दृढ़ संकल्प और अनवरत परिश्रम से लिखी गई कहानियां अक्सर समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बनती हैं, और मोइन अहमद मंसूरी का जीवन सफर इसी का एक ज्वलंत उदाहरण है। अत्यधिक आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के बीच पले-बढ़े मोइन ने तमाम विपरीत परिस्थितियों को दरकिनार करते हुए संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा में सफलता प्राप्त की और भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी बनने का सपना पूरा किया। एक सामान्य परिवार से निकलकर देश की शीर्ष नौकरशाही तक पहुंचने का उनका यह सफर यह साबित करता है कि अटूट इच्छाशक्ति के आगे हर रुकावट छोटी पड़ जाती है।
अभावों से घिरा शुरुआती जीवन और पिता का संघर्ष
मोइन अहमद मंसूरी का बचपन वित्तीय कठिनाइयों के बीच बीता। उनके पिता राज्य परिवहन (रोडवेज) में बस चालक के रूप में कार्यरत थे और सीमित मासिक आय से किसी तरह परिवार का पालन-पोषण करते थे। घर के दैनिक खर्चों को पूरा करने के साथ-साथ पढ़ाई-लिखाई का प्रबंध करना एक निरंतर चुनौती बना रहता था। इन तंग हालातों के बावजूद पिता ने कभी हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने स्टेयरिंग संभालते हुए दिन-रात पसीना बहाया ताकि उनके बेटे की शिक्षा में कोई अड़चन न आए और उसके सपने अधूरे न रह जाएं।
पड़ोसियों के ताने और सामाजिक दबाव का सामना
आर्थिक तंगी के अलावा मोइन को सामाजिक उपेक्षा और लोगों के तीखे तानों का भी सामना करना पड़ा। जब वे घंटों पढ़ाई में जुटे रहते थे, तब आसपास के कई लोग उनकी क्षमताओं और महत्वाकांक्षाओं पर सवाल उठाते थे। एक बस ड्राइवर के बेटे को सिविल सेवा जैसे बड़े लक्ष्य की ओर बढ़ता देख कई लोगों ने उनका उपहास उड़ाया। कुछ पड़ोसियों ने तो यहां तक सलाह दे डाली कि पढ़ाई में समय नष्ट करने के बजाय उन्हें किसी काम में मजदूरी शुरू कर देनी चाहिए ताकि घर में दो पैसे की मदद हो सके।
इन कड़वी और कड़वाहट भरी बातों से मोइन का मन आहत जरूर हुआ, लेकिन उन्होंने अपना मानसिक संतुलन बनाए रखा। उन्होंने लोगों की बातों से हताश होने के बजाय उन तानों को अपनी सबसे बड़ी शक्ति में बदल लिया। जब भी लंबे समय तक पढ़ने के बाद वे थकान या निराशा महसूस करते, तो उन्हें अपने पिता के हाथों के छाले और लोगों की बातें याद आ जाती थीं। यही यादें उन्हें फिर से दोगुनी ऊर्जा के साथ किताबों में जुटने की प्रेरणा देती थीं।
बिना महंगी कोचिंग के तैयार की अपनी रणनीति
महंगे कोचिंग संस्थानों की फीस चुकाना उनके परिवार के लिए संभव नहीं था, इसलिए मोइन ने पूरी तरह स्व-अध्ययन पर निर्भर रहने का फैसला किया। उन्होंने यूपीएससी परीक्षा के पाठ्यक्रम का गहराई से विश्लेषण किया और अपनी पढ़ाई के लिए एक स्पष्ट तथा अनुशासित दिनचर्या तैयार की। सही अध्ययन सामग्री के चयन, निरंतर अभ्यास और खुद पर अटूट विश्वास के बल पर उन्होंने बिना किसी बड़े मार्गदर्शन के परीक्षा के सभी चरणों की तैयारी पूरी की।
परिणाम का दिन और बदलता नजरिया
वर्षों की कड़ी मेहनत और परिवार के त्याग का फल उस दिन मिला जब यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा का अंतिम परिणाम घोषित हुआ। मोइन ने न केवल परीक्षा उत्तीर्ण की, बल्कि बेहतरीन रैंक हासिल करके आईएएस अधिकारी के पद पर अपना चयन पक्का कर लिया। इस ऐतिहासिक क्षण ने पूरे परिवार की आंखों में खुशी के आंसू ला दिए। परिणाम आते ही उनके आसपास का माहौल पूरी तरह बदल गया। जो लोग कल तक उन्हें पढ़ाई छोड़कर मजदूरी करने का सुझाव देते थे, वही लोग ढोल-नगाड़ों और फूल-मालाओं के साथ उनके स्वागत में खड़े नजर आए।
पश्चिम बंगाल में प्रशासनिक जिम्मेदारी
वर्ष 2023 बैच के आईएएस अधिकारी के रूप में मोइन अहमद मंसूरी को पश्चिम बंगाल कैडर आवंटित किया गया। वर्तमान समय में वे जलपाईगुड़ी जिले के सदर सब-डिवीजन में उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) तथा उप-विभागीय अधिकारी (एसडीओ) के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनका यह प्रेरक सफर उन सभी अभ्यर्थियों के लिए एक शक्तिशाली संदेश है जो संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं, कि यदि इरादे मजबूत हों तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता।



















