भारत भर में बढ़ती बिजली मांग और बार-बार होने वाली बिजली कटौती के कारण रूफटॉप सोलर पैनल लगवाने की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी के बाद भी कई उपभोक्ताओं के मन में यह सवाल रहता है कि क्या सोलर पैनल से मिलने वाली बिजली और सरकारी विद्युत वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) की बिजली में कोई अंतर होता है। लोग यह भी जानना चाहते हैं कि क्या सोलर से चलने वाले कूलर, पंखे, फ्रिज और टीवी जैसे उपकरण ज्यादा लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं। काउंसिल ऑन एनर्जी एनवायरनमेंट एंड वॉटर की प्रोग्राम लीड भावना त्यागी के अनुसार, सही तकनीक का इस्तेमाल किया जाए तो सोलर और ग्रिड की बिजली गुणवत्ता में कोई बुनियादी अंतर नहीं होता है।
सोलर और ग्रिड की बिजली गुणवत्ता का तकनीकी सच
सोलर पैनल द्वारा उत्पन्न की गई बिजली मूल रूप से डायरेक्ट करंट (DC) के रूप में होती है। इसे घर में इस्तेमाल होने वाले अल्टरनेटिंग करंट (AC) उपकरणों के योग्य बनाने के लिए इनवर्टर का प्रयोग किया जाता है। भावना त्यागी का कहना है कि रूफटॉप सोलर सिस्टम में लगा इनवर्टर ग्रिड के निर्धारित वोल्टेज और फ्रीक्वेंसी मानकों से तालमेल बिठाकर डीसी बिजली को एसी बिजली में बदल देता है। इस प्रक्रिया के कारण सोलर बिजली से चलने वाले उपकरणों के प्रदर्शन में कोई तकनीकी रुकावट या गिरावट नहीं आती है और वे सामान्य ग्रिड बिजली की तरह ही सुचारू रूप से कार्य करते हैं।
सोलर एनर्जी स्टोरेज और बैटरी का इस्तेमाल
दिन के समय सूर्य के प्रकाश से बनने वाली अतिरिक्त सौर ऊर्जा को स्टोर करने के लिए बैटरी सिस्टम का प्रयोग किया जाता है। भावना त्यागी बताती हैं कि यह व्यवस्था ठीक उसी तरह काम करती है जैसे आम घरों में ग्रिड बिजली के कटने पर इनवर्टर और बैटरी से बैकअप लिया जाता है। दिन में जमा की गई बिजली का उपयोग रात के समय या बादलों वाले दिनों में बिना किसी रुकावट के किया जा सकता है। इससे उपभोक्ताओं को लगातार बिजली की आपूर्ति मिलती रहती है और ग्रिड पर निर्भरता कम हो जाती है।
वोल्टेज स्थिरता, हार्मोनिक्स और उपकरणों की सुरक्षा
सरकारी डिस्कॉम से मिलने वाली बिजली में अक्सर वोल्टेज का उतार-चढ़ाव, बिजली कटौती और हार्मोनिक्स की समस्या देखी जाती है, जो संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक्स को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसके विपरीत, एक गुणवत्तापूर्ण इनवर्टर के साथ लगा सोलर सिस्टम स्थिर वोल्टेज प्रदान करता है। हालांकि, यदि घटिया या पुराना इनवर्टर लगाया जाए, तो उसमें हार्मोनिक्स का स्तर बढ़ सकता है। यह बढ़ा हुआ हार्मोनिक्स कंप्यूटर, एयर कंडीशनर और रेफ्रिजरेटर जैसे कीमती उपकरणों के सर्किट को खराब कर सकता है। इसके अलावा, आवश्यकता से अत्यधिक बड़ा सोलर पैनल लगाने से ग्रिड में रिवर्स पावर फ्लो और वोल्टेज राइज की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है।
सुरक्षित और बेहतर सोलर सिस्टम के लिए जरूरी कदम
सोलर ऊर्जा का अधिकतम लाभ उठाने और उपकरणों की दीर्घायु सुनिश्चित करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां बरतनी चाहिए
- प्रमाणित इनवर्टर का चयन: हमेशा BIS अथवा IS प्रमाणित और प्रतिष्ठित ब्रांड्स का ही इनवर्टर स्थापित करवाएं।
- पावर क्वालिटी जांच: सिस्टम की स्थापना के बाद पावर क्वालिटी मीटर के जरिए वोल्टेज और हार्मोनिक्स की जांच अवश्य कराएं।
- नेट मीटरिंग का उपयोग: ऑन-ग्रिड नेट मीटरिंग सिस्टम सबसे सुरक्षित और व्यावहारिक विकल्प माना जाता है।



















