नई दिल्ली में आयोजित विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सम्मेलन (ESTIC-2026) को मंगलवार को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के तकनीकी भविष्य का खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश को अब केवल विदेशी नवाचारों को अपनाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। भारत को भविष्य की तकनीकों के निर्माण और उनके विकास में पूरी दुनिया का नेतृत्व करना होगा। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि 21वीं सदी का भारत नई सोच और अटूट आत्मविश्वास के साथ विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है।
तकनीक अपनाने वाले देश से वैश्विक निर्माता बनने का सफर
अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने अतीत और वर्तमान के अंतर को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि एक समय था जब दुनिया में कोई भी तकनीक विकसित होने के कई सालों बाद भारत पहुंचती थी। उस दौर में भारतीय उद्योग या तो उस तकनीक को उसी रूप में अपनाते थे या उसमें मामूली फेरबदल करके आगे बढ़ते थे।
"पहले दुनिया में कोई नई तकनीक विकसित होती थी, तो वह वर्षों बाद भारत पहुंचती थी, लेकिन अब 21वीं सदी का भारत नए आत्मविश्वास के साथ तकनीक का निर्माण कर रहा है।"
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का भारत अपनी प्राथमिकताओं को बदल चुका है। देश का लक्ष्य अब ऐसी तकनीकों को आकार देना है जो भारत के साथ-साथ पूरी दुनिया की वर्तमान और भविष्य की जरूरतों को पूरा कर सकें।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मानव सोच का संतुलन
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि AI नियमित और बार-बार किए जाने वाले कामों को तेजी से पूरा करके उत्पादकता में भारी वृद्धि कर सकता है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि तकनीक का इस्तेमाल इंसान की स्वतंत्र सोच को सीमित करने के लिए नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि तकनीक का मुख्य उद्देश्य इंसानी दिमाग की सोचने, समझने, विश्लेषण करने और नए विचार पैदा करने की क्षमता को और मजबूत बनाना होना चाहिए। AI को मानव बुद्धि के विकल्प के रूप में देखने के बजाय उसे इंसानी क्षमताओं को निखारने वाले माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
साइबर सुरक्षा और राष्ट्रीय अवसंरचना की रक्षा
AI के इस दौर में पैदा हो रही नई डिजिटल चुनौतियों के प्रति आगाह करते हुए प्रधानमंत्री ने साइबर सुरक्षा के बढ़ते खतरों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि तकनीक के दुरुपयोग से बनने वाले खतरे देश के वित्तीय नेटवर्क और राष्ट्रीय सुरक्षा प्रणालियों के लिए गंभीर चुनौती खड़े कर सकते हैं।
इन खतरों से निपटने के लिए प्रधानमंत्री ने AI पर आधारित सुरक्षा समाधान और रक्षा कवच विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ऐसे मजबूत सुरक्षा उपाय तैयार करने होंगे जो डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को सुरक्षित रख सकें ताकि तकनीक का उपयोग केवल मानवता के कल्याण और देश के सशक्तिकरण के लिए हो सके।
प्राचीन वैज्ञानिक विरासत से आधुनिक शोध की प्रेरणा
भारत के ऐतिहासिक ज्ञान आधार की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की संस्कृति हमेशा से खोज और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित रही है। प्राचीन भारत में शून्य की खोज, संख्या पद्धति का विकास और खगोल विज्ञान में हासिल की गई महान उपलब्धियां इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं।
उन्होंने वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और युवा उद्यमियों का आह्वान किया कि वे इस महान ऐतिहासिक विरासत से प्रेरणा लें। आधुनिक तकनीक और नए आत्मविश्वास के साथ काम करते हुए देश को शोध और विकास के नए शिखरों पर ले जाने की जरूरत है।
























