कोचिंग सेटअप पर चर्चा
हेड फिजियो की भूमिका के अलावा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पर भी कई तरह के सवाल खड़े किए जा रहे हैं क्योंकि खिलाड़ियों का समय पर रिकवर न हो पाना बड़ी चुनौती बन गया है। कुछ सीनियर खिलाड़ी तो अब बोर्ड के आधिकारिक सेटअप से बाहर के निजी एक्सपर्ट्स की मदद लेने लगे हैं। इसके अलावा, सोहम देसाई की जगह एड्रियन ले रूक्स को स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच के रूप में लाए जाने से भी कुछ खिलाड़ियों में असंतोष देखा गया है। हेड कोच गौतम गंभीर और कप्तान दोनों के लिए यह स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण रही है क्योंकि उन्हें मैदान पर एक मजबूत और पूरी तरह फिट प्लेइंग इलेवन उतारने के लिए लगातार माथापच्ची करनी पड़ रही है। श्रीलंका के खिलाफ होने वाली आगामी टेस्ट सीरीज से पहले भी कई खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
शुभमन गिल ने जताई थी अपनी चिंता
इंग्लैंड में खेली गई पिछली सीमित ओवरों की सीरीज के दौरान भी यह मुद्दा कई बार चर्चा का केंद्र बना था। कप्तान और कोच दोनों ही इस बात से खफा हैं कि खिलाड़ियों की निरंतर अनुपलब्धता के कारण उन्हें अपनी पसंद की अंतिम एकादश मैदान पर उतारने का मौका नहीं मिल पा रहा है। इस पूरी समस्या पर खुलकर बात करते हुए कप्तान शुभमन गिल ने कहा था, “यह तब थोड़ा मुश्किल हो जाता है जब आप सुबह मैदान पर आते हैं और पता चलता है कि किसी खिलाड़ी को कोई समस्या है।”
भविष्य की रणनीतियां और फिटनेस में सुधार
कप्तान ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा था कि यह स्थिति जोखिम लेने जैसी हो जाती है कि अनफिट खिलाड़ी को मैदान पर उतारा जाए या नहीं। यदि कोई खिलाड़ी केवल अस्सी प्रतिशत फिट है और गेंदबाजी आक्रमण में पांच ही विकल्प मौजूद हैं, तो ऐसे में यदि वह कुछ ही ओवर फेंककर बाहर चला जाता है तो टीम के सामने बड़ा संकट खड़ा हो जाता है। यही कारण है कि पूरी टीम को सामूहिक रूप से अपनी फिटनेस के स्तर को सुधारने और इस दिशा में कड़े कदम उठाने की सख्त जरूरत है।


















